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भारतीय नागरिक आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते लौट रहे स्वदेश: एमईए

 

नई दिल्ली, 19 मार्च (आईएएनएस)। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने गुरुवार को कहा कि ईरान में फंसे करीब 882 भारतीय नागरिक, जिनमें छात्र, व्यवसायी और तीर्थयात्री शामिल हैं, अजरबैजान और आर्मेनिया के रास्ते अपने घर वापस आ रहे हैं। कई लोग पहले ही पहुंच चुके हैं। एमईए ने खाड़ी देशों के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों को भी गलत बताया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा, “कई लोगों ने खुद को दूतावास में रजिस्टर नहीं कराया है। इसलिए, हमारा अंदाजा था कि 9,000 लोग थे। इनमें से, लड़ाई शुरू होने से पहले काफी संख्या में छात्र लौट आए थे। अभी, लगभग 882 भारतीय नागरिक, जिनमें छात्र और व्यवसाय करने वाले लोगों के साथ-साथ यहां से यात्रा करने वाले तीर्थयात्री भी शामिल हैं, अजरबैजान और आर्मेनिया के रास्तों से लौटने की प्रक्रिया में हैं। कुछ पहले ही पहुंच चुके हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “वहां यात्रा करने वाले 284 तीर्थयात्रियों में से 280 लौट आए हैं; वे आर्मेनिया के रास्ते आए थे। तीन या चार और बचे हैं, जिनके भी एक या दो दिन में पहुंचने की उम्मीद है।”

जायसवाल ने बताया कि 772 लोग घर लौटने के लिए ईरानी जमीनी बॉर्डर पार करके आर्मेनिया चले गए, जबकि अजरबैजान के रास्ते पर गतिविधी धीमी धीमी है, 110 भारतीय नागरिकों में से कुछ अभी लौटने वाले हैं और कुछ पहले ही भारत वापस आ चुके हैं।

पिछले हफ्ते, ईरान में भारतीय नागरिकों को दी जा रही मदद के बारे में बताते हुए, जायसवाल ने कहा था कि कई नागरिक घर लौट आए हैं, जबकि जो लोग स्वदेश लौटने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए मदद जारी है।

मंत्रालय ने ईरान छोड़ने की इच्छा रखने वाले भारतीय नागरिकों से तेहरान में भारतीय दूतावास द्वारा जारी की गई सलाह का पालन करने का आग्रह किया था।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कहा, "भारत ने पहले भी इस क्षेत्र में ऊर्जा अवसंरचना सहित नागरिक अवसंरचना को निशाना बनाने से बचने का आह्वान किया था। इस क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हाल ही में हुए हमले अत्यंत चिंताजनक हैं और ये पूरी दुनिया के लिए पहले से ही अनिश्चित ऊर्जा परिदृश्य को और अधिक अस्थिर कर रहे हैं। ऐसे हमले अस्वीकार्य हैं और इन्हें बंद किया जाना चाहिए।"

--आईएएनएस

केआर/