जम्मू-कश्मीर: हाई कोर्ट के यथास्थिति आदेश के बावजूद कश्मीरी पंडित महिला ने जमीन पर अतिक्रमण का लगाया आरोप
श्रीनगर, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के यथास्थिति आदेश के बावजूद एक कश्मीरी पंडित प्रवासी महिला ने गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर जिले में अपनी संपत्ति पर अतिक्रमण का आरोप लगाया।
शंभू नाथ जलाली की बेटी और श्रीनगर के हब्बा कदल की निवासी शकुंतला जलाली ने श्रीनगर के बाहरी इलाके सौरा क्षेत्र के उमरहीर में अपनी संपत्ति पर अतिक्रमण का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि अदालत के सुरक्षा निर्देशों के बावजूद जमीन के एक बड़े हिस्से को कंक्रीट ब्लॉक और धातु की बाड़ से घेर दिया गया है।
वर्तमान में जम्मू के मुट्ठी प्रवासी शिविर में रह रही शकुंतला जलाली ने बताया कि उनकी संपत्ति लगभग 165 कनाल जमीन है, जिसमें 51 कनाल खुली जमीन शामिल है। उन्होंने श्रीनगर जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है और संपत्ति पर अतिक्रमण करने वालों और किसी भी लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
उन्होंने बताया कि यह विवाद जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय में रिट याचिका (सिविल) संख्या 1373, वर्ष 2023, जिसका शीर्षक शकुंतला भान बनाम केंद्र शासित प्रदेश जम्मू एवं कश्मीर और अन्य है, के अंतर्गत लंबित है।
उन्होंने आगे कहा, “7 फरवरी, 2024 के एक आदेश में श्रीनगर के उपायुक्त अक्षय लबरू और श्रीनगर नगर निगम आयुक्त बशारत कयूम को संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया गया है।”
इससे पहले, 7 जून, 2023 को श्रीनगर के उपायुक्त कार्यालय द्वारा जारी एक आदेश में तहसीलदार ईदगाह को जम्मू-कश्मीर प्रवासी अचल संपत्ति (संरक्षण, सुरक्षा एवं संकट विक्रय पर रोक) अधिनियम, 1997 के तहत संपत्ति को अपने कब्जे में लेने का निर्देश दिया गया था।
संपत्ति को विचाराधीन घोषित करते हुए और जिला मजिस्ट्रेट की हिरासत में बताते हुए स्थल पर सुरक्षात्मक बोर्ड भी लगाए गए हैं। इन उपायों के बावजूद जलाली ने आरोप लगाया कि भूमि के एक बड़े हिस्से को कंक्रीट ब्लॉक और धातु की चादरों से घेर दिया गया है।
उन्होंने संबंधित पटवारी द्वारा भूमि पर अधिकार का दावा करने वाले व्यक्तियों के पक्ष में जारी किए गए भूमि-राजस्व विवरण (जिसे इंतखाब के नाम से जाना जाता है) पर भी सवाल उठाए हैं। संबंधित वार्ड अधिकारी ने कहा कि कंक्रीट ब्लॉक लगाने वाले व्यक्ति ने पटवारी द्वारा जारी किया गया भूमि-राजस्व विवरण प्रस्तुत किया था।
जलाली ने श्रीनगर जिला प्रशासन से मामले की जांच करने, संपत्ति के संबंध में राजस्व कर कैसे जारी किया गया, यह पता लगाने और अतिक्रमणकारियों और दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की अपील की है।
जम्मू-कश्मीर प्रवासी अचल संपत्ति (संरक्षण, सुरक्षा और संकट बिक्री पर रोक) अधिनियम, 1997, 1 नवंबर, 1989 के बाद कश्मीर घाटी से पलायन करने वाले विस्थापित व्यक्तियों और कश्मीरी पंडितों द्वारा छोड़ी गई भूमि और घरों की रक्षा करता है।
जिला मजिस्ट्रेट अतिक्रमण या संकट बिक्री को रोकने के लिए प्रवासी अचल संपत्तियों की कानूनी अभिरक्षा और भौतिक सुरक्षा का जिम्मा लेता है। सक्षम प्राधिकारी (मंडल आयुक्त) की स्पष्ट, पूर्व लिखित अनुमति के बिना प्रवासी संपत्ति की कोई भी बिक्री, उपहार, विनिमय या गिरवी रखना अमान्य है। ऐसे किसी भी दस्तावेज का पंजीकरण नहीं किया जा सकता।
जिला मजिस्ट्रेटों को अनाधिकृत कब्जेदारों को बेदखल करने और संपत्ति का कब्जा वापस दिलाने का अधिकार है। कब्जाधारियों पर बाजार मूल्य के कम से कम दोगुने के बराबर मुआवजा या किराया भी लगाया जा सकता है।
ऐसी संपत्ति वैध प्रवासी स्वामी के अलावा किसी और को नहीं सौंपी जा सकती, और संपत्ति का भौतिक कब्जा केवल प्रवासी की स्पष्ट लिखित सहमति से ही वापस दिया जा सकता है।
--आईएएनएस
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