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पिछले दशक के आर्थिक सुधारों ने वैश्विक झटकों के बीच भारत को बनाया अधिक मजबूत और लचीला: शक्तिकांत दास

 

नई दिल्ली, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव शक्तिकांत दास ने रविवार को कहा कि पिछले एक दशक में लागू किए गए व्यापक आर्थिक सुधारों ने भारत को वैश्विक झटकों के बीच अधिक मजबूत, स्थिर और लचीली अर्थव्यवस्था के रूप में उभरने में मदद की है। उन्होंने कहा कि इन सुधारों ने मजबूत संस्थाओं का निर्माण किया, व्यापक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित की और उत्पादक क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा दिया।

राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए पूर्व आरबीआई गवर्नर और वित्त मंत्रालय के पूर्व आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में लागू किए गए सुधार किसी एक समय के लिए किए गए कदम नहीं थे, बल्कि उन्हें इस तरह डिजाइन किया गया था कि वे अर्थव्यवस्था को झटकों को सहने और तेजी से उबरने की क्षमता प्रदान करें।

उन्होंने कहा कि लचीला महंगाई लक्ष्यीकरण, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी), डिजिटल भुगतान का विस्तार और बैंकिंग क्षेत्र में सुधार ऐसे प्रमुख कदम रहे हैं, जिन्होंने भारत की आर्थिक मजबूती को बढ़ाया है।

दास ने कहा कि भारत का प्रदर्शन ऐसे समय में विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा है, जब दुनिया भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक व्यापार विखंडन, तकनीकी प्रतिबंध, ऊर्जा कीमतों में अस्थिरता और विकसित देशों में बढ़ते सार्वजनिक ऋण जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है।

उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही, जिसे मजबूत घरेलू मांग और निवेश का समर्थन मिला। उन्होंने कहा कि भारत अब 8 प्रतिशत वृद्धि दर के बेहद करीब पहुंच चुका है। उन्होंने जुलाई-सितंबर 2025 से अप्रैल-जून 2026-27 तक लगातार चार तिमाहियों में 8 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भारत की आर्थिक क्षमता को दर्शाता है।

शक्तिकांत दास ने आगे कहा कि भारत की आर्थिक मजबूती का दूसरा बड़ा आधार व्यापक आर्थिक स्थिरता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में लागू लचीले महंगाई लक्ष्यीकरण ढांचे ने भारत को कोविड-19 महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्ष जैसे कई वैश्विक झटकों से प्रभावी ढंग से निपटने में मदद की।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार द्वारा विकास को समर्थन देने वाले खर्च को जारी रखते हुए राजकोषीय संतुलन बनाए रखने की नीति ने अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

जीएसटी को एक महत्वपूर्ण कर सुधार बताते हुए दास ने कहा कि इसने पूरे देश को एक एकीकृत बाजार में बदलने, करों के दोहरे प्रभाव को कम करने और अर्थव्यवस्था के औपचारिककरण को बढ़ावा देने में मदद की है।

उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र के पुनरुद्धार को भारत की आर्थिक मजबूती की एक और "परिभाषित विशेषता" बताया। उन्होंने कहा कि बैंकिंग प्रणाली की बेहतर वित्तीय स्थिति ने निवेश और आर्थिक गतिविधियों को समर्थन दिया है।

दास ने कहा कि परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में बड़े पैमाने पर किए गए निवेश ने भी अर्थव्यवस्था की क्षमता को मजबूत किया है। पीएम गतिशक्ति, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति, सागरमाला और उड़ान जैसी पहलों ने आर्थिक गतिविधियों में आने वाली बाधाओं को कम किया और निवेश आधारित विकास की मजबूत नींव तैयार की।

ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भी भारत ने अपनी स्थिति मजबूत की है। उन्होंने कहा कि देश ने जीवाश्म ईंधन, नवीकरणीय ऊर्जा, जैव ईंधन और परमाणु ऊर्जा के बीच संतुलित ऊर्जा आधार विकसित किया है, जिससे बाहरी ऊर्जा झटकों का असर कम करने में मदद मिली है।

शक्तिकांत दास ने कहा कि भारत विनिर्माण क्षेत्र के पुनरुत्थान का भी साक्षी बन रहा है। प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजनाओं, सेमीकंडक्टर निवेश, ऑटोमेशन और इंडस्ट्री 4.0 तकनीकों ने विनिर्माण क्षेत्र को नई गति दी है।

भविष्य की विकास यात्रा पर बोलते हुए उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), गहरे और विकसित वित्तीय बाजार, रणनीतिक आत्मनिर्भरता, सतत विकास और मानव पूंजी को भारत की अगली आर्थिक छलांग के पांच प्रमुख आधार बताया।

उन्होंने कहा कि सुधारों की गति बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि भारत का लक्ष्य केवल तेजी से विकास करना नहीं, बल्कि दीर्घकालिक, टिकाऊ और लचीला विकास हासिल करना है। उन्होंने बताया कि भारत की आने वाली आर्थिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि देश सुधारों, निवेश, नवाचार और मानव संसाधन विकास को कितनी मजबूती से आगे बढ़ाता है।

--आईएएनएस

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