रूसी तेल आयात पर अमेरिकी बिल से भारत-अमेरिका संबंधों में आ सकता है खिंचाव
वॉशिंगटन, 11 जनवरी (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बीते कुछ समय से उन देशों को लगातार निशाने पर ले रहे हैं जो रूस के साथ तेल व्यापार कर रहे हैं। इस बीच एक जाने-माने भारतीय अमेरिकी रिपब्लिकन ने रविवार को चेतावनी दी कि रूस से तेल आयात करने वाले देशों को टारगेट करने वाला प्रस्तावित अमेरिकी कानून भारत के साथ उसके संबंधों में खिंचाव ला सकता है।
अमेरिकन कारोबारी ने आगाह किया कि इस कदम का समय और पैमाना नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच चल रही व्यापार बातचीत को कमजोर कर सकता है।
ग्रेटर डलास इंडो अमेरिकन चैंबर के फाउंडर चेयरमैन अशोक मागो ने आईएएनएस से खास बातचीत की। ग्रेटर डलास इंडो अमेरिकन चैंबर को अब यूएस-इंडिया चैंबर ऑफ कॉमर्स के नाम से जाना जाता है।
उन्होंने आईएएनएस से कहा कि यह कदम जब दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच टैरिफ को लेकर बातचीत चल रही है, तब बहुत मददगार नहीं है। मागो ने तर्क दिया कि सीनेटरों को दबाव बढ़ाने से पहले बातचीत को नतीजे पर पहुंचने देना चाहिए।
मागो ने कहा, "भारत पर 500 फीसदी टैरिफ बहुत अच्छा विचार नहीं है।" उन्होंने रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा लाए जा रहे रूसी प्रतिबंध बिल के प्रावधान का जिक्र किया। यह बिल अमेरिकी राष्ट्रपति को ड्यूटी में तेजी से बढ़ोतरी करने का अधिकार देगा।
इस हफ्ते की शुरुआत में ग्राहम ने ट्रंप के समर्थन का दावा करते हुए कहा, "उन्होंने दोनों पार्टियों के 'रशिया सैंक्शन्स बिल' को हरी झंडी दे दी है। यह सही समय पर होगा, क्योंकि यूक्रेन शांति के लिए रियायतें दे रहा है और पुतिन सिर्फ बातें कर रहे हैं, बेगुनाहों को मार रहे हैं।"
दक्षिणी कैरोलिना के सीनेटर ने कहा, "यह बिल राष्ट्रपति ट्रंप को उन देशों को सजा देने की इजाजत देगा जो सस्ता रूसी तेल खरीदते हैं, जिससे पुतिन की वॉर मशीन को ईंधन मिलता है। इससे चीन, इंडिया और ब्राजील जैसे देशों के खिलाफ जबरदस्त फायदा होगा। वे सस्ता रूसी तेल खरीदना बंद कर देंगे, जिससे पुतिन को यूक्रेन के खिलाफ खून-खराबे के लिए पैसे मिलते हैं।"
ग्राहम के इस बयान पर अशोक मागो ने आईएएनएस के जरिए चेतावनी दी कि इतने बड़े टैरिफ का असर सीधे भारतीय अमेरिकी समुदाय पर पड़ेगा। मागो ने कहा, “अमेरिका में रहने वाले सभी भारतीय अमेरिकियों को अपने किचन में रोज इस्तेमाल होने वाले सामान जो भारत से आयात होता है, के लिए बहुत ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी।”
अशोक मागो ने भारत-अमेरिका के बीच असैन्य परमाणु समझौते में अहम भूमिका निभाई थी। उन्हें दोनों देशों के संबंधों में उनके योगदान के लिए 2014 में प्रतिष्ठित पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उन्होंने बातचीत से काम करने की अपील करते हुए कहा, “वॉशिंगटन और दिल्ली को आपसी फायदे वाले टैरिफ प्रोग्राम पर काम चाहिए, जो दोनों देशों के लिए अच्छा है क्योंकि दोनों देश दुनिया के सबसे बड़े और पुराने लोकतंत्र हैं और उन्हें मिलकर काम करने की जरूरत है।”
उन्होंने आगे कहा, “उन्हें इस जगह पर नहीं होना चाहिए जहां हम आज हैं।” प्रवासियों के योगदान पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय अमेरिकियों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बहुत ज्यादा निवेश किया हुआ है।
अशोक मागो ने कहा, “भारतीय अमेरिकी इस देश से प्यार करते हैं और वे अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ा योगदान दे रहे हैं, चाहे वह तकनीक हो, मेडिसिन हो या दूसरे व्यवसाय। हमारे कई सदस्यों को व्यापार में नुकसान हो रहा है।”
इसके साथ ही अशोक मागो ने संयम बरतने की अपील करते हुए कहा, “सीनेटर से मेरी अपील है कि वे इस स्टेज पर इस बिल को पेश न करें। अगर अगले कुछ हफ्तों में चीजें ठीक नहीं होती हैं, तो उनके पास ऐसा करने का हमेशा एक और मौका होता है। पहले, आइए सभी मुमकिन रास्ते देखें ताकि हर कोई खुश हो कि उन्हें सही डील मिल रही है।”
हाउडी मोदी इवेंट को याद करते हुए अशोक मागो ने कहा, “ऐसा लगा कि स्टेज पर दो दोस्त हैं और वे सभी देशों की बेहतरी के लिए मिलकर काम करना चाहते हैं। दोनों नेता दोनों देशों को वापस वहीं ले जाने के तरीके ढूंढ लेंगे जहां वे पहले हुआ करते थे।”
मागो ने भारत की आबादी और अमेरिका की वैश्विक अर्थव्यवस्था और सैन्य भूमिका की ओर इशारा करते हुए कहा, “मैं सोच भी नहीं सकता कि ये दोनों देश इस दुनिया में शांति के लिए मिलकर काम नहीं करेंगे। भारतीय अमेरिकियों को उम्मीद है कि मुद्दे बातचीत से हल होंगे, जहां दोनों देशों की अर्थव्यवस्था बढ़ती रहेगी।”
--आईएएनएस
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