कर्नाटक: डिप्टी सीएम परमेश्वर ने सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की, चुनाव आयोग के कामकाज की जांच की मांग
बेंगलुरु, 24 सितंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर ने गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की। साथ ही उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के कामकाज को लेकर हाल में सामने आए आरोपों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।
एक बयान में परमेश्वर ने कहा कि दो चुनाव आयुक्तों की ओर से कथित तौर पर दर्ज कराई गई आपत्तियों को लेकर हाल में हुए खुलासों ने तीन सदस्यीय संवैधानिक संस्था के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने के दौरान कम से कम 14 बार उन फैसलों और सूचनाओं पर औपचारिक रूप से आपत्ति दर्ज कराई, जिनके बारे में उनका कहना था कि उन्हें उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना जारी किया गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, ये आपत्तियां मतदाता रजिस्ट्रेशन, मतदाता सूची से नाम हटाने और दोबारा जोड़ने, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता सूची के डेटाबेस तक पहुंच जैसे मुद्दों से जुड़ी थीं।
परमेश्वर ने सवाल किया कि क्या तीन चुनाव आयुक्तों वाला निर्वाचन आयोग प्रभावी रूप से अब एक ही व्यक्ति के अधिकार तक सीमित हो गया है।
उन्होंने सवाल किया, "क्या तीन सदस्यीय संवैधानिक संस्था अब केवल एक व्यक्ति, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की इच्छा के अनुसार चल रही है?"
उन्होंने कहा कि कथित आपत्तियां केवल रोजमर्रा के प्रशासनिक मामलों से संबंधित नहीं थीं, बल्कि मतदाता सूची के प्रबंधन और मतदाता रजिस्ट्रेशन तथा पुनरीक्षण के लिए इस्तेमाल की जाने वाली व्यवस्थाओं से जुड़ी थीं।
उपमुख्यमंत्री ने खास तौर पर नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले वैधानिक फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को लेकर कथित आपत्तियों का जिक्र किया।
रिपोर्ट किए गए आंतरिक रिकॉर्ड के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने चिंता जताई थी कि निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 में संशोधन किए बिना ये बदलाव नहीं किए जा सकते। बाद में एक आपत्ति में इस बदलाव को 'अनधिकृत और अवैध' बताया गया था।
परमेश्वर ने यह भी आरोप लगाया कि मतदाता सूची के डेटाबेस का नियंत्रण केंद्रीकृत करने और राज्य स्तर के वैधानिक अधिकारियों को दरकिनार किए जाने को लेकर भी चिंताएं हैं।
उन्होंने कहा कि इन घटनाक्रमों ने कांग्रेस नेताओं की ओर से पहले उठाई गई चिंताओं को और बल दिया है। इनमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की ओर से मतदाता सूची, मतदान प्रतिशत के आंकड़ों और विभिन्न राज्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर उठाए गए मुद्दे भी शामिल हैं।
जारी एसएआर प्रक्रिया का जिक्र करते हुए परमेश्वर ने कहा कि कर्नाटक में इस प्रक्रिया ने मतदाता सूची की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं।
उन्होंने कर्नाटक की ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 1.08 करोड़ मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थानांतरित, डुप्लीकेट, मृत और अन्य श्रेणियों में चिह्नित किए जाने का जिक्र किया। इनमें अकेले बेंगलुरु के 46.88 लाख मतदाता शामिल हैं।
उन्होंने करीब 43.8 लाख मतदाताओं का भी जिक्र किया, जिन्हें 'लॉजिकल विसंगतियों' या मैपिंग नहीं होने के कारण नोटिस का सामना करना पड़ा।
ये आंकड़े चुनाव आयोग की ओर से कर्नाटक में एसआईआ प्रक्रिया के दौरान बताए गए थे।
परमेश्वर ने कहा, "मुख्य चुनाव आयुक्त समान लोगों में प्रथम हैं, वह आयोग से ऊपर नहीं हैं।" उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले फैसले सामूहिक रूप से निर्णय लेने के सिद्धांत के अनुसार किए जाने चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि अगर अन्य दोनों चुनाव आयुक्तों को दरकिनार करके फैसले लिए गए हैं, तो यह इस संवैधानिक संस्था के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़ा करता है और इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
परमेश्वर ने कहा कि इन घटनाक्रमों से चुनाव आयोग पर जनता का भरोसा प्रभावित हुआ है और चुनावी प्रक्रिया में विश्वास बहाल करने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा, "इन गंभीर खुलासों के बीच सीईसी ज्ञानेश कुमार ने जिस तरह से काम किया है, मैं उसकी कड़ी निंदा करता हूं।"
उन्होंने मांग की कि आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होने तक ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटा दिया जाए।
परमेश्वर ने कहा, "भारत के चुनाव और हमारे लोकतंत्र में प्रत्येक मतदाता का विश्वास इससे कम की मांग नहीं करता।"
चुनाव आयोग के अधिकारियों ने आयोग के भीतर मतभेद की खबरों को खारिज किया है। अधिकारियों का कहना है कि एसआईआर से जुड़े फैसलों सहित आयोग के सभी निर्णयों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी मिली थी।
चुनाव आयोग की ओर से यह स्पष्टीकरण चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा कथित तौर पर 14 आपत्तियां दर्ज कराए जाने की रिपोर्ट सामने आने के बाद आया है।
--आईएएनएस
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