×

केप टाउन में 69वें कॉमनवेल्थ संसदीय सम्मेलन में केरल विधानसभा की नवाचार और समावेशी शासन की पहल हुई पेश

 

केप टाउन/तिरुवनंतपुरम, 16 सितंबर (आईएएनएस)। केरल विधानसभा के स्पीकर तिरुवंचूर राधाकृष्णन ने बुधवार को केप टाउन में आयोजित 69वें कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री कॉन्फ्रेंस में राज्य की संसदीय इनोवेशन और समावेशी शासन की पहलों को पेश किया। उन्होंने कहा कि केरल की विधानसभा दुनिया भर के लोकतांत्रिक संस्थानों के लिए एक मॉडल के रूप में उभरी है।

कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, आठ बार विधायक रहे तिरुवंचूर राधाकृष्णन ने केरल विधानसभा द्वारा कानून बनाने, संसदीय प्रक्रियाओं और लोकतांत्रिक शासन में शुरू किए गए कई नए और अहम कदमों का जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि राज्य की 'सब्जेक्ट कमिटी सिस्टम' (विषय समिति प्रणाली), जो कानूनों और प्रशासनिक मामलों की बारीकी से जांच करने में मदद करती है, भारत में अपनी तरह की पहली प्रणाली थी और इसने विधायी निगरानी को मजबूत किया है।

76 वर्षीय स्पीकर ने कहा कि केरल नागरिकों और विधायी संस्थाओं के बीच जुड़ाव को और गहरा करने के लिए भी काम कर रहा है। इन कोशिशों के तहत एक ऐसी व्यवस्था शुरू करने के कदम उठाए गए हैं, जिससे आम लोग सीधे विधानसभा में सवाल पूछ सकें, जिससे नागरिकों का विधायी प्रक्रिया से सीधा जुड़ाव हो सके।

सबको साथ लेकर चलने (समावेशिता) के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि केरल ने दिव्यांग लोगों के लिए अधिकारों पर आधारित दृष्टिकोण अपनाया है। इसका मकसद सिर्फ बुनियादी ढांचागत मदद देना नहीं, बल्कि उन्हें सशक्त बनाना, समानता और सम्मान दिलाना है।

उन्होंने बताया कि राज्य ने 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' के तहत एक व्यापक कानूनी ढांचा लागू किया है और शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी नीतियां बनाई हैं। उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण केवल बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने से कहीं आगे जाता है।

स्पीकर ने कहा कि केरल की कोशिशें लोकतांत्रिक संस्थाओं को ज्यादा समावेशी, प्रतिनिधिमूलक और लोगों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील बनाने पर केंद्रित हैं। उन्होंने विधायी निकायों की पहुंच और कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में तकनीक की बढ़ती भूमिका पर भी जोर दिया।

केप टाउन में कॉमनवेल्थ संसदीय सम्मेलन में चर्चा का मुख्य विषय संसदीय संस्थाओं का कामकाज और लोकतांत्रिक प्रणालियों को मजबूत करने के तरीके थे।

राधाकृष्णन की प्रस्तुति ने कॉमनवेल्थ देशों के सांसदों और विधायकों के सामने केरल की विधायी कार्यप्रणाली को पेश किया।

--आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी