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जिज्ञासा ज्ञान का पहला दीपक है, छात्रों को विज्ञान के साथ संस्कार भी मिलें: मनोज सिन्हा

 

श्रीनगर, 30 अगस्त (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने रविवार को श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के स्थापना दिवस समारोह और श्री माता वैष्णो देवी गुरुकुल के वार्षिक उत्सव को संबोधित करते हुए कहा कि जिज्ञासा ज्ञान का पहला दीपक है।

उपराज्यपाल ने श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और बेहतर व्यवस्थाओं के लिए श्राइन बोर्ड द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां समर्पण, अनुशासन और सेवा भावना को दर्शाती हैं, जो सनातन संस्कृति की मूल विशेषताएं हैं। गुरुकुल के छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने शिक्षा में जिज्ञासा के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, "जिज्ञासा ज्ञान का पहला दीपक है। हमारी परंपरा में प्रश्न पूछना कभी कमजोरी नहीं माना गया। उपनिषदों की परंपरा संवाद, चिंतन और अनुभव की परंपरा है। शिक्षकों को छात्रों को केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि मूल्य और संस्कार भी देने चाहिए।"

मूल्यों और विज्ञान के बीच संतुलन की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि विज्ञान हमें गति देता है, जबकि मूल्य हमें दिशा देते हैं। गति और दिशा के बीच संतुलन ही वास्तविक प्रगति है।

उन्होंने कहा, "कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अध्यात्म की यात्रा साथ-साथ आगे बढ़नी चाहिए। हमारा उद्देश्य मूल्यों के माध्यम से अपनी जड़ों को मजबूत करना और विज्ञान के माध्यम से छात्रों को नए पंख देना होना चाहिए। मुझे खुशी है कि गुरुकुल ने अपनी शिक्षा प्रणाली में विज्ञान और कंप्यूटर तकनीक जैसे आधुनिक विषयों को शामिल किया है।"

उपराज्यपाल ने गुरुकुल और श्राइन बोर्ड से पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने जल संरक्षण, ऊर्जा बचत, वृक्षारोपण और स्वच्छता से जुड़े कार्यक्रम चलाने की अपील की, ताकि ये संस्थाएं सतत विकास (सस्टेनेबल डेवलपमेंट) का उदाहरण बन सकें।

उन्होंने कहा, "हमारे प्राचीन ग्रंथों में प्रकृति के प्रति गहरा सम्मान दिखाई देता है। अथर्ववेद का 'पृथ्वी सूक्त' धरती के प्रति कृतज्ञता और उसकी रक्षा के संकल्प को दर्शाता है। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के इस दौर में हमें आधुनिक विज्ञान के साथ-साथ अपनी ज्ञान परंपराओं को भी समझना और पढ़ना चाहिए।"

मनोज सिन्हा ने गुरुकुल के लिए तीन नई पहलों का भी प्रस्ताव रखा। इनमें भारतीय ज्ञान परंपराओं और आधुनिक विज्ञान के बीच संवाद स्थापित करने के लिए 'वैल्यूज एंड साइंस इनोवेशन सेंटर', छात्रों को स्वच्छता, डिजिटल साक्षरता और पर्यावरण संरक्षण जैसी सेवाओं के माध्यम से समाज से जोड़ने के लिए 'सेवा एवं समाज अभियान', तथा उभरती तकनीकों के प्रति जिम्मेदारी और नैतिकता विकसित करने के लिए 'फ्यूचर स्किल्स एंड एथिकल टेक्नोलॉजी' कार्यक्रम शामिल हैं।

उन्होंने कहा, "मुझे पूरा विश्वास है कि श्री माता वैष्णो देवी गुरुकुल आने वाले वर्षों में ऐसा शिक्षा केंद्र बनेगा, जहां परंपरा और आधुनिकता एक-दूसरे को समृद्ध करेंगी और जहां से जागरूक, संवेदनशील और संस्कारी नागरिक निकलेंगे। ज्ञान तभी पूर्ण होता है जब उसके साथ करुणा, विनम्रता और मानवता के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी जुड़ी हो।"

उन्होंने अंत में कहा, "माता वैष्णो देवी हम सभी को शक्ति, बुद्धि और सेवा का भाव प्रदान करें तथा भारत को ज्ञान, करुणा और प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ने का आशीर्वाद दें।"

समारोह में महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरिजी महाराज, डॉ. अशोक भान, ललित भसीन, सुरेश कुमार शर्मा, माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के सदस्य, पद्म पुरस्कार से सम्मानित प्रो. विश्व मूर्ति शास्त्री, एसएमवीडी गुरुकुल की गवर्निंग काउंसिल के सदस्य, एसएमवीडीएसबी के सीईओ सचिन कुमार वैश्या, अतिरिक्त सीईओ आलोक कुमार मौर्य, वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी, शिक्षक, अभिभावक और छात्र मौजूद रहे।

--आईएएनएस

एएमटी/एमएस