सोनम वांगचुक बातचीत की धीमी गति से 'निराश', लेह-कारगिल दूरी पर जताई चिंता
श्रीनगर, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच चल रही बातचीत की धीमी रफ्तार पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने सोमवार को कहा कि संवाद में हो रही देरी लोगों में निराशा पैदा कर रही है और इससे लेह-कारगिल के बीच विभाजन की भावना भी बढ़ सकती है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सोनम वांगचुक ने लिखा, "आज मेरी एनएसए के तहत हिरासत खत्म हुए ठीक एक महीना पूरा हो गया है। इस आदेश से हमें उम्मीद जगी थी कि केंद्र सरकार अपनी पुरानी गलतियों को सुधारना चाहता है और 'आपसी विश्वास' के साथ एक सार्थक संवाद आगे बढ़ेगा।"
उन्होंने कहा कि 4 फरवरी को हुई आखिरी बातचीत के ढाई महीने बाद भी अब तक अगली बैठक की तारीख तय नहीं की गई है। वांगचुक ने चेतावनी दी कि इस देरी का फायदा उठाकर कुछ संदिग्ध तत्व लेह और कारगिल के बीच यानी बौद्ध और मुस्लिम समुदायों के बीच दूरी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से अपील की कि वे राष्ट्रीय हित में जल्द कदम उठाएं और इस मुद्दे का समाधान करें।
लद्दाख में लद्दाख एपेक्स बॉडी (एलएबी) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) लंबे समय से राज्य का दर्जा, संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और जमीन व सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।
इन मांगों को लेकर 24 सितंबर 2025 को शुरू हुआ शांतिपूर्ण आंदोलन हिंसक हो गया था। लेह में प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में चार लोगों की मौत हो गई थी जबकि 80 से ज्यादा लोग, जिनमें सुरक्षाकर्मी भी शामिल थे, घायल हुए थे। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पें हुईं, भाजपा कार्यालय और पुलिस वाहनों में आग लगा दी गई।
स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को आंसू गैस, लाठीचार्ज और आखिरकार गोलियां चलानी पड़ीं। इसी दौरान सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत गिरफ्तार कर राजस्थान की जोधपुर जेल भेज दिया गया था। उन पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया गया था।
करीब 170 दिन हिरासत में रहने के बाद उन्हें 14 मार्च को जोधपुर केंद्रीय कारागार से रिहा किया गया। केंद्र सरकार ने लद्दाख में संवाद को आगे बढ़ाने के लिए उनकी हिरासत समाप्त कर दी थी। अब एक बार फिर वांगचुक ने सरकार से बातचीत तेज करने और हालात को संभालने की अपील की है।
--आईएएनएस
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