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जम्मू-कश्मीर: नशे की लत के खिलाफ लड़ाई तेज करेगा केडब्ल्यूओ, महिलाएं करेंगी अगुवाई

 

श्रीनगर, 12 जुलाई (आईएएनएस)। नशा मुक्त भारत अभियान के तहत कश्मीर का एडवोकेसी ग्रुप नशीली दवाओं की लत के खिलाफ लड़ाई तेज करेगा। महिलाएं इस जागरूकता अभियान की अगुवाई करेंगी।

कश्मीर महिला संगठन (केडब्ल्यूओ) की ओर से कहा गया कि वह नशा मुक्त भारत अभियान के तहत जागरूकता, रोकथाम और पुनर्वास के प्रयासों में महिलाओं को सबसे आगे रखकर नशीली दवाओं की लत के खिलाफ अभियान को तेज करेगा।

शनिवार को आईएएनएस से ​​बात करते हुए केडब्ल्यूओ की चेयरपर्सन दरख्शां हसन भट ने कहा कि केडब्ल्यूओ जागरूकता कार्यक्रमों का विस्तार करेगा। परिवार सहायता प्रणालियों को मजबूत करेगा। विशेषज्ञों के माध्यम से काउंसलिंग और पुनर्वास की सुविधा देगा और नशीले पदार्थों के सेवन से जूझ रही महिलाओं को बिना किसी डर या सामाजिक कलंक के इलाज कराने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

उन्होंने कहा, "जेंडर इक्विटी फेलोशिप कार्यक्रम के दौरान उपराज्यपाल ने हमसे पूछा कि हम 'नशा मुक्त भारत' अभियान के तहत क्या कर रहे हैं। हमने पहले ही जागरूकता अभियान और सामुदायिक संपर्क कार्यक्रम आयोजित किए हैं, लेकिन अब अपनी कोशिशों को तेज करने का समय आ गया है।"

नशीले पदार्थों के सेवन के व्यापक सामाजिक प्रभाव पर जोर देते हुए भट ने कहा कि नशे की लत से अक्सर महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं या तो सीधे तौर पर या फिर नशे की लत से जूझ रहे लोगों की मां, बेटी, पत्नी और बहन के रूप में। उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों की समस्या का सामना करने में सक्षम मजबूत परिवारों और समुदायों के निर्माण के लिए महिलाओं को सशक्त बनाना बहुत जरूरी है।

उन्होंने कहा कि महिलाओं में सामाजिक बदलाव लाने की ताकत है और उन्हें नशे की लत के खिलाफ लड़ाई में अहम भूमिका निभानी चाहिए।

सरकार की 100 दिन की 'नशा मुक्त अभियान' पहल का जिक्र करते हुए दरख्शां हसन भट ने कहा कि इसमें हजारों महिलाओं ने हिस्सा लिया था और केडब्ल्यूओ अब आने वाले महीनों में अपने योगदान को और मजबूत करने के लिए एक व्यापक कार्य योजना तैयार कर रहा है।

संगठन की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए भट ने कहा, "केडब्ल्यूओ ने सीधे तौर पर 20,000 से अधिक महिलाओं को जोड़ा है और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से 80 लाख से अधिक लोगों तक पहुंच बनाई है। महिला नेताओं का एक मजबूत नेटवर्क बनाना संगठन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है।"

उन्होंने कहा कि केडब्ल्यूओ 'जेंडर इक्विटी फेलोशिप' जैसी पहलों के माध्यम से महिलाओं के नेतृत्व को बढ़ावा देता है, जो प्रतिभागियों को नेतृत्व, संचार, संवैधानिक जागरूकता, सार्वजनिक नीति, डिजिटल साक्षरता और सामुदायिक जुड़ाव में कौशल से लैस करती हैं।

घरेलू हिंसा, सीमित अवसर और सामाजिक बाधाओं जैसी चुनौतियों को स्वीकार करते हुए दरख्शां हसन भट ने कहा कि संगठन जागरूकता अभियानों, मेंटरशिप, नेतृत्व प्रशिक्षण और जमीनी स्तर पर संपर्क के माध्यम से इन मुद्दों को हल करने का काम, खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में जारी रखे हुए है।

केडब्ल्यूओ के भविष्य के रोडमैप के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि संगठन का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में जमीनी स्तर पर अपनी मौजूदगी बढ़ाना, महिलाओं के उद्यमिता को बढ़ावा देना, डिजिटल साक्षरता को बेहतर बनाना और फ़ैसले लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है, साथ ही नशीली दवाओं की लत के ख़िलाफ लड़ाई को अपनी मुख्य प्राथमिकताओं में से एक बनाना है।

—आईएएनएस

एसडी/वीसी