केरल पीएससी में मूल्यांकन की गड़बड़ी से राजनीतिक हंगामा, मंत्री ने उच्च-स्तरीय जांच की मांग की
तिरुवनंतपुरम, 1 जुलाई (आईएएनएस)। केरल लोक सेवा आयोग (केपीएससी) में मूल्यांकन की एक बड़ी चूक ने राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। इससे राज्य योजना बोर्ड में वरिष्ठ पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया पर नए सिरे से संदेह पैदा हो गया है और एक स्वतंत्र, उच्च-स्तरीय जांच की मांग उठने लगी है।
खेल मंत्री ओ.जे. जेनिश, जो यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष भी हैं, उन्होंने बुधवार को पीएससी की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस घटना ने नौकरी के हजारों उम्मीदवारों का भरोसा तोड़ दिया है।
मंत्री ने कहा कि केरल के युवाओं की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि इन गड़बड़ियों के लिए सिर्फ अंदरूनी जांच काफी नहीं है और घोषणा की कि वह ज्यादा व्यापक जांच की मांग के लिए मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन से मिलेंगे।
जेनिश ने कहा कि अगर जनता को यह शक हो कि पिछले एक दशक में पीएससी का राजनीतिक इस्तेमाल हुआ है, तो इसमें जनता की कोई गलती नहीं है।
उन्होंने कहा, "सिर्फ अंदरूनी विजिलेंस जांच से भरोसा नहीं जगेगा।" उन्होंने जवाबदेही तय करने के लिए निष्पक्ष जांच की मांग की।
यह विवाद 13 जुलाई, 2023 को हुई परीक्षा से जुड़ा है। यह परीक्षा स्टेट प्लानिंग बोर्ड में 'चीफ, इंडस्ट्री एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डिवीजन', 'चीफ, पर्सपेक्टिव प्लानिंग डिवीजन' और 'चीफ, प्लानिंग कोऑर्डिनेशन डिवीजन' के पदों के लिए आयोजित की गई थी।
इन पदों के लिए बेसिक मासिक वेतन 1.25 लाख रुपए है।
पीएससी ने 31 मई 2025 को रैंक लिस्ट जारी की और 'इंडस्ट्री एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डिवीजन' के लिए पहले स्थान पर रहे उम्मीदवार की बहुत तेजी से नियुक्ति कर दी गई।
यह मामला तब सामने आया जब असफल उम्मीदवारों ने, जिन्हें अपने स्कोर में गड़बड़ी का शक था, अपनी जांची गई आंसर स्क्रिप्ट की कॉपी मांगी।
'सूचना का अधिकार अधिनियम' (आरटीआई) के तहत उनके अनुरोध और बाद की अपीलों को पीएससी द्वारा खारिज किए जाने के बाद, एक उम्मीदवार ने स्टेट इंफॉर्मेशन कमीशन का दरवाजा खटखटाया।
जब कमीशन जानकारी सार्वजनिक करने का आदेश देने ही वाला था, तब पीएससी ने आंसर शीट उपलब्ध कराईं। इससे पता चला कि दस डिस्क्रिप्टिव (वर्णनात्मक) उत्तरों की जांच ही नहीं की गई थी।
अब यह बात सामने आई है कि इस चूक का असर उन सभी 228 उम्मीदवारों पर पड़ा जो इन तीन पदों के लिए हुई कॉमन परीक्षा में शामिल हुए थे।
पीएससी ने इस चूक की अंदरूनी विजिलेंस जांच की घोषणा की है। उसने कहा है कि संशोधित रैंक लिस्ट तैयार करने से पहले अब सभी उम्मीदवारों के बिना जांचे गए उत्तरों का मूल्यांकन किया जाएगा।
उसने यह भी कहा कि चूंकि कुछ उम्मीदवार पहले ही केरल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल का रुख कर चुके हैं, इसलिए जिन लोगों को पहले ही एडवाइस मेमो और नियुक्ति मिल चुकी है, उनके मामले में आगे की कार्रवाई ट्रिब्यूनल के फैसले पर निर्भर करेगी।
सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले वामपंथी विपक्ष की चुप्पी पर अब सवाल उठ रहे हैं। विधानसभा का सत्र आज खत्म हो रहा है, लेकिन आम तौर पर अपनाए जाने वाले तरीके के उलट, उन्होंने इस मामले पर पूरी तरह चुप्पी साधे रखी है, जो वामपंथियों के काम करने के तरीके से मेल नहीं खाता।
खास बात यह है कि मौजूदा पीएससी बोर्ड में 15 सदस्य हैं और इन सभी की नियुक्ति पिनाराई विजयन सरकार ने तब की थी जब वह केरल में सत्ता में थी।
--आईएएनएस
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