×

प्रकृति का संदेश स्पष्ट है, सीमाएं पार नहीं की जा सकतीं: जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल

 

जम्मू, 21 सितंबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को कहा कि प्रकृति का संदेश स्पष्ट है: यदि मानव जाति को पृथ्वी और स्वयं को बचाना है तो सीमाएं पार नहीं की जा सकतीं।

जम्मू-कश्मीर उपराज्यपाल ने जम्मू के सरकारी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में आयोजित 'मिलेट्स फॉर हेल्थ' संगोष्ठी को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने चिकित्सा जगत, वैज्ञानिकों, किसानों और नागरिकों से मिलेट्स को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आग्रह किया। इससे पहले दिन में, उन्होंने जम्मू के एसकेयूएएसटी द्वारा आयोजित मिलेट्स मिशन पर एक राष्ट्रीय संवाद में भी भाग लिया।

उन्होंने कहा कि जीएमसी संगोष्ठी केवल एक अकादमिक अभ्यास से कहीं अधिक थी, और इसे पृथ्वी, इसके जल, किसान परिवारों, गांवों और प्रत्येक नागरिक के स्वास्थ्य के प्रति साझा जिम्मेदारी की याद दिलाने वाला बताया।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि प्रकृति का संदेश स्पष्ट है कि सीमाएं पार नहीं की जा सकतीं, और मिलेट्स एक विश्वसनीय विकल्प प्रदान करता है।

जम्मू-कश्मीर उपराज्यपाल ने रेखांकित किया कि बाजरा भारतीय सभ्यता जितना ही प्राचीन है। बाजरा, ज्वार, रागी, कोडो, कुटकी, कांगनी और सनवा पीढ़ियों से जीवित हैं, कठोर जलवायु में कम पानी के साथ उगते हैं और इन्हें न्यूनतम रासायनिक सहायता की आवश्यकता होती है।

2018 की आईसीएमआर रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 2016 में सभी मौतों में से 61.8 प्रतिशत गैर-संक्रामक रोगों के कारण हुईं, जो 1990 में 37.09 प्रतिशत थीं। उन्होंने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण का भी उल्लेख किया, जिसमें 15-49 आयु वर्ग की 11 प्रतिशत महिलाओं और 15 प्रतिशत पुरुषों में उच्च रक्तचाप दर्ज किया गया।

उन्होंने कहा कि ये केवल चिकित्सीय समस्याएं नहीं हैं, बल्कि ये सीधे तौर पर पारिवारिक आर्थिक स्थिति, सामाजिक जीवन और राष्ट्रीय उत्पादकता को प्रभावित करती हैं। हमारे पारंपरिक भोजन और बाजरा को अधिक मात्रा में शामिल करना, हमें रोग निवारण और स्वस्थ जीवन शैली की दिशा में एक महत्वपूर्ण मार्ग दिखा सकता है।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल ने बाजरा के पोषण मूल्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बाजरा फाइबर, आयरन, कैल्शियम और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर होता है। उन्होंने बताया कि कई शोध पत्रों से पता चलता है कि मिलेट्स का ग्लाइसेमिक इंडेक्स अपेक्षाकृत कम होता है और यह हृदय स्वास्थ्य, कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण और वजन प्रबंधन में सहायक होता है।

उन्होंने कहा कि शोध अध्ययनों को देखते हुए मैं कह सकता हूं कि मिलेट्स व्यक्तिगत स्वास्थ्य की रक्षा से लेकर प्रकृति संरक्षण तक, संपूर्ण चक्र को प्रभावित करता है। चिकित्सा जगत के सहयोग से, इसके लाभों के बारे में जागरूकता समाज के हर वर्ग तक पहुंचनी चाहिए।

चर्चा से आगे बढ़कर कार्रवाई करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल ने किसानों से फसलों में विविधता लाने और वैज्ञानिकों से अधिक उपज देने वाली, जलवायु के अनुकूल किस्मों को विकसित करने की अपील की। ​​उन्होंने डॉक्टरों और पोषण विशेषज्ञों से संतुलित आहार में बाजरे की भूमिका के बारे में साक्ष्य-आधारित जागरूकता पैदा करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि मैं जम्मू और कश्मीर के सभी नागरिकों से अपील करता हूं कि वे प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के बजाय बाजरा जैसे पौष्टिक और संतुलित भोजन को प्राथमिकता दें। यदि हम सब मिलकर आगे बढ़ें, तो हम एक ऐसे जम्मू और कश्मीर का निर्माण कर सकते हैं जो खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करे, नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा करे और साथ ही जल, मिट्टी और पर्यावरण का संरक्षण करे। आइए मिलकर स्वास्थ्य, स्थिरता और समृद्धि के बीज बोएं।

--आईएएनएस

एमएस/