भारत आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करेगा: संयुक्त राष्ट्र में जयशंकर
संयुक्त राष्ट्र, 26 सितंबर (आईएएनएस)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अपने अधिकार का प्रयोग करेगा। उन्होंने एक दिन पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक अज्ञात देश पर तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया।
जयशंकर ने आम बहस में कहा कि कल, लगातार आतंकवाद की गतिविधियों में शामिल रहने वाले एक व्यक्ति ने इस महासभा के समक्ष तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया। आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अपने अधिकार का प्रयोग किया जाएगा।
उन्होंने अपने बयान में देश का नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को सामान्य बनाने और इसके परिणामों से छूट का दावा करने के तर्क दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह स्वीकार्य नहीं है।
जयशंकर ने सीमा पार उद्देश्य से राज्य प्रायोजित आतंकवाद को वैश्विक व्यवस्था के लिए एक सीधी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों में शामिल सरकारों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और आतंकवाद के वित्तपोषण को उजागर करके उसका मुकाबला किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दोस्ती और सद्भावना आतंकवाद के साथ नहीं रह सकते। उन्होंने आगे कहा कि आतंकवाद के अपराधियों को अपना तरीका बदलना होगा। उन्होंने आतंकवाद के प्रति 'जीरो टोलरेंस' की नीति जारी रखने का आह्वान किया। यह चेतावनी शांति, विकास और गरीब देशों पर पड़ रहे दबावों पर दिए गए उनके व्यापक भाषण का एक हिस्सा थी।
जयशंकर ने कहा कि दुनिया वित्त और बाजार पहुंच से लेकर आपूर्ति श्रृंखलाओं और प्रौद्योगिकी तक, हर चीज के 'हथियारीकरण' का सामना कर रही है।
उन्होंने कहा कि देश जोखिम कम करके और अपने संबंधों में विविधता लाकर इसका जवाब दे रहे हैं। लेकिन व्यापक माहौल में विश्वास और सद्भावना कम हो रही है।
उन्होंने वैश्विक दक्षिण के सामने 'फॉर एफ' संकट का वर्णन किया: फूड, फ्यूल, फर्टिलाइजर और फाइनेंस की सुरक्षा। उन्होंने कहा कि सुपर एल नीनो, उर्वरक की कमी और अनाज की आवाजाही में बाधाएं चिंता का विषय हैं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि गैर-बाजार प्रथाएं और सीमित बाजार पहुंच विकासशील देशों की औद्योगीकरण की क्षमता को कमजोर कर रही हैं।
जयशंकर ने कहा कि भारत की वृद्धि और सार्वजनिक सेवाओं ने मानवता के छठे हिस्से के लिए बेहतर संभावनाएं पैदा की हैं। उन्होंने सामाजिक और आर्थिक लाभ पहुंचाने के साधन के रूप में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की ओर इशारा किया और कहा कि भारत विदेशों में अपने साझेदारों के साथ अपना अनुभव साझा कर रहा है।
उन्होंने अवसंरचना, विनिर्माण, कृषि, सूचना प्रौद्योगिकी और क्षमता निर्माण सहित 78 देशों में चल रही 600 प्रमुख भारतीय विकास परियोजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अफ्रीकी देश और छोटे द्वीपीय विकासशील राज्य भारत के पसंदीदा साझेदार रहे हैं।
जयशंकर ने कहा कि भारत ने संघर्ष क्षेत्रों और महामारी या प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित स्थानों पर चिकित्सा सामग्री भेजी है। उन्होंने नेपाल में आई भीषण बाढ़ और वेनेजुएला में आए भूकंप का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने समय रहते सहायता प्रदान की।
--आईएएनएस
एमएस/डीकेपी