केरल भाजपा ने नए प्रशासनिक सुधार आयोग की जरूरत पर उठाए सवाल
तिरुवनंतपुरम, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। केरल भाजपा ने राज्य में एक और प्रशासनिक सुधार आयोग बनाने की जरूरत पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने वीडी सतीशन के नेतृत्व वाली सरकार से कहा कि नए आयोग पर जनता का और पैसा खर्च करने से पहले यह बताया जाए कि पिछले आयोग की सिफारिशों का क्या हुआ।
भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य कुम्मनम राजशेखरन ने सोमवार को कहा कि सरकार को पांचवें प्रशासनिक सुधार आयोग के गठन के फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए। इस आयोग का अध्यक्ष आईयूएमएल नेता एमके मुनीर को बनाया गया है और उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है। आयोग का औपचारिक गठन 1 अक्टूबर को सरकारी आदेश के जरिए किया गया।
कुम्मनम ने कहा कि चौथे प्रशासनिक सुधार आयोग का गठन अगस्त 2016 में पहले पिनाराई विजयन सरकार के दौरान किया गया था। पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन इसके अध्यक्ष थे। इस आयोग ने अपना कार्यकाल खत्म होने से पहले 13 रिपोर्ट सौंपी थीं।
तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की ओर से विधानसभा में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 30 अप्रैल 2021 तक इस आयोग पर राज्य सरकार के खजाने से 10.79 करोड़ रुपए खर्च हुए थे।
केरल डेवलपमेंट रिपोर्ट 2026 के अनुसार, 13 रिपोर्टों में से पांच को मंजूरी देकर लागू किया जा चुका है, जबकि बाकी रिपोर्ट अभी विचाराधीन हैं।
इन सिफारिशों की जांच के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति भी बनाई गई थी।
अब कुम्मनम ने मांग की है कि सरकार प्रत्येक सिफारिश की सही स्थिति सार्वजनिक करे। साथ ही यह भी बताए कि पिछले आयोग पर खर्च किए गए पैसे से क्या नतीजे हासिल हुए।
उन्होंने सवाल किया कि जब प्रशासनिक सुधार विभाग के पास सुधार से जुड़े प्रस्तावों की जांच और उन पर आगे की कार्रवाई के लिए पहले से व्यवस्था मौजूद है तो राज्य को एक और आयोग की जरूरत क्यों है?
कुम्मनम ने कहा, ''फिर एक अध्यक्ष, फिर कैबिनेट रैंक, फिर स्टाफ, फिर ऑफिस, फिर गाड़ी, फिर यात्रा भत्ते और फिर जनता का पैसा।'' उन्होंने नए आयोग से राज्य पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ पर सवाल उठाया।
उन्होंने मांग की कि सरकार आयोग पर होने वाले कुल खर्च की जानकारी सार्वजनिक करे। इसमें अध्यक्ष का वेतन और भत्ते, निजी स्टाफ, कार्यालय की सुविधाएं, वाहन और यात्रा का खर्च शामिल है।
कुम्मनम ने कहा, ''सही सवाल यह नहीं है कि कितने आयोग बनाए गए, बल्कि यह है कि इन आयोगों से शासन व्यवस्था में क्या बदलाव आया।''
एमके मुनीर को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिए जाने के फैसले को लेकर सत्तारूढ़ यूडीएफ के भीतर भी राजनीतिक विवाद शुरू हो चुका है। यूडीएफ संयोजक अदूर प्रकाश ने इस बात पर नाराजगी जताई है कि फैसला लेने से पहले उनसे सलाह नहीं ली गई।
--आईएएनएस
एएमटी/डीकेपी