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भारतीय मुसलमानों को अपना राजनीतिक नेतृत्व विकसित करना होगाः ओवैसी

 

हैदराबाद, 5 मई (आईएएनएस)। एआईएमआईएम अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार को कहा कि भारत में मुसलमानों को तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दलों के लिए मात्र मतदाता बनने के बजाय, अधिकारों के साथ नागरिक बनने के लिए अपना स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व विकसित करना चाहिए।

हैदराबाद के सांसद ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, "मैं फिर से दोहराना चाहता हूं कि मुसलमानों को अपना स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व बनाने की कोशिश करनी चाहिए। आपका वोट व्यर्थ जा रहा है, क्योंकि आप उन तथाकथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियों को वोट दे रहे हैं जो धर्मनिरपेक्ष नहीं हैं। वे भाजपा को रोकने में नाकाम रहे।"

ओवैसी ने आगे कहा, "इतने सालों तक तथाकथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियों पर भरोसा करने से न तो उन्हें कोई विकास मिला है और न ही अन्याय और भेदभाव खत्म हुआ है। उन्हें (समुदाय को) अपने वोट की कीमत के बारे में सोचना चाहिए। आपने महाराष्ट्र, बिहार, दिल्ली और पश्चिम बंगाल में उन्हें वोट दिया, लेकिन भाजपा इन सभी राज्यों में जीत गई। ये तथाकथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियां भाजपा को रोक नहीं पाई हैं। हमने इसे पहले भी देखा है। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल ने नरम हिंदुत्व का सहारा लिया। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की पार्टी ने भी ऐसा ही किया और कुछ हद तक पूर्ववर्ती राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने भी यही किया। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस का भी यही रवैया रहा है।"

एआईएमआईएम अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया और 15 साल सत्ता में रहने के बावजूद उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कुछ नहीं किया।

ओवैसी ने कहा कि पश्चिम बंगाल देश का एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां 60 विधानसभा क्षेत्रों में मुसलमान बहुसंख्यक हैं, जबकि 20 अन्य क्षेत्रों में मुसलमान 30-40 प्रतिशत हैं, फिर भी भाजपा वहां जीत गई।

पश्चिम बंगाल की जनता द्वारा भाजपा को सत्ता सौंपे जाने की बात कहते हुए ओवैसी ने उम्मीद जताई कि भाजपा सरकार समाज के हर वर्ग के लिए काम करेगी और मुसलमानों के हाशिए पर जाने को रोकेगी। उनका मानना ​​है कि तृणमूल की हार के कई कारण हैं। इसका एक कारण एसआईआर है। सत्ता विरोधी लहर बहुत तीव्र थी, व्यापक भ्रष्टाचार था और मुस्लिम समुदाय का बड़े पैमाने पर शोषण हुआ था।

ओवैसी ने कहा कि पश्चिम बंगाल के बाहर बनर्जी की छवि एक बेहद उदार और धर्मनिरपेक्ष नेता के रूप में पूरी तरह गलत है। उन्होंने मुसलमानों का इस्तेमाल सिर्फ वोट बैंक के तौर पर किया है। मुसलमानों को नागरिक नहीं माना।

ओवैसी ने याद दिलाया कि 1998 में पश्चिम बंगाल से भाजपा के पहले सांसद तपन सिकदर थे, जिन्हें तृणमूल का समर्थन प्राप्त था और उन्होंने 1999 में फिर से जीत हासिल की। ​​ममता बनर्जी (प्रधानमंत्री अटल बिहारी) वाजपेयी सरकार में रेल मंत्री थीं। उन्होंने सरकार छोड़ी और फिर से उसमें शामिल हो गईं। उद्धव ठाकरे और आम आदमी पार्टी के साथ भी यही हाल है। अब समय आ गया है कि मुसलमान एकजुट हों और अपना राजनीतिक नेतृत्व तैयार करें। कम से कम आपके पास हाशिए पर धकेले जाने के खिलाफ आवाज उठाने के लिए एक प्रतिनिधि होगा, अन्याय के खिलाफ बोलने के लिए एक राजनीतिक प्रतिनिधि होगा और चुने हुए विधायक, सांसद और पार्षद अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों के विकास के लिए काम करेंगे।

एआईएमआईएम प्रमुख ने पश्चिम बंगाल के मतदाताओं को अपनी पार्टी के 11 उम्मीदवारों के पक्ष में वोट देने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, "दुर्भाग्यवश, हमारे उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत सके, लेकिन मैं मतदान करने के लिए उनका आभारी हूं, खासकर कंडी में, जहां हमारे उम्मीदवार को अच्छे खासे वोट मिले।"

ओवैसी ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल के विशेषकर मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे क्षेत्रों में एआईएमआईएम का भविष्य उज्ज्वल है। पार्टी कड़ी मेहनत करेगी और अपनी गलतियों को सुधारेगी।

असम के नतीजों पर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने लगभग 50,000 मुसलमानों को विस्थापित किया, फिर भी वे चुनाव जीतने में कामयाब रहे।

उन्होंने कहा, "हमने एक ही आवाज सुनी। हम कांग्रेस नेता गौरव गोगोई और उनकी पार्टी को वोट देंगे। नतीजा यह हुआ कि भाजपा जीत गई। अगर बदरुद्दीन अजमल की एआईयूडीएफ को और विधायक मिलते तो असम के मुसलमानों को और मजबूत आवाज मिल सकती थी।"

एसआईआर के मुद्दे पर ओवैसी ने सवाल उठाया कि बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में जिन लोगों के वोट रद्द कर दिए गए थे, उनकी मदद क्यों नहीं की। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट जाना सिर्फ दिखावा है। सांसद ने कहा कि बनर्जी और डीएमके नेता एम. के. स्टालिन, दोनों के निर्वाचन क्षेत्रों में एसआईआर लागू किया गया था और दोनों चुनाव हार गए। उन्होंने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को एसआईआर को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी। ओवैसी ने एसआईआर को नागरिकता से जोड़ने का कड़ा विरोध किया, लेकिन लोगों से सतर्क रहने और 2002 की मतदाता सूची से मिलान सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

--आईएएनएस

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