कर्नाटक भाजपा ने बिजली संकट को लेकर राज्य सरकार पर साधा निशाना, बिना घोषणा कटौती का लगाया आरोप
बेंगलुरु, 11 सितंबर (आईएएनएस)। भाजपा के वरिष्ठ नेता और विपक्ष के नेता आर. अशोक ने शुक्रवार को कर्नाटक में जारी बिजली संकट को लेकर कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और ऊर्जा मंत्री के.जे. जॉर्ज पर राज्य को अंधेरे में धकेलने का आरोप लगाया।
सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट किए गए एक बयान में अशोक ने कहा कि 100 दिनों में सरकार की एकमात्र उपलब्धि राज्य को रोशनी से अंधेरे में धकेलना है।
उन्होंने कहा, "डीके शिवकार सरकार की 100 दिनों में एकमात्र उपलब्धि राज्य को रोशनी से अंधेरे में धकेलना है! मुख्यमंत्री और ऊर्जा गारंटियों के जोर-शोर से प्रचार के बीच, आप राज्य की जनता को जो तोहफा दे रहे हैं, वह है 'अंधेरा कर्नाटक'!"
अशोक ने कहा कि सरकार बारिश की कमी का हवाला देकर रोजाना 2 से 3 घंटे की अघोषित बिजली कटौती कर रही है। प्रशासन राज्य को पाषाण युग में वापस ले जा रहा है।
अशोक ने आरोप लगाया कि सरकार ने किसानों के साथ धोखा किया है। ग्रामीण इलाकों में 5-6 घंटे बिजली कटौती हो रही है। बिजली न होने के कारण पंप सेट काम नहीं कर रहे हैं। सरकार बिना किसी दया-भाव के किसानों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं जबकि उनकी खड़ी फसलें उनकी आंखों के सामने सूख रही हैं।
अशोक ने सवाल किया, "क्या आप राज्य में मौजूद बिजली इकाइयों से पूरी बिजली पैदा करने के बजाय, कमीशन के लिए दूसरे राज्यों से महंगी बिजली खरीदने की तैयारी कर रहे हैं?"
अशोक ने एक और आरोप लगाया, "शाम 6:30 बजे से 9:30 बजे तक पीक आवर्स (सबसे ज्यादा बिजली की जरूरत वाले समय) में 30-40 प्रतिशत बिजली कटौती करके आपने गृहिणियों, व्यापारियों और छात्रों को अंधेरे में धकेल दिया है।"
अशोक ने आगे आरोप लगाया कि सरकार ने ऊर्जा विभाग को बर्बाद कर दिया है और योजनाओं के नाम पर सरकारी खजाने को लूटा है।
उन्होंने कहा, "जलाशयों के खाली होने के बहाने बनाना बंद करें और बिजली की कमी को तुरंत दूर करें, वरना अंधेरे में रह रहे इस राज्य के लोग आपकी नाकारा कांग्रेस पार्टी को 'हमेशा के लिए लोड शेडिंग' (बिजली कटौती) का सबक सिखा देंगे।"
ऊर्जा विभाग और कांग्रेस सरकार ने अभी तक इन आरोपों पर कोई जवाब नहीं दिया है।
अशोक ने सार्वजनिक शौचालयों के खराब रखरखाव को लेकर कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की आलोचना की और सरकार के 'ब्रांड बेंगलुरु' अभियान पर सवाल उठाए।
उन्होंने पूछा, "सार्वजनिक शौचालयों के लिए फिनाइल और ब्लीचिंग पाउडर खरीदने के पैसे नहीं हैं! क्या यही आपका 'ब्रांड बेंगलुरु' है?"
उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री शिवकुमार और बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा, साउथ सिटी कॉर्पोरेशन (साउथ जोन) की खराब हालत शायद आपको रील्स की दुनिया से बाहर की सच्चाई दिखाएगी जबकि आप 'ब्रांड बेंगलुरु' बनाने का दावा करते हैं।"
अशोक ने कहा, "हमारे राज्य की राजधानी में टॉयलेट साफ रखने के लिए ब्लीचिंग पाउडर और फिनाइल खरीदने तक के पैसे नहीं हैं! टॉयलेट की देखरेख करने वाले गरीब कर्मचारियों को एक पैसा भी नहीं मिला है। आपने ऐसा सिस्टम बना दिया है कि उन्हें हर दिन अपनी जेब से 500 रुपये खर्च करके लोगों को सेवा देनी पड़ती है।"
कमियों को गिनाते हुए अशोक ने कहा, "अस्पतालों, मेट्रो और बस स्टेशनों के पास टॉयलेट के दरवाजे और कमोड टूटे हुए हैं और साफ-सफाई का तो नामोनिशान नहीं है।"
उन्होंने सवाल किया, "क्या आपकी सरकार, जो हजारों करोड़ रुपये के टेंडर निकालने की योजना बना रही है, उनके पास गरीब मजदूरों को उनकी वाजिब मजदूरी देने के लिए पैसे नहीं हैं।" उन्होंने मांग की कि सरकार सबसे पहले बुनियादी सुविधाएं दे और मजदूरों की बकाया मजदूरी का भुगतान करे।
--आईएएनएस
ओपी/पीएम