जूनिपर ग्रीन एनर्जी आईपीओ: भारी कर्ज, महंगा वैल्यूएशन और सीमित ग्राहकों पर निर्भरता निवेशकों के लिए बड़े जोखिम
मुंबई, 30 जुलाई (आईएएनएस)। जूनिपर ग्रीन एनर्जी का 1,800 करोड़ रुपए का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) गुरुवार को निवेशकों के लिए खुल गया। हालांकि, अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में कंपनी की तेज वृद्धि के बावजूद बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस आईपीओ में निवेश से पहले कुछ बड़े जोखिमों पर ध्यान देना जरूरी है। इनमें सबसे प्रमुख भारी कर्ज, ऊंचा वैल्यूएशन और कुछ चुनिंदा ग्राहकों पर अत्यधिक निर्भरता शामिल हैं।
कई रिसर्च विश्लेषकों और ब्रोकरेज फर्मों ने कंपनी के ऊंचे कर्ज को सबसे बड़ी चिंता बताया है। वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक कंपनी पर 12,920.54 करोड़ रुपए का कर्ज था, जो इस पूंजी-प्रधान कारोबार की प्रकृति को दर्शाता है।
विश्लेषकों के अनुसार, कंपनी के 95 प्रतिशत से अधिक कर्ज पर ब्याज दरें परिवर्तनीय हैं। ऐसे में यदि भविष्य में ब्याज दरें बढ़ती हैं और बिजली की दरें दीर्घकालिक अनुबंधों के कारण स्थिर रहती हैं, तो कंपनी की वित्तीय लागत बढ़ सकती है और मुनाफे पर दबाव आ सकता है।
विश्लेषकों ने कंपनी के महंगे वैल्यूएशन को भी बड़ा जोखिम बताया है। आईपीओ के 225 रुपए प्रति शेयर के ऊपरी प्राइस बैंड पर कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग (पी/ई) अनुपात 316.39 गुना है, जो सूचीबद्ध अधिकांश अक्षय ऊर्जा कंपनियों की तुलना में काफी अधिक है। इससे भविष्य में किसी भी तरह की कारोबारी चुनौती या प्रदर्शन में कमी की स्थिति में निवेशकों के रिटर्न पर असर पड़ सकता है।
तुलना करें तो एक्मे सोलर होल्डिंग्स का पी/ई अनुपात 51.5 गुना, एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी का 150.9 गुना और केपीआई ग्रीन एनर्जी का केवल 16.3 गुना है। ऐसे में जूनिपर ग्रीन एनर्जी का वैल्यूएशन काफी प्रीमियम माना जा रहा है।
कंपनी की आय का बड़ा हिस्सा भी सीमित ग्राहकों से आता है, जिसे विश्लेषक एक महत्वपूर्ण जोखिम मान रहे हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 में महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (एमएसईडीसीएल) और गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (जीयूवीएनएल) से कंपनी की कुल आय का 86.1 प्रतिशत प्राप्त हुआ।
यदि इन सरकारी बिजली वितरण कंपनियों की ओर से भुगतान में देरी होती है, बिजली खरीद कम होती है या नीतियों में बदलाव होता है, तो कंपनी के नकदी प्रवाह पर सीधा असर पड़ सकता है।
विश्लेषकों ने यह भी कहा कि कंपनी सोलर मॉड्यूल और विंड टर्बाइन जैसे महत्वपूर्ण उपकरणों के लिए कुछ ही सप्लायर्स पर निर्भर है। यदि सप्लाई चेन में कोई बाधा आती है या उपकरणों की कीमतें बढ़ती हैं, तो परियोजनाओं की लागत और समय-सीमा दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
यह आईपीओ पूरी तरह फ्रेश इश्यू है और इससे जुटाई गई राशि का उपयोग कंपनी अपने कारोबार के विस्तार और कर्ज चुकाने में करेगी। ऊपरी प्राइस बैंड पर कंपनी का अनुमानित पोस्ट-लिस्टिंग मार्केट वैल्यूएशन लगभग 12,802 करोड़ रुपए होगा।
इस बीच, आईपीओ से पहले कंपनी ने 9 जुलाई को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास दाखिल ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) के परिशिष्ट में कंपनी, उसकी सहायक कंपनियों, प्रमोटरों, निदेशकों और प्रमुख प्रबंधन अधिकारियों से जुड़े लंबित कानूनी मामलों की जानकारी भी दी थी।
ड्राफ्ट दस्तावेज के अनुसार, कंपनी 10.44 करोड़ रुपए के दावे वाले एक महत्वपूर्ण दीवानी (सिविल) मुकदमे का सामना कर रही है। वहीं, उसकी सहायक कंपनियों पर आपराधिक और दीवानी मामलों से जुड़े 74.9 करोड़ रुपए से अधिक के दावे लंबित हैं।
इसके अलावा, कंपनी पर टैक्स से जुड़े 6 मामले भी लंबित हैं, जिनकी कुल राशि 37.1 लाख रुपए है।
डीआरएचपी में यह भी बताया गया है कि कंपनी की सहायक कंपनियां कानूनी जोखिम का बड़ा हिस्सा वहन कर रही हैं। इनके खिलाफ दो आपराधिक मामले और दो महत्वपूर्ण दीवानी मुकदमे लंबित हैं, जिनमें कुल दावा राशि 70.72 करोड़ रुपए से अधिक है।
--आईएएनएस
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