भारतीय-अमेरिकी लॉमेकर्स ने एच-1बी वीजा में बड़े बदलाव की मांग की
वॉशिंगटन, 30 सितंबर (आईएएनएस)। दो भारतीय-अमेरिकी लॉमेकर्स ने एक ऐसे कानून का समर्थन किया है, जिससे एच-1बी प्रोफेशनल्स और कई अन्य वर्गों के विदेशी वर्कर्स को अमेरिका छोड़े बिना अपने वीजा रिन्यू कराने की इजाजत मिल सकेगी।
प्रतिनिधि सुहास सुब्रमण्यम और राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि देश के अंदर वीज़ा रिन्यूअल (नवीनीकरण) से कर्मचारियों, परिवारों और नियोक्ताओं को होने वाली परेशानी कम होगी। इससे विदेशों में तैनात अमेरिकी कांसुलर अधिकारी नए वीजा आवेदनों और विदेश नीति से जुड़े अन्य कामों पर ध्यान दे सकेंगे।
यह प्रस्ताव वर्जीनिया का प्रतिनिधित्व करने वाले डेमोक्रेट सुब्रमण्यम द्वारा घोषित तीन-बिल वाले पैकेज का हिस्सा है। इन उपायों का मकसद वीज़ा-प्रक्रिया के लंबित मामलों को कम करना, इमिग्रेशन सिस्टम को आधुनिक बनाना और विदेश में आपातकालीन स्थितियों में फंसे अमेरिकियों की मदद के लिए अमेरिकी प्रतिक्रिया को मजबूत करना है।
'डोमेस्टिक वीजा रिन्यूअल मॉडर्नाइजेशन एक्ट' 2024 के उस पायलट प्रोग्राम का विस्तार करेगा जिसके तहत कुछ एच-1बी वीजा धारकों को अमेरिका के भीतर ही अपने वीजा स्टैम्प को रिन्यू करने की अनुमति दी गई थी।
यह बिल एच-1बी, एच-1बी1, ई, आई, एल, ओ और पी वीजा धारकों के लिए देश के भीतर रिन्यूअल की सुविधा उपलब्ध कराएगा। इन श्रेणियों में कुशल पेशेवर, मल्टीनेशनल कंपनियों के भीतर ट्रांसफर होने वाले एग्जीक्यूटिव, निवेशक, पत्रकार, एथलीट, एंटरटेनर और असाधारण क्षमता वाले लोग शामिल हैं।
वीजा धारकों को नया वीजा स्टैम्प पाने के लिए आम तौर पर विदेश में अमेरिकी दूतावास या कॉन्सुलेट जाना पड़ता है। अपॉइंटमेंट मिलने में देरी की वजह से वर्कर देश के बाहर फंस सकते हैं और अपनी नौकरी और परिवार से दूर हो सकते हैं।
कृष्णमूर्ति ने कहा, "जो लोग पहले से ही कानूनी तौर पर अमेरिका में रह रहे हैं और काम कर रहे हैं, उन्हें सिर्फ अपना वीजा रिन्यू कराने के लिए देश छोड़ने पर मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।"
उन्होंने कहा, "हमारा 'डोमेस्टिक वीजा रिन्यूअल मॉडर्नाइजेशन एक्ट' गैर-जरूरी कागजी कार्यवाही को कम करेगा, वर्कर और एम्प्लॉयर को ज़्यादा भरोसा देगा और यह सुनिश्चित करने में मदद करेगा कि अमेरिका दुनिया भर से टैलेंटेड लोगों को आकर्षित करने और उन्हें बनाए रखने में कॉम्पिटिटिव बना रहे।"
कृष्णमूर्ति और रिपब्लिकन रिप्रेजेंटेटिव डॉन बेकन, सुब्रमण्यम के साथ मिलकर इस कानून को आगे बढ़ा रहे हैं। डेमोक्रेटिक रिप्रेजेंटेटिव जोनाथन जैक्सन और डेबरा रॉस इसके को-स्पॉन्सर हैं।
एक दूसरा बिल, 'रिड्यूसिंग वीजा डिलेज एक्ट', स्टेट डिपार्टमेंट से यह जांचने के लिए कहेगा कि क्या अमेरिकी दूतावासों और कॉन्सुलेट में अपॉइंटमेंट और प्रक्रिया में देरी को कम करने के लिए पर्याप्त स्टाफ है।
इसके तहत ट्रंप प्रशासन द्वारा लागू की गई वीजा-वेटिंग पॉलिसी की समीक्षा भी करनी होगी। पारदर्शिता के अतिरिक्त प्रावधान आवेदकों को उस पूरे प्रतीक्षा अवधि के बारे में साफ जानकारी देंगे, जिसका उन्हें सामना करना पड़ता है।
सुब्रमण्यम ने कहा, "मेरे क्षेत्र के लोगों को रोजाना लंबे समय तक वीजा में देरी के नतीजों का सामना करना पड़ता है। अपॉइंटमेंट बैकलॉग और प्रक्रिया में देरी से परिवार और नौकरी पर असर पड़ता है। हमें इन समस्याओं को हल करने की जरूरत है।"
तीसरा बिल, 'स्ट्रेंथनिंग इमरजेंसी रिस्पॉन्स एक्ट,' विदेशों में संघर्ष और प्राकृतिक आपदाओं में फंसे अमेरिकियों की मदद से जुड़ा है।
इसके तहत स्टेट डिपार्टमेंट को हर इमरजेंसी निकासी के बाद अपने निकासी प्लान को अपडेट करना होगा। डिपार्टमेंट इस बात की भी समीक्षा करेगा कि निकासी में मदद चाहने वाले लोगों तक जानकारी कैसे पहुंचाई जाती है।
इस प्रस्ताव के तहत स्टेट डिपार्टमेंट को विदेशों में बड़ी आपदाओं से प्रभावित अमेरिकियों के करीबी रिश्तेदारों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखना होगा।
सुब्रमण्यम ने कहा कि उनके क्षेत्र के लोगों ने बताया था कि ईरान युद्ध की शुरुआत में मिडिल ईस्ट से निकलने की कोशिश करते समय उन्हें पर्याप्त जानकारी नहीं मिली थी। नेपाल में अगस्त में आई बाढ़ के बाद भी परिवारों ने बेहतर बातचीत की मांग की थी।
उन्होंने कहा, "ईरान युद्ध की शुरुआत में, मेरे क्षेत्र के लोग मिडिल ईस्ट में फंसे हुए थे और उन्हें बहुत कम जानकारी मिली थी, साथ ही कोई पहले से सूचना भी नहीं दी गई थी। विदेशों में आपदाओं से प्रभावित लोगों के परिवारों के साथ करीबी बातचीत करना भी बहुत जरूरी है।"
--आईएएनएस
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