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महा कुंभ वायरल गर्ल मोनालिसा मामले में अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित, बुधवार को आ सकता है आदेश

 

कोच्चि, 2 जून (आईएएनएस)। केरल हाईकोर्ट ने कुंभ मेला से सोशल मीडिया पर चर्चित हुईं मोनालिसा भोसले और उनके पति मोहम्मद फरमान खान की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका पर मंगलवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। यह मामला अंतरधार्मिक विवाह, उम्र संबंधी विवाद और कथित अपहरण के आरोपों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागथ ने सुनवाई के बाद संकेत दिया कि मामले में आदेश बुधवार को सुनाया जा सकता है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि विवाह को लेकर मध्य प्रदेश में कथित धमकियों का सामना कर रहे दंपति केरल में होने के कारण खुद को भाग्यशाली मान सकते हैं। इस पर दंपति के वकील ने जवाब दिया कि "यही वजह है कि हम आज जीवित हैं।"

मोनालिसा भोसले 2025 के कुंभ मेले में मनकों की मालाएं बेचते हुए वायरल वीडियो के कारण देशभर में चर्चित हुई थीं। इसी वर्ष उन्होंने फरमान खान से केरल में विवाह किया था। बाद में यह विवाह विवादों में घिर गया, जब आरोप लगाया गया कि शादी के समय मोनालिसा कानूनी विवाह आयु से कम थीं।

दंपति की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एम. ससींद्रन ने अदालत में कहा कि कुछ कट्टरपंथी समूह और मध्य प्रदेश प्रशासन के कुछ अधिकारी मोनालिसा को नाबालिग साबित कर विवाह को अमान्य ठहराने की कोशिश कर रहे हैं। उनका दावा है कि विवाह के समय मोनालिसा बालिग थीं और बाद में सरकारी रिकॉर्ड में कथित तौर पर हेरफेर किया गया।

वहीं मध्य प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि विवाह की वैधता पर ही सवाल है, क्योंकि शादी हिंदू रीति-रिवाजों से संपन्न हुई जबकि दूल्हा मुस्लिम है।

राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि मोनालिसा की वास्तविक जन्मतिथि दिसंबर 2009 है, जिसके अनुसार विवाह के समय वह नाबालिग थीं। ऐसे में बाल संरक्षण कानूनों के प्रावधान लागू हो सकते हैं।

सरकार ने यह भी कहा कि फरमान खान के खिलाफ दर्ज कथित अपहरण मामले में जालसाजी से जुड़े आरोप भी जोड़े जा सकते हैं। आरोप है कि जन्म प्रमाणपत्र और विवाह प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।

हालांकि अदालत ने राज्य सरकार के कुछ तर्कों पर सवाल उठाते हुए यह भी कहा कि कथित पीड़िता ने स्वयं अपने पति के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है।

मामले ने इसलिए भी व्यापक ध्यान आकर्षित किया है क्योंकि इसके समानांतर केरल और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों में कानूनी कार्यवाही चल रही है।

इस बीच, तिरुवनंतपुरम की एक पॉक्सो अदालत में दायर निजी शिकायत में फरमान खान के अलावा एम.वी. गोविंदन, वी. शिवनकुट्टी और ए.ए. रहीम समेत कई वामपंथी नेताओं पर विवाह कराने में कथित भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया है।

व्यक्तिगत स्वतंत्रता, अंतरधार्मिक विवाह, आयु निर्धारण और आपराधिक दायित्व जैसे कई संवेदनशील कानूनी सवालों से जुड़े इस मामले में बुधवार को आने वाला हाईकोर्ट का फैसला दंपति और उनसे जुड़े कानूनी विवादों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

--आईएएनएस

डीएससी