कर्नाटक भाजपा ने विशेष विधानसभा सत्र को एक सप्ताह तक बढ़ाने की मांग की, सूखे पर चर्चा की अपील
बेंगलुरु, 21 सितंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और विधायक बीवाई विजयेंद्र ने सोमवार को राज्य सरकार से प्रस्तावित तीन दिवसीय विशेष विधानसभा सत्र को कम से कम एक सप्ताह तक बढ़ाने की मांग की। उन्होंने यह तर्क देते हुए कहा कि कस्तूरीरंगन रिपोर्ट, सूखे की स्थिति, पश्चिमी घाटों का संरक्षण और किसानों की चिंताओं जैसे प्रमुख मुद्दों पर अधिक व्यापक चर्चा की आवश्यकता है।
विपक्ष के नेता आर. अशोक के साथ पत्रकारों को संबोधित करते हुए विजयेंद्र ने कहा कि पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील पश्चिमी घाटों की रक्षा करना आवश्यक है। साथ ही वन-सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले किसानों के हितों और आजीविका की रक्षा करना भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि भाजपा और उसकी सहयोगी जेडी (एस) इस सत्र के दौरान किसानों के मुद्दों और जनहित के अन्य मामलों को संयुक्त रूप से उठाएंगे।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विजयेंद्र ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने भाजपा के आंदोलन के दबाव के आगे घुटने टेक दिए हैं और कहा कि लगातार विपक्षी विरोध प्रदर्शनों के बाद ही विशेष सत्र बुलाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भाजपा के चल रहे लामबंदी प्रयासों से विचलित नजर आ रहे हैं, जिनमें हाल ही में संपन्न हुई बेल्लारी चलो पदयात्रा भी शामिल है।
विजयेंद्र ने तर्क दिया कि गंभीर सूखे की स्थिति, कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के निहितार्थ और राज्य को प्रभावित करने वाले अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए तीन दिवसीय सत्र अपर्याप्त होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा और जेडी (एस) के विधायकों ने गहन चर्चा के लिए लगातार एक सप्ताह के सत्र की मांग की है।
मुख्यमंत्री की हालिया टिप्पणियों का जिक्र करते हुए विजयेंद्र ने कहा कि विधानसभा को पिछले साढ़े तीन वर्षों में कांग्रेस सरकार के प्रदर्शन पर भी बहस करनी चाहिए और यह जांच करनी चाहिए कि क्या उसने लोगों की चिंताओं को प्रभावी ढंग से संबोधित किया है।
इस बीच, आर. अशोक ने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाया कि बैठक को विशेष सत्र कहा गया है और आरोप लगाया कि एजेंडा को जानबूझकर कस्तूरीरंगन रिपोर्ट और सूखे के मुद्दों तक सीमित रखा गया है ताकि एनआईएसई और बिदादी टाउनशिप परियोजना विवाद और केपीएससी घोटाले जैसे विवादों पर चर्चा से बचा जा सके।
उन्होंने तर्क दिया कि जिस तरीके से सत्र बुलाया गया था, वह स्थापित विधायी मानदंडों के अनुरूप नहीं था। भाजपा पहले ही कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर नोटिस जमा कर चुकी है और विधानसभा में इस मुद्दे को मजबूती से उठाएगी।
--आईएएनएस
एसएके/वीसी