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भारत का राजमार्ग नेटवर्क बीते 12 वर्षों में रिकॉर्ड 55,285 किलोमीटर बढ़ा

 

नई दिल्ली, 14 जून (आईएएनएस)। भारत का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क 2014 में 91,287 किलोमीटर से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 तक 1,46,572 किलोमीटर का हो गया है, जो बीते 12 वर्षों में 55,285 किलोमीटर या 61 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दिखाता है। यह जानकारी सरकार द्वारा रविवार को जारी फैक्टशीट में दी गई।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक फैक्टशीट में आगे कहा गया कि भारतमाला परियोजना और एक्सप्रेसवे के विकास के चलते देश ने सड़क निर्माण में रिकॉर्ड गति हासिल की है।

फैक्टशीट में कहा गया कि राजमार्ग क्षेत्र में सबसे बड़ा बदलाव 'भारतमाला परियोजना' ने लाया है। यह केंद्र सरकार की एक खास योजना है जिसे पूरे देश में माल और यात्रियों की आवाजाही को बेहतर बनाने के लिए बनाया गया है। इसके तहत मार्च 2026 तक 26,425 किलोमीटर के प्रोजेक्ट्स के लिए कॉन्ट्रैक्ट दिए जा चुके थे, जबकि 22,590 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका था। अक्टूबर 2017 में भारत सरकार से मंजूरी पाने वाले इस प्रोग्राम के तहत 34,800 किलोमीटर लंबे नेशनल हाईवे कॉरिडोर बनाने का लक्ष्य रखा गया था, जिस पर अनुमानित तौर पर 5.35 लाख करोड़ रुपए खर्च होंगे।

भारतमाला परियोजना ने कनेक्टिविटी को काफी मजबूत किया है, लॉजिस्टिक्स की लागत कम की है और दूर-दराज व रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक पहुंच बेहतर बनाई है, जिससे आर्थिक विकास, क्षेत्रीय संतुलन और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा मिला है।

2013-14 में निर्माण की औसत रफ्तार लगभग 11.6 किलोमीटर प्रति दिन थी, जो 2025 में बढ़कर लगभग 34 किलोमीटर प्रति दिन हो गई है। इस जबरदस्त बढ़ोतरी से राज्यों और क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर हुई है, सामान और सेवाओं की तेज आवाजाही आसान हुई है, बाजारों तक पहुंच बढ़ी है और देश की आर्थिक नींव मजबूत हुई है।

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे भारत के सबसे बड़े हाईवे इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक है। लगभग 1,386 किलोमीटर की लंबाई और करीब 1 लाख करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाले इस प्रोजेक्ट के पूरा होने पर यह देश का सबसे लंबा एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे बन जाएगा।

दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र को जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसवे देश के प्रमुख आर्थिक केंद्रों के बीच कनेक्टिविटी को काफी बेहतर बनाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 फरवरी, 2023 को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के पहले पूरे हो चुके हिस्से का उद्घाटन किया था, यह राजस्थान में 246 किलोमीटर लंबा दिल्ली-दौसा-लालसोट स्ट्रेच है, जिसे 12,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की लागत से बनाया गया है।

इसके बाद, 22 फरवरी 2024 को गुजरात में 87 किलोमीटर लंबे वडोदरा-भरूच हिस्से का उद्घाटन किया गया। इसके बाद, 5 जून 2026 को प्रधानमंत्री ने गुजरात के दो और हिस्सों 36 किलोमीटर लंबा किम-एना हिस्सा और 27.5 किलोमीटर लंबा गांडेवा-एना हिस्सा का उद्घाटन किया। इस प्रोजेक्ट से यात्रा का समय कम होने, लॉजिस्टिक्स की क्षमता बेहतर होने और कॉरिडोर के आस-पास औद्योगिक विकास, निवेश और रोज़गार के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे ने दिल्ली और मेरठ के बीच तेज, सुरक्षित और ज्यादा कुशल यात्रा को संभव बनाकर नेशनल कैपिटल रीजन में कनेक्टिविटी को बदल दिया है। लगभग 8,346 करोड़ रुपए की लागत से बने और करीब 82 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे ने यात्रियों और व्यवसायों, दोनों के लिए यात्रा का समय काफी कम कर दिया है।

द्वारका एक्सप्रेसवे, नेशनल कैपिटल रीजन में शहरी परिवहन बुनियादी ढांचे के विकास में एक अहम मील का पत्थर है। लगभग 29 किलोमीटर लंबे और करीब 9,000 करोड़ रुपए की लागत से बने इस प्रोजेक्ट ने दिल्ली और गुरुग्राम के बीच कनेक्टिविटी को काफी बेहतर बनाया है।

बेंगलुरु-मैसूरु एक्सप्रेसवे दक्षिण भारत में बुनियादी ढांचे के एक अहम प्रोजेक्ट के तौर पर उभरा है। लगभग 8,480 करोड़ रुपए की लागत से बने और 118 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मार्च 2023 को किया था। इस प्रोजेक्ट ने बेंगलुरु और मैसूरु के बीच यात्रा के समय को लगभग तीन घंटे से घटाकर करीब 75 मिनट कर दिया है।

दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर इंजीनियरिंग का एक शानदार नमूना है, जो हाई-स्पीड, कुशल और पर्यावरण के अनुकूल नेशनल हाईवे नेटवर्क बनाने पर भारत के लगातार फोकस को दिखाता है। 12,000 करोड़ रुपए की लागत से बने 213 किलोमीटर लंबे छह-लेन वाले एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर का उद्घाटन प्रधानमंत्री ने 14 अप्रैल 2026 को किया था। इस कॉरिडोर ने दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा के समय को 6 घंटे से ज्यादा से घटाकर करीब 2.5 घंटे कर दिया है।

--आईएएनएस

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