भारतीय मसाले अमेरिकी घरों में 'भारतीयता का एक हिस्सा' पहुंचा रहेः राजदूत क्वात्रा
वॉशिंगटन, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा है कि भारतीय मसाले अमेरिकी घरों में 'भारतीयता का एक हिस्सा' पहुंचा रहे हैं क्योंकि इनकी लोकप्रियता अब केवल स्वाद तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि सेहत, वेलनेस और रोजमर्रा की खान-पान की आदतों तक भी फैल गई है।
क्वात्रा ने कहा कि अमेरिका में भारतीय मसालों की बढ़ती मौजूदगी एक ऐसे सांस्कृतिक जुड़ाव को दिखाती है जो उनके कमर्शियल महत्व से कहीं अधिक है।
इंडिया हाउस में भारतीय मसालों के सम्मान में आयोजित एक खास कार्यक्रम में क्वात्रा ने कहा, "मुझे लगता है कि मसाले सिर्फ व्यापार से कहीं ज्यादा हैं। मेरे निजी नजरिए से ज्यादा जरूरी बात यह है कि इन मसालों के जरिए हम अमेरिकी घरों तक भारतीयता का एक बहुत अहम हिस्सा पहुंचाते हैं।"
इस कार्यक्रम में अमेरिकन स्पाइस ट्रेड एसोसिएशन के सदस्य, फूड इंडस्ट्री के प्रतिनिधि और मेहमान भारतीय राजदूत के आवास पर इकट्ठा हुए। क्वात्रा ने मसालों को भारतीय सभ्यता की एक ऐसी अटूट कड़ी बताया जो आज के भारतीय घरों को हजारों साल पुरानी पीढ़ियों से जोड़ती है।
क्वात्रा ने कहा, "मैं हमेशा लोगों से कहता हूं और मेरा पक्का यकीन है कि अगर कोई एक चीज है जो हजारों साल पुरानी पीढ़ियों से भारतीय समाज में नहीं बदली है, तो वह हैं मसाले। मैं वही मसाला इस्तेमाल करता हूं जिसकी आदत मेरी मां ने मुझे डाली थी, उन्होंने वही मसाला इस्तेमाल किया जिसकी आदत उनकी मां ने उन्हें डाली थी, और यह कहानी पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रहती है।"
क्वात्रा ने कहा कि यह परंपरा अब भारत के बाहर भी अपनी जगह बना रही है। सबसे रोमांचक बात यह है कि इस विस्तार का नेटवर्क अब पूरी दुनिया में फैल गया है।
राजदूत ने हल्दी का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे भारतीय जीवन का एक अहम हिस्सा रही यह चीज अब आधुनिक अमेरिकी फूड कल्चर का हिस्सा बन गई है।
क्वात्रा ने 2010 से 2013 के बीच वॉशिंगटन में अपनी पिछली पोस्टिंग को याद करते हुए कहा कि उन्हें उस समय अमेरिकी कैफे में हल्दी वाला लट्टे देखने को नहीं मिला था।
उन्होंने कहा, "मुझे याद नहीं है कि मैं अमेरिका में किसी कैफे में गया होऊं और वहां हल्दी वाला लट्टे देखा हो। मुझे नहीं लगता कि यह कैफे के मेन्यू में शामिल था।"
क्वात्रा ने अमेरिकी कैफे में इसकी हालिया लोकप्रियता की तुलना भारत में सदियों से हल्दी के इस्तेमाल और आयुर्वेद में इसकी अहमियत से की। उन्होंने कहा कि पारंपरिक भारतीय व्यवस्था में हल्दी ने "बहुत ही अहम और महत्वपूर्ण भूमिका" निभाई है।
आईएएनएस के साथ एक अलग बातचीत में क्वात्रा ने कहा कि भारतीय मसालों का इतिहास हजारों साल पुराना है और अमेरिकी लोग इनसे तेजी से परिचित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा, "हमारे लिए सबसे खुशी की बात यह है कि पिछले कुछ सालों में हम न सिर्फ अमेरिकी घरों तक भारतीय मसाले पहुंचा पाए हैं, बल्कि अमेरिकी समाज को भारतीय मसालों के समग्र और स्वास्थ्य संबंधी फायदे के बारे में भी समझा पाए हैं। इसलिए, अमेरिकी समाज में भारतीय मसालों का इस्तेमाल या उनका प्रसार सिर्फ खाने के स्वाद तक ही सीमित नहीं है। असल में, यह जिंदगी का स्वाद है क्योंकि यह आपके शरीर और आपकी समग्र सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है।”
क्वात्रा ने कहा कि मकसद यह था कि भारतीय मसाले अमेरिकी खान-पान की आदतों में गहराई से शामिल हो जाएं।उन्होंने कहा, "सोच यह है कि भारतीय मसाले न सिर्फ अमेरिकी समाज में दूर-दूर तक फैलें बल्कि अमेरिकी खानपान की आदतों का भी हिस्सा बन जाएं।"
राजदूत ने मसालों में बढ़ती दिलचस्पी को खाने-पीने के एक और मौजूदा ट्रेंड, ऑर्गेनिक उत्पादों की बढ़ती लोकप्रियता से भी जोड़ा। उन्होंने तर्क दिया कि जिसे आज आधुनिक और सेहतमंद खान-पान कहा जाता है, उसकी जड़ें अक्सर पुराने खान-पान के तरीकों में होती हैं।
क्वात्रा ने कहा, "मेरा मतलब है, हम कहते हैं कि ऑर्गेनिक फूड आजकल बहुत ट्रेंड में है। असल में ऑर्गेनिक फूड तो पुराना खाना है और पुराना सेहतमंद खाना है। तो एक तरह से आधुनिक ट्रेंड अपनी जड़ों की ओर लौटना है, कम से कम इस मामले में तो। खाने और मसालों के मामले में तो निश्चित रूप से ऐसा ही है।"
क्वात्रा ने कहा कि ग्राहकों के साथ लंबे समय तक चलने वाला रिश्ता बनाने के लिए सिर्फ मसालों की मार्केटिंग काफी नहीं है। उनके इतिहास और खाने-पीने व जीवनशैली के साथ उनके रिश्ते को समझना जरूरी है।
उन्होंने कहा, "यह मेरी परवरिश का हिस्सा है। और मुझे नहीं लगता कि आप मसालों की मार्केटिंग उस तरह से कर सकते हैं।"
भारतीय मसाले सदियों से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचे हैं। दुनिया के दूसरे देशों के साथ भारत के ऐतिहासिक व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों में इन्होंने अहम भूमिका निभाई है। हल्दी, जीरा, मिर्च, सौंफ और काली मिर्च जैसे मसाले भारत के अलग-अलग इलाकों में खाना पकाने में मुख्य भूमिका निभाती हैं।
भारतीय खाने और भारतीय मूल की खानपान की परंपराओं के बारे में जानकारी बढ़ने के साथ-साथ अमेरिका में भी इनकी पहचान बढ़ी है। हल्दी जैसी चीजों से बने उत्पाद और ड्रिंक्स अब सिर्फ खास भारतीय दुकानों तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि ये अमेरिका के बड़े फ़ूड और वेलनेस मार्केट में भी तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं।
--आईएएनएस
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