अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस: भारत में महिला श्रम भागीदारी और सामाजिक सुरक्षा में हुआ उल्लेखनीय सुधार
नई दिल्ली, 1 मई (आईएएनएस)। अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस (इंटरनेशनल लेबर डे) के मौके पर शुक्रवार को सरकार ने बताया कि देश में सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2015 में लगभग 19 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 64 प्रतिशत से ज्यादा हो गया है। वहीं, महिला श्रम भागीदारी दर 2017-18 में 23.3 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 40 प्रतिशत हो गई है, और महिलाएं अब नेतृत्व की भूमिकाओं में भी आगे आ रही हैं।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि महिलाएं अब आय बढ़ाने वाली गतिविधियों और स्थानीय व्यवसायों में ज्यादा शामिल हो रही हैं। उन्हें कौशल, सामाजिक सुरक्षा और औपचारिक सिस्टम तक पहुंच मिल रही है, जिससे वे आर्थिक ढांचे में अधिक दिखाई दे रही हैं।
आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के अनुसार, महिला श्रम भागीदारी दर 2017-18 के 23.3 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 40 प्रतिशत हो गई है।
बयान में आगे कहा गया कि ग्रामीण भारत इस बदलाव में सबसे आगे है। यह दिखाता है कि महिलाएं अब सिर्फ कभी-कभार काम करने वाली नहीं, बल्कि नियमित रूप से अर्थव्यवस्था में योगदान देने वाली बन रही हैं।
इसमें कहा गया कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी रोजगार के अवसरों में विस्तार और श्रम बाजार के औपचारिक होने की दिशा में बढ़ते कदम को दर्शाती है।
सरकार के प्रयासों का असर कर्मचारियों की स्वास्थ्य सेवाओं में भी दिख रहा है। कर्मचारी राज्य बीमा योजना के तहत जम्मू-कश्मीर के बडगाम में हाल ही में एक ईएसआईसी अस्पताल शुरू किया गया है, जो 50,000 से अधिक श्रमिकों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सेवाएं देगा।
भविष्य निधि, बीमा और स्वास्थ्य सेवाओं तक बढ़ती पहुंच खासकर महिलाओं के लिए फायदेमंद रही है, क्योंकि वे अधिकतर असंगठित क्षेत्र में काम करती हैं।
सरकार ने कहा कि ग्रामीण भारत में महिलाएं अब पारंपरिक भूमिकाओं से आगे बढ़कर बड़े स्तर पर उद्यमिता की ओर बढ़ रही हैं।
दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 10 करोड़ से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा गया है।
यह योजना पहले वित्तीय समावेशन के लिए शुरू हुई थी, लेकिन अब यह छोटे-छोटे व्यवसायों के नेटवर्क में बदल गई है, जहां महिलाएं उत्पादन, प्रबंधन और बिक्री कर रही हैं और कई बार अपने परिवार की मुख्य कमाने वाली बन रही हैं।
बयान के अनुसार, महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए लखपति दीदी योजना जैसी पहलें भी चलाई जा रही हैं, जिनका लक्ष्य करोड़ों महिलाओं को सालाना 1 लाख रुपए से अधिक कमाने में सक्षम बनाना है। इसके लिए उन्हें ऋण, कौशल और बाजार से जोड़ने की सुविधा दी जा रही है।
भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम भी तेजी से बढ़ रहा है, जहां 2.2 लाख से ज्यादा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप हैं, जो 23.3 लाख से अधिक रोजगार दे रहे हैं। इनमें से 1 लाख से ज्यादा स्टार्टअप में कम से कम एक महिला निदेशक हैं।
--आईएएनएस
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