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केरल पीएससी परीक्षा मूल्यांकन विवाद को लेकर विजिलेंस जांच कराने पर विचार कर रही सरकार

 

तिरुवनंतपुरम, 5 जुलाई (आईएएनएस)। केरल में पब्लिक सर्विस कमीशन (पीएससी) की भर्ती परीक्षा के मूल्यांकन में अनियमितताओं को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। बढ़ते विरोध और सवालों के बीच राज्य सरकार अब इस मामले की जांच विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (वीएसीबी) को सौंपने पर गंभीरता से विचार कर रही है।

सरकार के गृह विभाग ने यह तय किया है कि पहले कानूनी राय ली जाएगी कि एक संवैधानिक संस्था होने के कारण पीएससी के कामकाज की विजिलेंस जांच कराने में कोई संवैधानिक या कानूनी बाधा तो नहीं है। कानूनी राय मिलने के बाद आगे का फैसला लिया जाएगा।

सरकार का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब पीएससी की आंतरिक जांच की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि जांच ऐसे अधिकारी को सौंपी गई है, जो सीधे पीएसी अध्यक्ष को रिपोर्ट करता है। विपक्ष और कई अन्य पक्षों का आरोप है कि इस व्यवस्था से जांच की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है और जिम्मेदार लोगों को बचाने की कोशिश हो सकती है।

इन चिंताओं को देखते हुए राज्य सरकार अब मामले की जांच विजिलेंस विभाग को सौंपने की संभावना पर विचार कर रही है। इस संबंध में अंतिम फैसला राज्य मंत्रिमंडल की अगली बैठक में लिए जाने की उम्मीद है।

पूरा विवाद राज्य योजना बोर्ड में चीफ स्तर के तीन पदों की भर्ती परीक्षा से जुड़ा है। आरोप है कि उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के दौरान परीक्षकों ने अभ्यर्थियों के 10 प्रश्नों के उत्तरों की जांच ही नहीं की।

इतनी बड़ी चूक के बावजूद पीएससी ने तीन में से दो पदों की रैंक सूची जारी कर दी और दो उम्मीदवारों की नियुक्ति भी कर दी। यह मामला तब सामने आया, जब एक उम्मीदवार ने केरल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल में शिकायत दर्ज कराई।

ट्रिब्यूनल में सुनवाई के दौरान पीएससी ने स्वीकार किया कि मूल्यांकन प्रक्रिया में गलती हुई थी। इस परीक्षा में 200 से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए थे।

इसके बाद पीएससी ने सभी उत्तर पुस्तिकाओं का दोबारा मूल्यांकन करने और नई रैंक सूची जारी करने की घोषणा की थी। हालांकि, अभ्यर्थियों का आरोप है कि अब तक दोबारा मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

यह विवाद अब सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहा। राज्य में अन्य कई सरकारी भर्तियां भी जांच के दायरे में आ गई हैं। फिशरीज एक्सटेंशन ऑफिसर, असिस्टेंट इंफॉर्मेशन ऑफिसर, डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (स्पेशल रिक्रूटमेंट), लॉ कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर, केरल एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (केएएस) और विश्वविद्यालयों में पब्लिक रिलेशंस ऑफिसर की भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी शिकायतें दर्ज कराई गई हैं।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, संबंधित मंत्रियों ने मुख्यमंत्री वीडी सतीशन से इन सभी भर्ती प्रक्रियाओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। सरकार अब इन शिकायतों को भी विजिलेंस विभाग को सौंपने पर विचार कर रही है।

--आईएएनएस

वीकेयू/डीकेपी