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जयपुर बनेगा न्यायिक संवाद की वैश्विक राजधानी, 52 राष्ट्रमंडल देशों के साथ शुरू हुआ शांति मध्यस्थता सम्मेलन

 

जयपुर, 31 जुलाई (आईएएनएस)। जयपुर शुक्रवार से न्यायिक संवाद की वैश्विक राजधानी बनने जा रहा है। यहां 52 राष्ट्रमंडल देशों के प्रतिनिधि तीन दिवसीय 'कॉमनवेल्थ पीस मेडिएशन एंड रूल ऑफ लॉ कॉन्फ्रेंस - सीपीएमसी 2026' में जुटे हैं।

31 जुलाई से 2 अगस्त तक चलने वाले इस सम्मेलन के अंत में 'जयपुर शांति मध्यस्थता घोषणा 2026' को अपनाया जाएगा। यह एक ऐतिहासिक दस्तावेज होगा, जिसका उद्देश्य शांति आधारित न्याय और मध्यस्थता के लिए नया वैश्विक ढांचा तैयार करना है।

इसमें राष्ट्रमंडल देशों के न्यायाधीश, अटॉर्नी जनरल, वरिष्ठ अधिवक्ता, मध्यस्थ, कानून विशेषज्ञ, शिक्षाविद और नीति निर्माता हिस्सा ले रहे हैं। चर्चा का केंद्र यह है कि मध्यस्थता और कानून के शासन के जरिए न्याय प्रणाली को कैसे तेज, सुलभ और अधिक मानवीय बनाया जाए।

अधिकारियों ने आईएएनएस को बताया कि यह पहली बार है जब भारत राष्ट्रमंडल की शांति मध्यस्थता पर वैश्विक बातचीत का नेतृत्व कर रहा है। इससे भारत न्यायिक कूटनीति और वैकल्पिक विवाद समाधान के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका में आया है।

सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण क्षण 2 अगस्त को आएगा, जब विभिन्न राष्ट्रमंडल देशों के प्रतिनिधि 'जयपुर शांति मध्यस्थता घोषणा 2026' को औपचारिक रूप से अपनाएंगे।

इस घोषणा का उद्देश्य शांति मध्यस्थता, संघर्ष समाधान, कानून के शासन और राष्ट्रमंडल देशों में त्वरित व प्रभावी न्याय तक पहुंच के लिए साझा सिद्धांत तय करना है। माना जा रहा है कि यह दस्तावेज भविष्य में अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सहयोग और मध्यस्थता प्रयासों के लिए एक अहम संदर्भ बनेगा।

सम्मेलन की खास बात यह है कि इसमें सिर्फ विवाद सुलझाने की बात नहीं होगी, बल्कि "शांति मध्यस्थता" की अवधारणा पर वैश्विक संवाद होगा। इसका लक्ष्य सिर्फ मुकदमे खत्म करना नहीं, बल्कि पक्षों के बीच लंबे समय से चली आ रही कड़वाहट, अविश्वास और संघर्ष को खत्म कर स्थायी शांति स्थापित करना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस मॉडल को न्याय प्रणाली में व्यापक रूप से अपनाया गया, तो अदालतों में वर्षों से लटके कई विवाद कम समय में सुलझ सकते हैं और न्याय प्रणाली अधिक मानवीय व प्रभावी बन सकती है।

सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन शुक्रवार शाम 6 बजे जयपुर के द ललित होटल में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश सूर्यकांत करेंगे।

उद्घाटन सत्र में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा, भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी, कॉमनवेल्थ लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष स्टीवन थिरू और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह सहित देश-विदेश के न्यायपालिका और कानूनी जगत के प्रमुख लोग शामिल होंगे।

इस सम्मेलन का आयोजन राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन, कॉमनवेल्थ लॉयर्स एसोसिएशन और निवारण ने संयुक्त रूप से किया है।

अगले तीन दिनों तक प्रतिनिधि 8 बड़े विषयों पर मंथन करेंगे। इनमें पर्यावरणीय न्याय, पारिवारिक मध्यस्थता, पुनर्स्थापनात्मक आपराधिक न्याय, वाणिज्यिक विवाद, कार्यस्थल संघर्ष, बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक परियोजना विवाद, सामुदायिक न्याय और वैश्विक शांति में शांति मध्यस्थता की भूमिका शामिल हैं।

चर्चा में यह भी देखा जाएगा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उभरती तकनीकें न्याय तक पहुंच को कैसे बेहतर बना सकती हैं और कानूनी प्रणालियों में पारदर्शिता व दक्षता कैसे ला सकती हैं।

जयपुर को मेजबान शहर चुना जाना राजस्थान की मध्यस्थता के क्षेत्र में बढ़ती प्रतिष्ठा को दर्शाता है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य ने मध्यस्थता तंत्र के जरिए हजारों विवादों का निपटारा सफलतापूर्वक किया है, जिससे वह वैकल्पिक विवाद समाधान का एक मॉडल बन गया है।

अगर सम्मेलन से निकलने वाली सिफारिशों और 'जयपुर शांति मध्यस्थता घोषणा' को सदस्य देशों में लागू किया गया, तो कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल न्याय प्रणाली को फिर से परिभाषित कर सकती है - लंबी मुकदमेबाजी से हटकर संवाद, सुलह और स्थायी शांति पर फोकस किया जाएगा।

--आईएएनएस

डीएससी