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सबरीमाला सोना चोरी मामला: केरल हाईकोर्ट ने एसआईटी को लगाई फटकार

 

कोच्चि, 12 जनवरी (आईएएनएस)। केरल हाईकोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में सोना चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) को आरोपी केपी शंकरदास की गिरफ्तारी में देरी को लेकर कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने जांच एजेंसी के रवैये पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि वह एसआईटी और जांच अधिकारियों की कार्रवाई को स्वीकार नहीं कर सकती।

हाईकोर्ट की पीठ ने कहा कि ट्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) के पूर्व सदस्य शंकरदास को आरोपी बनाए जाने के बाद से ही अस्पताल में भर्ती बताया जा रहा है। अदालत ने इस पर भी सवाल उठाया कि शंकरदास के बेटे, जो एक शीर्ष पुलिस अधिकारी हैं, उनके साथ अस्पताल गए, ऐसे में गिरफ्तारी न होने के पीछे दिए गए कारणों की विश्वसनीयता संदिग्ध है।

यह टिप्पणी अदालत ने तीन आरोपियों स्वर्ण व्यापारी गोवर्धन, देवस्वोम बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष ए. पद्मकुमार और मुरारी बाबू की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की। कोर्ट ने जमानत पर फैसला बाद में सुनाने के लिए सुनवाई स्थगित कर दी।

अदालत ने एसआईटी के कामकाज पर नाराजगी जताते हुए कहा कि राज्य में इस तरह की अनियमितताएं कैसे हो सकती हैं। साथ ही, उसने सबरीमाला मंदिर प्रशासन से जुड़े कथित प्रायोजकों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए।

कोर्ट ने टिप्पणी की कि जांच ऐसे प्रतीत होती है जैसे “छोटे चारे का इस्तेमाल कर बड़ी मछली पकड़ने” की कोशिश की जा रही हो, जो जांच की दिशा और मंशा पर सवाल खड़े करता है। अदालत ने दोहराया कि पद्मकुमार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।

देवस्वोम बोर्ड की प्रासंगिकता पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट ने पूछा कि यदि सभी निर्णय एक ही व्यक्ति उन्नीकृष्णन पोट्टी ले सकता है, तो बोर्ड की आवश्यकता ही क्या है। उल्लेखनीय है कि पोट्टी इस मामले के मुख्य आरोपी हैं और उनके साथ 11 अन्य आरोपी जेल में हैं।

बताया गया कि जिस समय यह कथित सोना चोरी हुई, उस दौरान शंकरदास, पद्मकुमार और एन. विजयकुमार देवस्वोम बोर्ड के सदस्य थे। पद्मकुमार और विजयकुमार, जो दोनों शीर्ष माकपा नेता हैं, जेल में हैं, जबकि शंकरदास फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं।

इस मामले में आरोपी गोवर्धन ने अपनी जमानत याचिका में दावा किया कि सबरीमाला के श्रीकोविल (गर्भगृह) के दरवाजों पर सोना चढ़ाने का काम उन्होंने किया था, जिस पर लगभग 35 लाख रुपये खर्च हुए।

--आईएएनएस

डीएससी