प्रवासी मलयालियों के लिए नए विकल्प की तैयारी, केरल सरकार ने खत्म की लोक केरल सभा
तिरुवनंतपुरम, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। दुनिया भर में रहने और काम करने वाले लाखों प्रवासी मलयालियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए बनाई गई लोक केरल सभा को समाप्त करने के फैसले के बाद अब केरल सरकार एक नई व्यवस्था तैयार करने में जुटी है। मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने गुरुवार को विधानसभा में इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि पुराना मंच अपने उद्देश्य को पूरा करने में सफल नहीं रहा और इसकी जगह अधिक प्रभावी व्यवस्था लाई जाएगी।
विधानसभा में प्रवासी कल्याण योजनाओं में देरी और लोक केरल सभा को समाप्त किए जाने से जुड़े स्थगन प्रस्ताव पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ऐसी नई प्रणाली पर विचार कर रही है, जिसके जरिए प्रवासी भारतीय अपनी समस्याएं सरकार तक पहुंचा सकें, राज्य के विकास में योगदान दे सकें और अपने निवेश को उत्पादक क्षेत्रों में लगा सकें।
सरकार ने प्रवासी समुदाय और उनके संगठनों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने के लिए ग्लोबल नोरका कोऑर्डिनेशन काउंसिल बनाने का प्रस्ताव रखा है।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक समिति इस बात पर विचार कर रही है कि प्रवासी मलयालियों के लिए कौन-सी संस्थागत व्यवस्था सबसे उपयुक्त होगी।
लोक केरल सभा की शुरुआत वर्ष 2018 में तत्कालीन पिनाराई विजयन सरकार ने की थी। इसका उद्देश्य दुनिया भर में बसे मलयाली समुदाय के प्रतिनिधियों और जनप्रतिनिधियों को एक मंच पर लाना था, ताकि प्रवास, निवेश, कल्याण और अनिवासी केरलवासियों से जुड़े अन्य मुद्दों पर चर्चा हो सके।
उस समय विपक्ष में रही कांग्रेस नीत यूडीएफ ने इस मंच की बैठकों का बहिष्कार किया था। यूडीएफ का आरोप था कि इस पर अनावश्यक खर्च किया जा रहा है और इसकी सिफारिशों को लागू नहीं किया जाता। अब राज्य सरकार ने इस मंच को मौजूदा स्वरूप में समाप्त करने का फैसला किया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह साबित करने की होगी कि प्रस्तावित नई व्यवस्था वास्तव में प्रवासियों को ठोस लाभ पहुंचा सकती है, न कि केवल एक पुराने मंच की जगह नया मंच बनकर रह जाए।
विधानसभा में हुई चर्चा के दौरान प्रवासी कल्याण बोर्ड की आर्थिक स्थिति भी सामने आई।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2020-21 में बोर्ड के सदस्यों की संख्या 17,771 थी। अब यह संख्या बढ़कर 1,00,495 हो गई है। बोर्ड की औसत मासिक आय करीब 16.7 करोड़ रुपए है, जबकि मासिक खर्च लगभग 35 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।
उन्होंने बताया कि पिछले पांच महीनों में राज्य सरकार ने पेंशन भुगतान के लिए 32 करोड़ रुपए दिए हैं, लेकिन अभी भी बकाया भुगतान किया जाना बाकी है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, बोर्ड के पास 700 करोड़ रुपए से अधिक का अंशदान बकाया है। उन्होंने प्रवासी संगठनों से इस राशि की वसूली में सहयोग करने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नोरका की बीमा योजनाओं के तहत दावों की संख्या काफी बढ़ गई है, जिससे इन योजनाओं का नवीनीकरण करना मुश्किल हो गया है। सरकार अब नई व्यवस्था पर काम कर रही है।
प्रवासियों की एक अन्य बड़ी समस्या, हवाई यात्रा के बढ़ते खर्च का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने कई बार केंद्र सरकार से हवाई किरायों को नियंत्रित करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि घर आने-जाने का बढ़ता खर्च आम प्रवासी श्रमिकों की बचत को खत्म कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार जल्द ही लोका केरल सभा के विकल्प के रूप में नई व्यवस्था लेकर आएगी और साथ ही प्रवासी कल्याण तथा निवेश से जुड़े मुद्दों पर काम जारी रखेगी।
--आईएएनएस
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