जम्मू-कश्मीर में रिश्वत लेते कृषि विभाग का डिप्टी डायरेक्टर गिरफ्तार, दलाल भी पकड़ा गया
श्रीनगर, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर (लॉ एनफोर्समेंट) को एक बीज कारोबारी से रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। उसके साथ उसके कथित दलाल को भी गिरफ्तार किया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि एसीबी ने बुधवार को ट्रैप कार्रवाई की थी, जबकि इसकी जानकारी गुरुवार को जारी बयान में दी गई।
एसीबी के अनुसार, उसे एक लिखित शिकायत मिली थी। शिकायतकर्ता बीज कारोबारी ने आरोप लगाया था कि डिप्टी डायरेक्टर एग्रीकल्चर लॉ एनफोर्समेंट नसीर अहमद खान ने उसकी दुकान पर पौधों के बीज बेचने की अनुमति देने के एवज में 2 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, मजबूरी में वह पहले ही 1 लाख रुपये दे चुका था। बातचीत के बाद बाकी रकम 50-50 हजार रुपये की दो किस्तों में देने पर सहमति बनी थी।
आगे रिश्वत देने के इच्छुक नहीं होने पर शिकायतकर्ता ने कानूनी कार्रवाई के लिए एसीबी से संपर्क किया। सत्यापन के दौरान आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। इसके बाद पुलिस स्टेशन एसीबी श्रीनगर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 7ए तथा बीएनएस की धारा 61(2) के तहत एफआईआर संख्या 16/2026 दर्ज की गई और जांच शुरू की गई।
एसीबी ने इसके बाद 30 सितंबर को ट्रैप टीम गठित की। ट्रैप कार्रवाई के दौरान आरोपी सरकारी अधिकारी नसीर अहमद खान को उसके कथित दलाल मोहम्मद ओवैस भट के साथ शिकायतकर्ता से 50 हजार रुपये की अवैध रिश्वत मांगते और स्वीकार करते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया गया।
मोहम्मद ओवैस भट क़मरवारी का रहने वाला बताया गया है। दोनों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। उनके कब्जे से रिश्वत की 50 हजार रुपये की रकम भी बरामद की गई।
दोनों आरोपियों की मेडिको-लीगल औपचारिकताएं पूरी कराने के बाद उन्हें श्रीनगर के शहीदगंज पुलिस स्टेशन में रखा गया है। एसीबी ने बताया कि मामले में आगे की जांच जारी है।
एंटी करप्शन ब्यूरो जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश की प्रमुख विशेष कानून प्रवर्तन एजेंसी है। यह सरकारी कर्मचारियों के बीच रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों की जांच करती है।
इस संगठन की शुरुआत वर्ष 1962 में ‘एंटी करप्शन ऑर्गनाइजेशन’ के रूप में हुई थी। वर्ष 1983 में प्रिवेंशन ऑफ करप्शन लॉज (अमेंडमेंट) एक्ट के तहत इसका नाम बदलकर ‘स्टेट विजिलेंस ऑर्गनाइजेशन’ किया गया। बाद में यह एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) के रूप में विकसित हुआ।
--आईएएनएस
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