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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सोशल मीडिया पर विधायकों के खिलाफ मानहानिकारक सामग्री पर होगी चर्चा

 

जम्मू, 12 फरवरी (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विधायकों के खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट की जा रही मानहानिकारक सामग्री पर चर्चा होगी।

विधानसभा स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने गुरुवार को घोषणा की कि विधायकों के खिलाफ सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही मानहानिकारक (बदनाम करने वाली) सामग्री पर विधानसभा में चर्चा की जाएगी।

यह मुद्दा प्रश्नकाल के दौरान उठा, जब कई सदस्यों ने चिंता जताई कि कुछ ऑनलाइन पोर्टल और सोशल मीडिया हैंडल बिना पुष्टि के विधायकों के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट कर रहे हैं।

भाजपा विधायक आरएस पठानिया ने कहा कि कुछ पोर्टल लगातार बदनाम करने वाली खबरें चला रहे हैं, और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही। उन्होंने सरकार से इस पर सख्त कदम उठाने की मांग की।

स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्री सकीना इत्तू ने कहा कि इस मामले को सूचना विभाग के साथ उठाया जाना चाहिए ताकि खासकर फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैल रहे गलत कंटेंट की जांच की जा सके।

आरएस पठानिया के सवाल के लिखित जवाब में सूचना विभाग ने बताया कि फर्जी खबरों पर नजर रखने के लिए डीआईपीआर (सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय) में एक विशेष मीडिया मॉनिटरिंग सेल बनाया गया है।

जवाब में कहा गया, “1 अप्रैल 2025 से 31 जनवरी 2026 तक 20 प्रेस विज्ञप्तियों और 8 सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए गलत खबरों का खंडन किया गया है।”

हालांकि, सरकार ने साफ किया कि वेबसाइटों, डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन न्यूज चैनलों और फैक्ट चेक यूनिट्स का नियंत्रण सूचना विभाग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

यह भी कहा गया कि सूचना विभाग किसी भी निजी फैक्ट-चेक यूनिट को न तो मान्यता देता है और न ही अधिकृत करता है।

सरकार ने बताया कि मीडिया और सोशल मीडिया को नियंत्रित करने के लिए नई मीडिया नीति-2026 का मसौदा तैयार किया गया है, जो फिलहाल विभिन्न विभागों से परामर्श के चरण में है।

स्पीकर राथर ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि इस तरह की शिकायतें लगातार मिल रही हैं और सूचना विभाग के प्रवर्तन (एन्फोर्समेंट) विंग को मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों से सख्ती से निपटना चाहिए।

मंत्री सकीना इत्तू ने कहा कि यह सदन के लिए चिंता का विषय है और फर्जी मीडिया और फेसबुक मीडिया नियंत्रण से बाहर हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधियों को एक-दूसरे की गरिमा को ठेस नहीं पहुंचानी चाहिए।

विभिन्न दलों के कई विधायकों ने इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की मांग की। मंत्री इत्तू ने आश्वासन दिया कि सूचना विभाग के साथ बैठक कर इस मामले की पूरी जांच की जाएगी।

विधायक नजीर अहमद गुरेजी ने भी आरोप लगाया कि कुछ सोशल मीडिया पोर्टल राजनीतिक प्रतिनिधियों की छवि खराब कर रहे हैं।

सदन के दोनों पक्षों की मांग पर स्पीकर ने कहा कि यह महत्वपूर्ण मुद्दा है और मौजूदा सत्र में इस पर चर्चा होगी। उन्होंने सदस्यों से लिखित नोटिस देने को कहा और बताया कि आधे घंटे या एक घंटे की चर्चा रखी जाएगी।

बाद में भाजपा विधायक श्याम लाल शर्मा ने विधानसभा परिसर के बाहर पैंथर्स पार्टी नेता हर्ष देव सिंह द्वारा की गई कथित टिप्पणियों पर आपत्ति जताई।

शर्मा ने नाम लिए बिना कहा कि एक पूर्व तीन बार विधायक रह चुके नेता ने विरोध प्रदर्शन किया और सदन के सदस्यों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि उस व्यक्ति ने विधायकों को 'मूर्ख' कहा, जबकि खुद उनके खिलाफ कई एफआईआर दर्ज हैं, और यह विधानसभा की गरिमा को ठेस पहुंचाने की कोशिश है।

भाजपा विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया ने भी इस मामले में कार्रवाई की मांग की। स्पीकर ने आश्वासन दिया कि मामले की जांच की जाएगी और उचित कदम उठाए जाएंगे।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी