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भारत का व्यापारिक निर्यात मार्च में 6.3 प्रतिशत बढ़ा, व्यापार घाटा कम होकर 20.67 अरब डॉलर हुआ

 

नई दिल्ली, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत का व्यापारिक घाटा मार्च में कम होकर 20.67 अरब डॉलर हो गया है। वहीं, देश का व्यापारिक निर्यात फरवरी के 36.61 अरब डॉलर से 6.3 प्रतिशत बढ़कर 38.92 अरब डॉलर हो गया है। यह जानकारी वाणिज्य मंत्रालय द्वारा बुधवार को दी गई।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि 2025-26 के लिए भारत का कुल निर्यात 860.09 अरब डॉलर से अधिक हो गया है, जो 2024-25 के इसी अवधि के आंकड़े 825.26 अरब डॉलर की तुलना में 4.22 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

इस दौरान भारत का आयात 5.98 प्रतिशत घटकर 59.9 अरब डॉलर रह गया, जिससे राजकोषीय घाटे में भी कमी आई है।

सूत्रों के अनुसार, इस महीने कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने के कारण भारतीय तेल कंपनियों ने कच्चे तेल की बड़ी मात्रा में खरीद करने के बजाय पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन जारी रखने के लिए अपने रणनीतिक भंडार का उपयोग किया। इससे तेल आयात बिल में कमी आई।

यह आंकड़े ऐसे समय पर सामने आए हैं, जब ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम पैदा हो गया है।

वहीं, अमेरिका ने कहा कि उसकी सेना ने ईरान के बंदरगाहों की पूरी तरह से नाकाबंदी कर दी है और किसी भी जहाज को देश के तटों पर आने या जाने की अनुमति नहीं दे रही है। हालांकि, साथ ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा कि युद्ध समाप्त करने के लिए तेहरान के साथ बातचीत इस सप्ताह फिर से शुरू हो सकती है।

युद्ध के चलते ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है, जो दुनिया के 20 प्रतिशत तेल और गैस निर्यात के पारगमन का एक महत्वपूर्ण वैश्विक मार्ग है।

ईरान ने कुछ भारतीय एलपीजी जहाजों को फारस की खाड़ी से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते निकलने की अनुमति दी है। भारतीय ध्वज वाला एलपीजी पोत जग विक्रम, जो शनिवार को लगभग 20,400 मीट्रिक टन एलपीजी और 24 नाविकों को लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से रवाना हुआ, मंगलवार को कांडला बंदरगाह पर पहुंचा। इससे देश में खाना पकाने की गैस की आपूर्ति बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी माल पहुंचा।

इससे पहले 9 अप्रैल को, भारतीय ध्वज वाला व्यापारिक पोत ग्रीन आशा, जो 5 अप्रैल को होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर गया था, 15,400 टन एलपीजी के माल के साथ नवी मुंबई के जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह प्राधिकरण (जेएनपीए) पर सुरक्षित रूप से पहुंचा। पश्चिम एशिया संकट के बीच देश में खाना पकाने की गैस की आपूर्ति बढ़ाने के लिए टैंकर का आगमन एक महत्वपूर्ण समय पर हुआ है।

--आईएएनएस

एबीएस/