भारत का डीपीआई मॉडल बना डिजिटल कूटनीति का प्रमुख स्तंभ, एआई के साथ बढ़ रही वैश्विक पहुंच: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)। भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) मॉडल अब केवल देश के भीतर डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग और डिजिटल कूटनीति का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम बनता जा रहा है।
एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपनी डिजिटल तकनीक और प्लेटफॉर्म के जरिए ग्लोबल साउथ के देशों के साथ सहयोग को मजबूत कर रहा है और खुद को डिजिटल गवर्नेंस तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के केंद्र में स्थापित कर रहा है।
ईस्ट एशिया फोरम की रिपोर्ट के मुताबिक, इस वर्ष आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट से पहले भारत ने 23 देशों के साथ डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
यह इस बात का संकेत है कि दुनिया भर में भारत के डिजिटल मॉडल को लेकर रुचि तेजी से बढ़ रही है। इस मॉडल में आधार, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई), डिजिलॉकर और नागरिकों को केंद्र में रखकर विकसित किए गए अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
भारत का यह डिजिटल ढांचा, जिसे आमतौर पर 'इंडिया स्टैक' कहा जाता है, डिजिटल पहचान, डिजिटल भुगतान, सरकारी सेवाओं की डिलीवरी और डेटा एक्सचेंज सिस्टम को एक साथ जोड़ता है, जिसके जरिए बड़े पैमाने पर सार्वजनिक सेवाएं कुशल और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराई जा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्लेटफॉर्मों की सफलता ने भारत की डिजिटल कूटनीति को नई ताकत दी है। खासकर वर्ष 2023 में जी20 की अध्यक्षता के दौरान भारत ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को वैश्विक एजेंडा का प्रमुख हिस्सा बनाया था, जिसके बाद कई देशों ने इसमें रुचि दिखाई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जैसे-जैसे देश अपनी डिजिटल संप्रभुता को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक डिजिटल सिस्टम विकसित करना चाहते हैं, भारत का डीपीआई मॉडल एक ऐसा समाधान बनकर उभर रहा है जिसे अलग-अलग अर्थव्यवस्थाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के अनुरूप अपनाया जा सकता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी स्केलेबिलिटी और इंटरऑपरेबिलिटी मानी जा रही है।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बीच बढ़ता तालमेल भी नए अवसर पैदा कर रहा है। नीति निर्माताओं का मानना है कि एआई-आधारित एप्लिकेशन सार्वजनिक सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने, बहुभाषी पहुंच सुनिश्चित करने और नागरिकों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
भारत की एआई रणनीति भी डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ एआई के व्यापक एकीकरण पर जोर देती है। इसमें 'भाषिणी' जैसे भाषा-आधारित प्लेटफॉर्म महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जिनका उद्देश्य विभिन्न भारतीय भाषाओं में डिजिटल सेवाओं को सुलभ बनाना है।
इंडिया स्टैक की नींव आधार परियोजना के माध्यम से रखी गई थी। शुरुआत में आधार का उद्देश्य सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचाना था। समय के साथ यह एक बड़े डिजिटल इकोसिस्टम में बदल गया, जिसने वित्तीय समावेशन, डिजिटल भुगतान और ई-गवर्नेंस सेवाओं को नई दिशा दी।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का डीपीआई मॉडल वैश्विक स्तर पर प्रभाव बढ़ाने में सफल रहा है, लेकिन डेटा गोपनीयता, डिजिटल गवर्नेंस और नियामकीय निगरानी जैसी चुनौतियों पर लगातार ध्यान देना होगा। एआई आधारित प्रणालियों के बढ़ते उपयोग के साथ इन मुद्दों का महत्व और बढ़ जाएगा।
विश्लेषकों के अनुसार, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के भविष्य के विस्तार के लिए डेटा सुरक्षा, पारदर्शिता, जवाबदेही और विभिन्न प्रणालियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना आवश्यक होगा। इससे नागरिकों का भरोसा कायम रहेगा और डिजिटल सेवाओं का लाभ व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंच सकेगा।
--आईएएनएस
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