कोहाट हमले ने पाकिस्तान की सुरक्षा और खुफिया नाकामियों पर गंभीर सवाल उठाए
इस्लामाबाद, 22 सितंबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा (केपी) प्रांत के कोहाट जिले में हुआ ताजा हमला देश के सीमावर्ती इलाकों में आतंकवाद के लगातार खतरे को दिखाता है।
एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस्लामाबाद लंबे समय से अफगान तालिबान पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को सुरक्षित पनाह और सपोर्ट देने का आरोप लगाता रहा है, जो पाकिस्तान में एक कट्टरपंथी इस्लामिक देश बनाने की कोशिश कर रहा एक चरमपंथी ग्रुप है।
मिलिटेंट हमले में मरने वालों की संख्या 31 हो गई है, जिनमें 16 पुलिसवाले शामिल हैं। पुलिस के साथ झड़पों के कारण हालात बिगड़ गए थे और इत्तिहाद-उल-मुजाहिदीन ने हमले की जिम्मेदारी ली है। जाने-माने डिप्लोमेसी और इंटरनेशनल कोऑपरेशन एक्सपर्ट पीटर नूप ने इंडिया नैरेटिव में लिखा कि इस ग्रुप के टीटीपी के साथ करीबी रिश्ते हैं।
उन्होंने कहा कि यह बात कि मिलिटेंट पुलिस कंपाउंड के अंदर खुद को रोकने में कामयाब रहे, इस हमले को खास तौर पर गंभीर बनाती है। यह जगह नागरिकों को मिलिटेंट हिंसा से बचाने में सबसे आगे है।
इस घटना ने पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए दुखद घटना ला दी है, कई अन्य घायल हो गए हैं, और पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर इलाके के समुदायों के बीच चिंता बढ़ा दी है। नूप ने बताया कि इसने पाकिस्तान की इंटेलिजेंस इकट्ठा करने और काउंटर-टेररिज्म कोशिशों में साफ कमियों को भी उजागर किया है।
यह बताते हुए कि यह घटना असर और जवाबदेही पर सवाल उठाएगी, उन्होंने कहा कि इससे घुसपैठ की संभावना और पाकिस्तान में पुलिसिंग और इंटेलिजेंस ऑपरेशन के भरोसे की भी जांच होगी।
नूप ने लिखा, "क्या छूट गया, और ऐसा कैसे हो सकता है? विदेशी एजेंटों की असल में क्या भूमिका थी? लोकल फोर्स की इन्फॉर्मेशन पोजीशन की ताकत कितनी है? क्या लोकल लोगों और पुलिस के बीच रिश्ता जरूरी लेवल का है? क्या अगले हमले को लोकल या क्रॉस-बॉर्डर कोऑपरेशन को बढ़ाकर असरदार तरीके से रोका जा सकता है? मुश्किल सवाल पूछे जाएंगे।"
--आईएएनएस
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