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महाराष्ट्र: जल संकट से निपटने के लिए गांववार कार्ययोजना 25 अक्टूबर तक जमा करने का निर्देश

 

मुंबई, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के जलापूर्ति एवं स्वच्छता मंत्री गुलाबराव पाटिल ने नागपुर, अमरावती और कोंकण संभागों में संभावित जल संकट से निपटने के लिए प्रशासन को 25 अक्टूबर तक गांववार कार्ययोजना तैयार कर जमा करने का निर्देश दिया है। मंत्री ने जल जीवन मिशन के तहत 75 से 99 प्रतिशत तक पूरे हो चुके पेयजल आपूर्ति परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने और उन्हें चालू करने के भी निर्देश दिए।

राज्य में कम बारिश के कारण सरकार पहले ही 304 तालुकाओं में सूखे की घोषणा कर चुकी है और इससे निपटने के लिए 12 उपाय शुरू किए गए हैं। एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में पाटिल ने नागपुर, अमरावती और कोंकण क्षेत्रों में जलापूर्ति की स्थिति, भूजल स्तर और संभावित जल संकट से निपटने के उपायों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि फिलहाल इन क्षेत्रों में पानी की गंभीर कमी नहीं है, लेकिन आने वाले महीनों को देखते हुए प्रशासन को पहले से तैयारी करनी होगी। उन्होंने कहा, ''प्रशासन को सक्रिय रहना चाहिए। कार्ययोजनाएं जमीनी निरीक्षण और जनप्रतिनिधियों, सरपंचों, ग्राम पंचायतों तथा स्थानीय अधिकारियों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के आधार पर तैयार की जानी चाहिए।''

मंत्री ने निर्देश दिया कि अंतिम चरण में पहुंच चुकी जलापूर्ति परियोजनाओं के लंबित कार्यों, जैसे पाइपलाइन बिछाने, पंप लगाने, बिजली कनेक्शन देने और ट्रांसफॉर्मर स्थापित करने का काम प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि 75 प्रतिशत से अधिक पूरी हो चुकी योजनाओं के पैकेज से जुड़े विवरणों का तत्काल सत्यापन और प्रमाणीकरण किया जाए, ताकि धनराशि जारी करने की प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो सके। टैंकरों पर निर्भर रहने की आशंका वाले गांवों के लिए स्थानीय जल स्रोतों को मजबूत करने की अलग कार्ययोजना बनाने का भी निर्देश दिया गया।

पाटिल ने कहा कि जिला योजना समिति (डीपीसी) के दो प्रतिशत फंड का मुख्य रूप से जल स्रोतों की क्षमता बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसके अलावा, जिला योजना, खनन और कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के फंड का उपयोग भूजल पुनर्भरण से जुड़े कार्यों में किया जाना चाहिए। इन कार्यों में कुओं का पुनर्भरण, खेतों में तालाबों का निर्माण, सीमेंट बांध, सीमेंट प्लग, कंटीन्यूअस कंटूर ट्रेंच (सीसीटी) और पुराने बांधों की मरम्मत शामिल हैं।

मंत्री ने दोहराया कि पानी के टैंकरों की तैनाती अंतिम विकल्प के रूप में ही की जानी चाहिए। इससे पहले उपलब्ध सार्वजनिक कुओं की सफाई और कीटाणुशोधन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्थानीय जल स्रोतों के पुनर्जीवन, पानी के प्रभावी बजट प्रबंधन और जल संरक्षण के अनुशासित तरीकों पर ध्यान देने को कहा। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि जल संकट से संबंधित शिकायत मिलने या स्थानीय परेशानी को लेकर मीडिया में खबर सामने आने पर तत्काल गांवों का दौरा किया जाए और आवश्यक कार्रवाई की जाए।

दीर्घकालिक संचालन सुनिश्चित करने के लिए पाटिल ने कहा कि पूरी हो चुकी और सफलतापूर्वक परीक्षण की गई जलापूर्ति योजनाओं को जिला परिषदों या ग्राम पंचायतों को सौंपने के लिए निश्चित समयसीमा तय की जाए। यदि स्थानीय निकाय योजनाओं को स्वीकार करने में देरी करते हैं, तो राज्य की नीति के दिशा-निर्देशों के अनुसार औपचारिक कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि जिला परिषदों और ग्राम पंचायतों को जलापूर्ति योजनाओं के संचालन, रखरखाव और बिजली बिलों के भुगतान की जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से निभानी होगी। ट्रांसफॉर्मर या बिजली कनेक्शन से जुड़ी समस्याओं के लगातार बने रहने पर स्थानीय अधिकारियों को जिला कलेक्टरों और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) के साथ सीधे समन्वय कर समाधान निकालने की सलाह दी गई।

--आईएएनएस

डीएससी