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कर्नाटक भाजपा नेता का आरोप, मंत्री के करीबी ने केंद्र सरकार की जमीन पर किया कब्जा

 

बेंगलुरु, 7 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) के पूर्व पार्षद एनआर रमेश ने मंगलवार को आरोप लगाया कि कर्नाटक के बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा के करीबी सहयोगी और पूर्व बीबीएमपी पार्षद केएम चेतन ने केंद्र सरकार की 32 गुंटा जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है। यह जमीन केंद्रीय विद्युत मंत्रालय की है।

रमेश ने इस कथित भूमि अतिक्रमण मामले की सीआईडी जांच कराने की मांग की और आरोप लगाया कि अदालत के आदेशों तथा केंद्र सरकार के अधिकारियों की बार-बार की गई शिकायतों के बावजूद राज्य सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की।

बेंगलुरु में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रमेश ने कहा कि चेयरमैन क्लब के वर्तमान अध्यक्ष और कोडिगेहल्ली वार्ड (2015-2020) के पूर्व पार्षद केएम चेतन तथा उनके पिता और क्लब के पूर्व अध्यक्ष एन मंजूनाथ इस कथित कब्जे के लिए जिम्मेदार हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि पिता-पुत्र ने क्लब के अध्यक्ष रहते हुए 100 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की इस जमीन पर कब्जा किया।

भाजपा नेता ने बताया कि केएम चेतन, एन मंजूनाथ और कुछ बीबीएमपी अधिकारियों के खिलाफ कर्नाटक लोकायुक्त में सरकारी जमीन पर कब्जा, जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोपों को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई है।

उन्होंने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मांग की कि कथित केंद्र सरकार भूमि अतिक्रमण घोटाले की व्यापक जांच सीआईडी को सौंपी जाए।

रमेश के अनुसार, यह विवादित जमीन बेंगलुरु उत्तर तालुक के येलहंका होबली स्थित कोडिगेहल्ली गांव के सर्वे नंबर 17/1 में है, जो मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा के विधानसभा क्षेत्र बयातारायणपुरा के अंतर्गत आती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री के सहयोगियों और समर्थकों ने पिछले करीब 18 वर्षों से इस बहुमूल्य सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है, जबकि इस संबंध में जांच एजेंसियों और अदालतों में कई शिकायतें की जा चुकी हैं।

रमेश ने कहा कि चेयरमैन क्लब, जिसे चेयरमैन्स रिजॉर्ट्स के नाम से भी जाना जाता है, सर्वे नंबर 14/1 में 1.11 एकड़ भूमि का मालिक है।

हालांकि, उनका आरोप है कि क्लब ने अपनी सीमा दीवार बढ़ाकर विद्युत मंत्रालय की 32 गुंटा अतिरिक्त जमीन को भी घेर लिया है, जिससे उसके कब्जे वाली कुल जमीन लगभग 2.1 एकड़ हो गई है।

उन्होंने बताया कि विवादित जमीन विद्युत मंत्रालय की 3.04 एकड़ भूमि का हिस्सा है, जहां साउदर्न रीजनल पावर कमेटी (एसआरपीसी) के आवासीय क्वार्टर स्थित हैं।

भाजपा नेता का आरोप है कि खाली पड़ी 32 गुंटा जमीन को चेयरमैन क्लब ने खुले भोजन क्षेत्र (ओपन डाइनिंग एरिया) और पार्किंग स्थल में बदल दिया है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि कई अदालतों द्वारा जमीन का स्वामित्व विद्युत मंत्रालय के पक्ष में तय किए जाने के बावजूद राज्य सरकार ने जमीन को कब्जामुक्त कराने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।

रमेश ने कहा कि केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के सचिव पंकज अग्रवाल ने 22 दिसंबर 2025 को कर्नाटक की मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को पत्र लिखकर अदालत के आदेशों के अनुरूप तत्काल कार्रवाई करने का अनुरोध किया था।

उन्होंने यह भी दावा किया कि 11 मई 2026 को मंत्रालय के अधीक्षण अभियंता ने येलहंका के सहायक भूमि अभिलेख निदेशक को जमीन का जल्द सर्वे कराने के लिए पत्र लिखा था, लेकिन उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

रमेश के अनुसार, विद्युत मंत्रालय के अधिकारियों ने कई बार जमीन वापस लेने का प्रयास किया, लेकिन मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा और केएम चेतन के समर्थकों ने मौके पर पहुंचकर अधिकारियों को धमकाया और उन्हें अपना काम करने से रोका।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस ने केंद्र सरकार के अधिकारियों की कोई मदद नहीं की।

हालांकि, इन आरोपों पर मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा, केएम चेतन या चेयरमैन क्लब की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी