मतदाता सूची में बांग्लादेशियों के नाम जोड़ने की साजिश, जिम्मेदार अधिकारियों पर केस दर्ज हो: कर्नाटक भाजपा
बेंगलुरु, 3 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक भाजपा ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि राज्य की कांग्रेस सरकार विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन-एसआईआर) अभियान के जरिए बांग्लादेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने की साजिश कर रही है। पार्टी ने निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार करने की मांग की।
बेंगलुरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने आरोप लगाया कि बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर सत्यापन करने के बजाय सड़कों पर बैठकर गणना फॉर्म (एन्यूमरेशन फॉर्म) बांट रहे हैं। उन्होंने इसे बांग्लादेशी नागरिकों को मतदाता बनाने की साजिश बताया।
अशोक ने कहा, "निर्वाचन आयोग राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चला रहा है और यही केंद्र सरकार की भी मंशा है। लेकिन कांग्रेस सरकार ने कर्नाटक को 'बांग्ला' लोगों के लिए स्वर्ग बना दिया है।"
उन्होंने दावा किया कि कर्नाटक में, विशेषकर बेंगलुरु, मडिकेरी और चिक्कमगलुरु जिलों में, लगभग 20 लाख "बांग्ला" निवासी हैं और उनके नाम वर्ष 2002 की मतदाता सूची में नहीं थे।
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि घर-घर सत्यापन करने के बजाय हज भवनों और मस्जिदों के बाहर खुलेआम मतदाता पंजीकरण अभियान चलाया जा रहा है।
उन्होंने कहा, "बीएलओ का काम हर घर जाकर फॉर्म देना, विवरण का सत्यापन करना और आवेदन एकत्र करना है। लेकिन वे सड़कों पर बैठकर ऐसे फॉर्म बांट रहे हैं जैसे जनता को मुफ्त भोजन वितरित किया जा रहा हो। यह सब वोट बैंक की राजनीति के लिए बांग्लादेशी मूल के लोगों के नाम मतदाता सूची में जोड़ने के उद्देश्य से किया जा रहा है।"
अशोक ने विशेष रूप से महादेवपुरा और ब्यातरायणपुरा क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि वहां मस्जिदों के बाहर समूह बनाकर एसआईआर की प्रक्रिया चलाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि वह इस पूरे मामले की शिकायत केंद्रीय निर्वाचन आयोग और कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से करेंगे।
अशोक ने मांग की, "ऐसी गतिविधियों की अनुमति देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जाएं और उन्हें गिरफ्तार किया जाए।"
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि येलहंका के एक क्षेत्र में वर्ष 2002 की मतदाता सूची का रिकॉर्ड अब तक ऑनलाइन अपलोड नहीं किया गया है और कुछ खास समुदायों को निशाना बनाया जा रहा है।
भाजपा नेता ने कांग्रेस पर एसआईआर को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर पार्टी सार्वजनिक रूप से इस अभियान का विरोध कर रही है, वहीं दूसरी ओर लोगों से सरकारी गारंटी योजनाओं का लाभ लेने के लिए एसआईआर के तहत पंजीकरण कराने को कह रही है। उन्होंने कहा कि एसआईआर केवल भारतीय नागरिकों पर लागू होता है।
अशोक ने राज्य में उभरते सूखे के हालात को लेकर भी कांग्रेस सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि जलाशयों में जलस्तर लगातार घट रहा है, लेकिन मंत्री प्रभावित क्षेत्रों का दौरा तक नहीं कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को पद संभाले एक महीना हो गया है, लेकिन प्रशासन में कोई नया बदलाव दिखाई नहीं दे रहा। "यह पुरानी शराब नई बोतल में भरने जैसा है।"
किसानों को पानी की कमी के बीच फसल बोने को लेकर मुख्यमंत्री की कथित सलाह पर प्रतिक्रिया देते हुए अशोक ने कहा कि किसानों को ऐसी सलाह की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार में साहस है तो उसे कर्नाटक के किसानों को सलाह देने के बजाय तमिलनाडु सरकार से खेती नहीं करने के लिए कहना चाहिए था।
उन्होंने आरोप लगाया कि मेकेदातु संतुलन जलाशय परियोजना का तमिलनाडु द्वारा विरोध किए जाने के बावजूद मुख्यमंत्री ने उसके खिलाफ कोई बयान नहीं दिया और राज्य से तमिलनाडु को पानी छोड़ा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस परियोजना के लिए बजट में 10 रुपये तक का प्रावधान नहीं किया गया है।
अशोक ने दावा किया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार राज्य के 22 जलाशयों में जल भंडारण में भारी गिरावट आई है। उनके अनुसार, पिछले वर्ष इसी अवधि में जलाशयों में 335.292 टीएमसी पानी था, जबकि इस समय यह घटकर केवल 66.099 टीएमसी रह गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अलमट्टी, तुंगभद्रा, हिडकल और भीमा जैसे प्रमुख जलाशयों में भी गंभीर जल संकट है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में सरकार किसानों को खेती न करने की सलाह देने के बजाय राहत पैकेज की घोषणा करे।
भाजपा नेता ने सरकार से फसल नुकसान के मुआवजे के लिए तत्काल 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान करने, सूखा टास्क फोर्स गठित करने और पशुधन की सुरक्षा के लिए गोशालाएं स्थापित करने की मांग की।
अशोक ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने बेंगलुरु विकास प्राधिकरण (बीडीए) और बेंगलुरु महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बीएमआरडीए) जैसे अधिक राजस्व वाले विभाग अपने पास रखे हैं, जबकि अन्य विभाग मंत्रियों को सौंप दिए गए हैं।
--आईएएनएस
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