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दशहरा में 'कंबाला' पर विवाद, शाही परिवार ने जताया विरोध

 

बेंगलुरु, 11 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक सरकार के प्रसिद्ध मैसूर दशहरा समारोह के दौरान पारंपरिक तटीय खेल 'कंबाला' आयोजित करने के प्रस्ताव को लेकर विवाद शुरू हो गया है। इस मुद्दे पर राज्य सरकार और मैसूर के शाही परिवार के बीच मतभेद सामने आया है।

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने संकेत दिया है कि सरकार दशहरा समारोह के दौरान कुछ नए सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल करने पर विचार कर रही है, लेकिन मैसूर के शाही परिवार, भाजपा नेताओं और कई सामाजिक संगठनों ने इसका विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे मैसूर दशहरा की पारंपरिक पहचान और विरासत प्रभावित होगी।

राज्य सरकार ने घोषणा की है कि सूखे जैसे हालात के बावजूद इस वर्ष 'नादा हब्बा दशहरा-2026' का आयोजन 11 दिनों तक भव्य तरीके से किया जाएगा। इस समारोह में तटीय कर्नाटक के पारंपरिक भैंस दौड़ खेल 'कंबाला' को शामिल करने के प्रस्ताव का विरोध शुरू हो गया है। 'कांतारा चैप्टर-1' फिल्म की सफलता के बाद यह पारंपरिक खेल पूरे देश में काफी लोकप्रिय हुआ है।

शनिवार को इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए मैसूर के शाही परिवार के सदस्य और भाजपा सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार ने कहा कि उन्होंने उच्चस्तरीय समिति की बैठक के दौरान इस प्रस्ताव का साफ तौर पर विरोध किया था।

यदुवीर ने कहा, "मैंने बैठक में कंबाला को शामिल करने के प्रस्ताव का साफ तौर पर विरोध किया है। दशहरा की अपनी अलग सांस्कृतिक पहचान है, जबकि कंबाला एक अलग परंपरा है। मैसूर के लोगों की भावनाएं भी यही कहती हैं। दशहरा के दौरान कंबाला का आयोजन उनकी इच्छा के खिलाफ होगा।"

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने बार-बार जनता की भावनाओं को नजरअंदाज किया है।

उन्होंने कहा, "सरकार ने कई बार लोगों की भावनाओं के खिलाफ फैसले लिए हैं। हम कंबाला खेल के विरोध में नहीं हैं। हमारा सिर्फ इतना कहना है कि कंबाला का आयोजन मैसूर दशहरा समारोह के हिस्से के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।"

कांग्रेस विधायक अशोक राय के इस प्रस्ताव का समर्थन करने की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए यदुवीर ने कहा कि इस मुद्दे पर विधायक ने न तो उनसे कोई चर्चा की थी और न ही उन्हें किसी तरह का स्पष्टीकरण देने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, "उन्हें मुझे कोई सफाई देने की जरूरत नहीं है। बेहतर होगा कि वे मौजूदा दशहरा कार्यक्रमों के बेहतर आयोजन पर ध्यान दें। दशहरा को उसकी पारंपरिक पहचान के साथ मनाया जाए और उसकी परंपराओं को बरकरार रखा जाए।"

यदुवीर ने सरकार से दशहरा कार्यक्रमों के लिए 'पास सिस्टम' खत्म करने की भी अपील की। ​​उन्होंने कहा कि इससे त्योहार के असली आयोजन से ध्यान भटकता है।

उन्होंने कहा, "मैंने सरकार से 'पास' व्यवस्था पूरी तरह खत्म करने का अनुरोध किया है। लोग समारोह का आनंद लेने से ज्यादा पास हासिल करने में लग जाते हैं। दशहरा को सिर्फ भव्य नहीं, बल्कि उसकी परंपराओं और उद्देश्य के अनुरूप मनाया जाना चाहिए। साथ ही, किसानों और आम लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।"

भाजपा के पूर्व सांसद प्रताप सिम्हा ने कहा कि सरकार को मैसूर के शाही परिवार की भावनाओं के खिलाफ नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दशहरा एक पारंपरिक और सांस्कृतिक पर्व है, इसलिए इसकी परंपराओं और रीति-रिवाजों का सम्मान किया जाना चाहिए।

इस साल दशहरा समारोह में प्रस्तावित बदलावों को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि सरकार अंतिम फैसला लेने से पहले सभी सुझावों पर विचार कर रही है।

उन्होंने कहा, "हम राज्य की सभी परंपराओं और रीति-रिवाजों को ध्यान में रखकर फैसला करेंगे। हमें कई सुझाव मिले हैं और अंतिम निर्णय लेने से पहले उनके सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर के गायकों के कार्यक्रम आयोजित करने, खेल प्रतियोगिताएं कराने और हिंदू परंपराओं के अनुसार उत्सव मनाने जैसे सुझाव भी मिले हैं। यह फैसला अकेले डीके शिवकुमार नहीं लेंगे। सभी संबंधित लोगों से चर्चा के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।"

--आईएएनएस

एसएचके/डीकेपी