सिद्धारमैया दिखाएंगे अपनी ताकत, 26 नवंबर को मैसूरु में अहिंदा का बड़ा सम्मेलन कराने की तैयारी
बेंगलुरु, 4 नवंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक में कांग्रेस के भीतर जारी राजनीतिक खींचतान के बीच पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के समर्थक अहिंदा नेताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश में जुटे हैं। इसके तहत सिद्धारमैया के गृह जिले मैसूरु में 26 नवंबर को बड़े सम्मेलन का आयोजन करने की तैयारी है। इस सम्मेलन के जरिए एकजुटता दिखाने और अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन करने की योजना है।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि शिवकुमार के मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद उन्होंने सिद्धारमैया और उनके करीबी नेताओं को राजनीतिक रूप से किनारे कर दिया है। साथ ही कांग्रेस संगठन पर अपना नियंत्रण मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, कथित स्टिंग ऑपरेशन मामले से जुड़े घटनाक्रम के बाद सिद्धारमैया अब फिर से अपनी राजनीतिक ताकत स्थापित करने की तैयारी में हैं। मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद वह काफी हद तक चुप रहे थे। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने दिल्ली में राहुल गांधी के साथ एकांत बैठक के दौरान स्टिंग ऑपरेशन मामले से निपटने के सरकार के तरीके पर असंतोष भी जताया है।
प्रस्तावित सम्मेलन को हाल ही में हुए विधान परिषद चुनावों में कांग्रेस की चारों सीटों पर हार के बाद अहिंदा (अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित) समुदाय के बीच अपनी पकड़ और एकजुटता मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। इस पहल का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है, क्योंकि पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक के.एन. राजन्ना ने पार्टी की चुनावी हार के लिए सिद्धारमैया से जुड़े कथित स्टिंग ऑपरेशन विवाद को जिम्मेदार ठहराया है।
सिद्धारमैया अहिंदा नेताओं को एकजुट कर उस सामाजिक और राजनीतिक गठबंधन को मजबूत करना चाहते हैं, जो कर्नाटक में कांग्रेस का प्रमुख समर्थन आधार रहा है। इसी सिलसिले में राजन्ना प्रमुख अहिंदा नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं और उनके बीच मतभेद दूर करने की कोशिश में जुटे हैं। इस पहल पर राजन्ना ने कहा कि वह अहिंदा नेताओं को एकजुट करने और उनके बीच पैदा हुई गलतफहमियों को दूर करने का प्रयास करेंगे।
उन्होंने कहा, "कुछ लोगों ने सिद्धारमैया और दलित समुदाय के वरिष्ठ नेता एच.सी. महादेवप्पा के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश की है। उन्होंने मैसूरु में सिद्धारमैया के खिलाफ नारे लगवाए और उनके खिलाफ लेख भी लिखवाए। वे सिद्धारमैया को अलग-अलग बातें बताते हैं। हम इन सभी मुद्दों को ठीक करेंगे। मुझे विश्वास है कि सब कुछ ठीक हो जाएगा। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए।"
राजन्ना सिद्धारमैया, एच.सी. महादेवप्पा और मंत्री सतीश जारकीहोली सहित प्रमुख अहिंदा नेताओं के बीच मतभेद दूर करने की भी कोशिश कर रहे हैं। सत्तारूढ़ दल के भीतर बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच इन नेताओं के रिश्तों में तनाव आने की खबरें हैं। राजन्ना का कहना है कि कुछ बिचौलिये वरिष्ठ नेताओं के बीच गलतफहमियां पैदा कर रहे हैं। उनके मुताबिक, आपसी बातचीत और सामूहिक प्रयासों से इन मतभेदों को दूर किया जा सकता है।
मैसूरु में प्रस्तावित सम्मेलन से अहिंदा नेताओं को एकजुटता दिखाने और कांग्रेस के भीतर जारी सत्ता संघर्ष तथा गुटबाजी के बीच राजनीतिक संदेश देने का मंच मिलने की उम्मीद है। कर्नाटक में कांग्रेस की चुनावी संभावनाओं के लिहाज से अहिंदा वोट बैंक को एकजुट रखना बेहद अहम माना जाता है। सिद्धारमैया खेमे की कोशिश है कि प्रभावशाली नेताओं के बीच मतभेदों का असर पार्टी के पारंपरिक समर्थन आधार पर न पड़े। खासकर 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले इस सामाजिक गठबंधन को मजबूत बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।
ऐसे में 26 नवंबर को होने वाला यह सम्मेलन राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर तब, जब विधान परिषद चुनावों में कांग्रेस की करारी हार के बाद पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं।
--आईएएनएस
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