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भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत ग्रोथ फेज में, बाजार दे सकते हैं बेहतर रिटर्न: रिपोर्ट

 

नई दिल्ली, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। एक नई रिपोर्ट में सोमवार को कहा गया कि भारत की अर्थव्यवस्था इस समय संरचनात्मक रूप से मजबूत और विस्तारवादी दौर में है, और अनुकूल वैल्यूएशन के चलते बाजार लंबी अवधि के औसत से बेहतर रिटर्न दे सकते हैं।

निवेश प्रबंधन कंपनी ओमनीसाइंस कैपिटल की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय 'गोल्डीलॉक्स फेज' में है, जहां वास्तविक सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) की वृद्धि दर 7-8 प्रतिशत के आसपास है और महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के तय दायरे में बनी हुई है।

सितंबर 2024 के उच्च स्तर से बाजार में करीब 13 प्रतिशत की हालिया गिरावट को सामान्य बताया गया है और इसे बेयर मार्केट यानी गिरावट का संकेत नहीं माना गया। निफ्टी 50 फिलहाल करीब 3 गुना प्राइस-टू-बुक और लगभग 20 गुना प्राइस-टू-अर्निंग्स पर ट्रेड कर रहा है, जो लंबी अवधि के औसत के आसपास या थोड़ा नीचे है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़े गिरावट के बाद बाजार को उबरने में औसतन 24 महीने लगते हैं, जिससे यह साफ होता है कि शेयर बाजार में निवेश के लिए 3 से 5 साल का नजरिया रखना बेहतर होता है।

रिपोर्ट के अनुसार, बैंकिंग सेक्टर अपनी अब तक की सबसे मजबूत स्थिति में है। ग्रॉस एनपीए घटकर 2-2.5 प्रतिशत पर आ गया है, जबकि करीब 17.2 प्रतिशत का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (सीआरएआर) बैंकों को बिना अतिरिक्त पूंजी के लगभग 94 लाख करोड़ रुपए तक कर्ज देने की क्षमता देता है।

आर्थिक ग्रोथ और क्रेडिट की स्थिति मजबूत बनी हुई है, जिससे पूरे वित्तीय सिस्टम को मजबूती मिल रही है और अर्थव्यवस्था के विस्तार को सहारा मिल रहा है।

विकास वी गुप्ता ने कहा कि कंपनियां बेहतर कैपिटल एफिशिएंसी के साथ काम कर रही हैं, कॉरपोरेट बैलेंस शीट मजबूत हैं, बैंक एनपीए 20 साल के निचले स्तर पर हैं और आरओए 20 साल के उच्च स्तर पर है। ऐसे में भारत की अर्थव्यवस्था कई वर्षों तक तेज ग्रोथ के लिए अनुकूल स्थिति में है।

उन्होंने यह भी कहा कि वित्त वर्ष 2026 में महंगाई 2-2.5 प्रतिशत के आसपास रहने का अनुमान है, जिससे अमेरिका-ईरान-इजरायल युद्ध के कारण ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी का असर भी सीमित रह सकता है।

रिपोर्ट में बताया गया कि 2010 के दशक की शुरुआत में जहां महंगाई दो अंकों के करीब थी, वहीं अब यह घटकर वित्त वर्ष 2026 में लगभग 2.1 प्रतिशत रह गई है। हालांकि, ईरान से जुड़े वैश्विक तनाव के कारण ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव से अल्पकालिक जोखिम बने रह सकते हैं।

--आईएएनएस

डीबीपी