☰
×

कोलकाता भगदड़: सीसीटीवी फुटेज में पुलिस की बातों को अनसुना कर रहे थे श्रद्धालु

 

कोलकाता, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तरी कोलकाता के चोरबागन सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल में 17 अक्टूबर को हुई भगदड़ की घटना, जिसमें 19 लोगों की जान चली गई थी, उसकी जांच कर रही कोलकाता पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) को 15 मिनट का एक अहम सीसीटीवी फुटेज मिला है। इस फुटेज में दिख रहा है कि पंडाल के अंदर और बाहर मौजूद श्रद्धालु, पुलिस की बार-बार की गई उस अपील को अनदेखा कर रहे थे जिसमें उनसे भीड़ न बढ़ाने के लिए कहा गया था।

शहर की पुलिस के सूत्रों ने बताया कि 17 अक्टूबर को शाम 7.15 बजे से 7.30 बजे तक के 15 मिनट के वीडियो फुटेज में दिख रहा है कि पंडाल में मौजूद कुछ पुलिसकर्मी वहां मौजूद भक्तों से बाहर निकलने का अनुरोध कर रहे थे, जबकि कुछ अन्य पुलिसकर्मी बाहर खड़े भक्तों से कह रहे थे कि जब तक अंदर वाले लोग बाहर नहीं आ जाते, तब तक वे अंदर न जाएं।

पुलिस के एक सूत्र ने बताया कि हमारे जवान पंडाल के अंदर और बाहर मौजूद भक्तों से अनुरोध कर रहे थे ताकि पंडाल के भीतर भीड़ न बढ़े। लेकिन बारिश की वजह से, न तो अंदर मौजूद भक्त बाहर निकले और न ही बाहर खड़े लोगों ने अंदर जाने की कोशिश रोकी। भगदड़ की घटना से ठीक पहले, अत्यधिक भीड़ के कारण पंडाल के अंदर दम घोंटू हालात बन गए थे।

उनके अनुसार, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिसकर्मियों द्वारा की गई कोशिशें न केवल 15 मिनट के वीडियो फुटेज में दिख रही हैं बल्कि जांच अधिकारियों द्वारा पूछताछ किए गए कुछ चश्मदीदों ने भी इसकी पुष्टि की है।

साथ ही, यह भी पता चला है कि पूजा समिति के आयोजकों द्वारा तैनात किए गए निजी सुरक्षा गार्ड किसी पेशेवर सुरक्षा एजेंसी से नहीं लिए गए थे। समिति ने कुछ स्थानीय बेरोजगार युवाओं को काम पर रखा था, जिन्हें भीड़ को संभालने के लिए जरूरी बुनियादी जानकारी या प्रशिक्षण तक नहीं था।

एसआईटी के सदस्य इस मामले की विस्तृत जानकारी जुटाने के लिए पूजा समिति के आयोजकों से पूछताछ कर रहे हैं।

एसआईटी के अलावा, राज्य सरकार द्वारा गठित छह सदस्यीय न्यायिक जांच पैनल भी इस हादसे की अलग से जांच कर रहा है। न्यायिक जांच पैनल की अध्यक्ष जस्टिस अनिंदिता रॉय सरस्वती (सेवानिवृत्त) ने सोमवार को मीडिया को बताया कि वे 31 अक्टूबर से सबूत जुटाने का काम शुरू करेंगे।

इस न्यायिक जांच पैनल को अपना काम पूरा करके गठन के छह महीने के भीतर राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपनी है।

--आईएएनएस

डीकेएम/पीएम