कांग्रेस के भीतर बगावत के कारण मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की कुर्सी खतरे में है: विजयेंद्र
बेंगलुरु, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष और विधायक बीवाई विजयेंद्र ने मंगलवार को आरोप लगाया कि सत्ताधारी कांग्रेस के भीतर बगावत के कारण मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की कुर्सी खतरे में है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हताशा में आकर शिवकुमार बार-बार केंद्र पर दोष मढ़ रहे हैं।
गन्ने के किसानों के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की राज्य सरकार की कोशिशों में भाजपा सहयोग नहीं कर रही है। शिवकुमार के इस बयान पर विजयेंद्र ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष के कारण मुख्यमंत्री की कुर्सी डगमगा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि आप स्टिंग ऑपरेशन से जुड़ी घटनाओं को देख ही रहे हैं। कांग्रेस नेता सीएम शिवकुमार के खिलाफ बगावत कर रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में वे हताशा में बार-बार केंद्र के खिलाफ शिकायतें कर रहे हैं। दिल्ली जाने वाले सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने के प्रस्ताव पर भाजपा कोई भी फैसला लेने से पहले विपक्ष के नेताओं और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ चर्चा करेगी।
उन्होंने कहा कि हम विपक्ष के नेताओं और वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकर चर्चा करेंगे कि गन्ने के किसानों के मुद्दे पर दिल्ली जाने वाले सत्ताधारी दल के प्रतिनिधिमंडल में शामिल होना है या नहीं।
भाजपा का रुख स्पष्ट करते हुए विजयेंद्र ने कहा कि सरकार के कार्यकाल के बचे हुए डेढ़ साल तक पार्टी विपक्ष में ही रहेगी, और कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने का उसका कोई इरादा नहीं है।
उन्होंने दावा किया कि जनता के जनादेश के अनुसार भाजपा विपक्ष में है। हम अगले डेढ़ साल तक विपक्ष में ही रहेंगे। हमें कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने या गिराने की कोई जरूरत नहीं है। सत्ताधारी दल के वरिष्ठ नेता ही सीएम शिवकुमार के खिलाफ बगावत करने की तैयारी कर रहे हैं। मैं जो कह रहा हूं, वह सच है।
किसानों की दुर्दशा पर चिंता जताते हुए विजयेंद्र ने कहा कि पूरे कर्नाटक और देश भर में किसान समुदाय भारी संकट का सामना कर रहा है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि वे किसानों की मदद करें। जब से कर्नाटक में कांग्रेस सत्ता में आई है, किसान गहरी मुसीबत में हैं। राज्य की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है और लोग कांग्रेस सरकार से तंग आ चुके हैं।
बेंगलुरु और उसके आसपास की सड़कों की हालत की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार के प्रति लोगों की नाराजगी बढ़ रही है। उन्होंने राज्य सरकार पर विकास कार्यों, सूखे के प्रबंधन और कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने में विफल रहने का भी आरोप लगाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि साढ़े तीन साल बीत जाने के बाद भी विकास की गति नहीं पकड़ी है। आज, दिव्यांग लोग अपनी पेंशन की मांग को लेकर सड़कों पर हैं। सरकार अपनी प्राथमिकताओं को भूल गई है और कुछ भी सोचने या करने में असमर्थ है।
विजयेंद्र ने राज्य सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि वह लोगों की समस्याओं को हल करने के बजाय केवल केंद्र सरकार को पत्र लिखती है, उन पर दोष मढ़ती है और फिर खुद कोई कदम नहीं उठाती।
उन्होंने परिसीमन का मुद्दा उठाने के लिए कांग्रेस सरकार की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि जब केंद्र सरकार इस मामले की जांच कर रही है, तब कांग्रेस लोगों के बीच बेवजह भ्रम पैदा कर रही है।
सूखा प्रबंधन पर उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार प्रभावित लोगों को पर्याप्त राहत देने में विफल रही है।
गन्ना किसानों के आंदोलन का जिक्र करते हुए विजयेंद्र ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने गन्ना किसानों और चीनी उद्योग की मदद के लिए कई कदम उठाए हैं।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागू किया, इथेनॉल उत्पादन के अवसर पैदा किए और चीनी उद्योग में 'वैल्यू एडिशन' (मूल्यवर्धन) को बढ़ावा देने वाली नीतियां बनाईं। उन्होंने इस क्षेत्र को दी गई वित्तीय सहायता का भी जिक्र किया और दावा किया कि ये सभी कदम एनडीए सरकार द्वारा उठाए गए हैं।
विजयेंद्र ने कहा कि गन्ना किसानों का मौजूदा आंदोलन मुख्य रूप से चीनी मिलों में उनकी उपज तौलने में कथित गड़बड़ी और 'शुगर रिकवरी रेट' (चीनी प्राप्ति दर) के आकलन में हुए अन्याय को लेकर है।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ बैठक की है और इस मामले की जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि इस समिति की टीम कर्नाटक का दौरा कर रही है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार संभावित समाधानों पर विचार कर रही है, क्योंकि यह मुद्दा केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं है। इसमें पूरे देश के किसानों के हितों और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थितियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
--आईएएनएस
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