कमजोर मानसून से केरल में गहराया बिजली संकट, शुरू हुई लोड शेडिंग; विपक्ष हमलावर
तिरुवनंतपुरम, 16 जुलाई (आईएएनएस)। कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून के कारण केरल हाल के वर्षों के सबसे गंभीर बिजली संकट का सामना कर रहा है। राज्य के जलविद्युत परियोजनाओं के जलाशयों में पानी का स्तर तेजी से घटने के कारण बिजली उत्पादन में भारी कमी आई है, जिससे राज्य में फिर से लोड शेडिंग शुरू करनी पड़ी है। इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है।
केरल राज्य विद्युत बोर्ड (केएसईबी) के जलाशयों में जल भंडारण क्षमता घटकर केवल 29 प्रतिशत रह गई है। राज्य की प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं इडुक्की और सबरिगिरी के जलाशयों में भी पानी का स्तर पिछले साल की तुलना में काफी कम है और ये अपनी कुल क्षमता के लगभग एक-तिहाई पर ही संचालित हो रहे हैं।
जलस्तर में गिरावट के कारण राज्य का घरेलू बिजली उत्पादन 44.221 मिलियन यूनिट से घटकर 16.608 मिलियन यूनिट रह गया है। इससे केरल की अपनी बिजली उत्पादन क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई है।
सिर्फ बड़ी परियोजनाएं ही नहीं, बल्कि शोलायर, इडामलयार और कुंडाला जैसे जलाशयों में भी जलस्तर काफी नीचे पहुंच गया है। वहीं, मट्टुपट्टी जलाशय में केवल 10 प्रतिशत पानी बचा है। सबरिगिरी प्रणाली पर निर्भर कक्कड़, अलुंकल और करिक्कायम जैसी कई परियोजनाओं में बिजली उत्पादन लगभग ठप हो गया है।
इस बीच राज्य में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में केरल की दैनिक बिजली खपत 88.64 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई है, जबकि 68.81 मिलियन यूनिट बिजली दूसरे राज्यों से महंगे दामों पर खरीदी जा रही है। यदि बाहरी आपूर्ति में किसी तरह की बाधा आती है तो राज्य में बड़े पैमाने पर ब्लैकआउट की आशंका है।
राज्य के बिजली मंत्री सनी जोसेफ ने गुरुवार को स्वीकार किया कि स्थिति गंभीर है। उन्होंने कहा कि बिजली की खपत तेजी से बढ़ी है और फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि बिजली कटौती कब तक जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि बिजली विनिमय व्यवस्था के तहत पहले ली गई बिजली भी लौटानी है, जबकि केंद्र से मिलने वाली बिजली का आवंटन भी कम हो गया है, जिससे संकट और बढ़ गया है।
बिजली कटौती को लेकर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा है। पूर्व शिक्षा मंत्री और माकपा नेता वी. शिवनकुट्टी ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा कि "दिन में सूरज लोगों को ऊर्जा देता है, लेकिन रात में 'सनी' लोगों को परेशान कर रहे हैं।" उनका इशारा बिजली मंत्री सनी जोसेफ और रात में हो रही बिजली कटौती की ओर था।
हालांकि, सनी जोसेफ ने प्रशासनिक विफलता के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार के दौरान भी ऐसी बिजली पाबंदियां लागू की गई थीं। उन्होंने भविष्य में इस तरह की स्थिति से निपटने के लिए बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता बढ़ाने की योजना की भी घोषणा की।
लगातार हो रही लोड शेडिंग से आम जनता में नाराजगी बढ़ रही है। बिजली कटौती का असर शहरों से लेकर सार्वजनिक कार्यक्रमों तक पर पड़ा है। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन की मौजूदगी वाले एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भी बिजली बाधित हुई, जिससे संकट की गंभीरता सामने आई।
जलाशयों में लगातार घटते जलस्तर और निकट भविष्य में राहत के कोई स्पष्ट संकेत नहीं होने के कारण आने वाले हफ्तों में केरल का बिजली संकट और गहरा सकता है।
--आईएएनएस
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