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भारत की जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 2026-27 में 6.8-7.2 प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद: ईवाई रिपोर्ट

 

नई दिल्ली, 26 फरवरी (आईएएनएस)। भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर वित्त वर्ष 27 में 6.8 प्रतिशत से लेकर 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। इसकी वजह देश का बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते करना, अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए केंद्र द्वारा आर्थिक सुधारों को लागू करना है। यह जानकारी ईवाई की ताजा रिपोर्ट में दी गई।

ईवाई इंडिया के चीफ पॉलिसी एडवाइजर डीके श्रीवास्ताव ने कहा कि दुनिया के प्रमुख आर्थिक समूहों और अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत के द्विपक्षीय व्यापार समझौते से, देश के मध्यम अवधि में विकास की संभावनाएं बढ़ गई हैं।

विश्लेषण में कहा गया कि सरकार के दीर्घकालिक 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कर-से-जीडीपी अनुपात में निरंतर वृद्धि की आवश्यकता होगी, जो मुख्य रूप से नए संरचनात्मक सुधारों के बजाय मजबूत अनुपालन के माध्यम से होगा, क्योंकि अधिकांश प्रमुख कर सुधार पहले ही लागू किए जा चुके हैं।

ईवाई इकोनॉमी वॉच रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष में प्रमुख कर सुधार किए गए, विशेष रूप से व्यक्तिगत आयकर और जीएसटी ढांचे से संबंधित हैं। इन दोनों सुधारों का उद्देश्य परिवारों की व्यय योग्य आय को बढ़ाना था ताकि निजी उपभोग मांग को समर्थन मिल सके। हालांकि, इसका असर सरकार की आय पर भी पड़ा है, जिसके कारण यह वित्त वर्ष 2026 के बजट अनुमानों से कम रहने की आशंका है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आय में इस कमी की आशंका के बावजूद, सरकार से वित्त वर्ष 2026 के लिए बजट में निर्धारित राजकोषीय घाटे के लक्ष्य का पालन करने की व्यापक रूप से उम्मीद है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.3 प्रतिशत तक और कम करने का अनुमान लगाया है। सरकार आर्थिक विकास को स्थिरता के साथ सुनिश्चित करने के लिए राजकोषीय समेकन के पथ पर अग्रसर है।

1 फरवरी को अपने बजट भाषण में उन्होंने कहा कि सरकार ने 2025-26 के बजट में राजकोषीय घाटे को 4.4 प्रतिशत तक कम करने की अपनी प्रतिबद्धता पूरी कर ली है और अब राजकोषीय विवेक के पथ पर अग्रसर रहते हुए इसे और कम करके 4.3 प्रतिशत तक लाएगी।

उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य आर्थिक गति को बनाए रखने और सार्वजनिक वित्त को स्थिर रखने के बीच संतुलन को दर्शाता है। राजकोषीय घाटा सरकार के कुल व्यय और कुल राजस्व के बीच का अंतर होता है।

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार वित्त वर्ष 2027 में अपने राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए नियत प्रतिभूतियों से 11.7 लाख करोड़ रुपए का शुद्ध ऋण लेगी, जबकि सकल बाजार ऋण 17.2 लाख करोड़ रुपए आंका गया है।

--आईएएनएस

एबीएस/