पत्रकारिता की आजादी संविधान से मिली, डीपीडीपी कानून मीडिया की स्वतंत्रता को प्रभावित नहीं करता: अश्विनी वैष्णव
नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम, 2023 पत्रकारिता की स्वतंत्रता पूरी तरह रक्षा करता है और इसमें ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो मीडिया की स्वतंत्र रूप से खबरें प्रकाशित करने की क्षमता को प्रभावित करे।
मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) ने इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। एसोसिएशन का तर्क है कि कानून में पत्रकारिता संबंधी गतिविधियों को विशेष छूट नहीं दिए जाने से समाचार जुटाने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और नागरिकों के सूचना के अधिकार को नुकसान पहुंच सकता है।
वैष्णव ने कहा कि कानून बनाने के पीछे पत्रकारिता की स्वतंत्रता को प्रभावित करने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि निजता संबंधी कानून पत्रकारिता की आजादी को पूरी तरह बरकरार रखता है। इसे सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद तैयार किया गया, जिसमें निजता को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी गई थी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कानून तैयार करने से पहले व्यापक स्तर पर सार्वजनिक परामर्श किया गया था और इस प्रक्रिया में उद्योग जगत की भी भागीदारी रही। उन्होंने कहा, ''परामर्श की प्रक्रिया एक महीने तक चली और इसमें उद्योग जगत भी शामिल था। कानून का कोई भी प्रावधान पत्रकारिता की स्वतंत्रता का उल्लंघन नहीं करता।''
मीडिया संगठनों की ओर से उठाई गई चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए वैष्णव ने स्पष्ट किया कि इस कानून के तहत पत्रकारों को किसी व्यक्ति पर खबर प्रकाशित करने से पहले उससे अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। इसके अलावा, कानून में ऐसा कोई प्रावधान भी नहीं है, जो पत्रकारों को खबर के स्रोत का खुलासा करने के लिए बाध्य करता हो।
उन्होंने कहा कि किसी खबर में जिस व्यक्ति का उल्लेख किया गया है, उससे रिपोर्ट प्रकाशित करने के लिए मंजूरी लेने की कोई बाध्यता नहीं है। इसी तरह, खबर के स्रोत का खुलासा करने के लिए भी कोई शर्त नहीं रखी गई है।
इससे पहले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने डीएनपीए की याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। डीएनपीए 21 प्रमुख समाचार संगठनों का प्रतिनिधित्व करता है। एसोसिएशन ने अपनी याचिका में दलील दी है कि कानून में पत्रकारिता संबंधी गतिविधियों के लिए स्पष्ट छूट नहीं होने से खोजी पत्रकारिता और जनहित से जुड़ी खबरों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
डीएनपीए की चिंता है कि डिजिटल व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण से जुड़े प्रावधानों का पत्रकारिता के कामकाज पर असर पड़ सकता है, खासकर उन मामलों में जहां खबरों के लिए व्यक्तिगत जानकारी जुटाना और उसका इस्तेमाल करना आवश्यक होता है।
गौरतलब है कि संसद ने अगस्त 2023 में डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम पारित किया था। यह भारत में डिजिटल व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा और उसके प्रसंस्करण को नियंत्रित करने वाला व्यापक कानून है।
इस अधिनियम के तहत व्यक्तियों की सहमति से या कानून की धारा 7 में उल्लिखित कुछ ''वैध उपयोगों'' के आधार पर व्यक्तिगत डेटा का प्रसंस्करण किया जा सकता है।
--आईएएनएस
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