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भारत-अमेरिका व्यापार समझौता लगभग अंतिम चरण में, वरीयता प्राप्त बाजार पहुंच के ढांचे पर काम जारी: वाणिज्य सचिव

 

मुंबई, 9 सितंबर (आईएएनएस)। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता अब लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका है। केंद्रीय वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बुधवार को कहा कि दोनों देश समझौते के अधिकांश हिस्सों पर सहमति बना चुके हैं और अब एक ऐसे ढांचे पर काम कर रहे हैं, जो दोनों पक्षों को एक-दूसरे के बाजारों में वरीयता प्राप्त पहुंच (प्रेफरेंशियल मार्केट एक्सेस) उपलब्ध करा सके। उन्होंने संकेत दिया कि कुछ मुद्दों पर बातचीत अभी जारी है, लेकिन वार्ताएं उन्नत स्तर पर पहुंच चुकी हैं।

मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 के दौरान मीडिया से बातचीत में अग्रवाल ने कहा कि दोनों देशों के बीच कुछ विषयों पर अभी भी चर्चा चल रही है, लेकिन समझौते को उचित समय पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षरित किया जाएगा। उन्होंने कहा, "कुछ मुद्दे ऐसे हैं जिन पर दोनों पक्ष बातचीत कर रहे हैं, लेकिन समझौते पर उचित समय पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।"

वाणिज्य सचिव ने बताया कि सबसे महत्वपूर्ण कार्य ऐसा तंत्र विकसित करना है जिससे भारत और अमेरिका एक-दूसरे को वरीयता प्राप्त बाजार पहुंच प्रदान कर सकें।

उन्होंने कहा कि भारत मुख्य रूप से मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) शुल्क व्यवस्था के तहत काम करता है, जबकि अमेरिका वर्तमान में कार्यकारी शुल्क (एक्जीक्यूटिव टैरिफ) प्रणाली का उपयोग कर रहा है। इसलिए दोनों देशों के बीच ऐसा ढांचा तैयार किया जा रहा है, जो शुल्कों में अंतर पैदा कर भारतीय और अमेरिकी व्यवसायों को विशेष लाभ प्रदान कर सके।

राजेश अग्रवाल ने कहा कि दोनों देशों के कारोबारी समुदायों के बीच संवाद पहले से ही सक्रिय है और उद्योग जगत सरकारों के बीच बनी व्यापक समझ से संतुष्ट दिखाई देता है। उनका मानना है कि समझौता लागू होने के बाद व्यापार और निवेश संबंधों को नई गति मिल सकती है।

भारत के अन्य व्यापार समझौतों पर जानकारी देते हुए केंद्रीय वाणिज्य सचिव ने कहा कि भारत-चिली मुक्त व्यापार समझौता अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। हालांकि कुछ विषयों पर बातचीत जारी है, लेकिन अगले दो से तीन महीनों में महत्वपूर्ण प्रगति की उम्मीद की जा रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र भारत-न्यूजीलैंड एफटीए को जल्द से जल्द लागू करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा, "अक्टूबर के आसपास इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति देखने को मिल सकती है।"

वैश्विक स्तर पर बढ़ती माल ढुलाई लागत और इसका निर्यातकों पर पड़ रहे प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर अग्रवाल ने कहा कि सरकार निर्यातकों के साथ मिलकर काम कर रही है, ताकि उन्हें जहाजों और कंटेनरों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। साथ ही माल ढुलाई में होने वाली देरी और लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने के प्रयास भी जारी हैं।

उन्होंने बताया कि बढ़ी हुई मालभाड़ा लागत के बावजूद चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में भारत का निर्यात 15 प्रतिशत से अधिक बढ़ा है। इससे संकेत मिलता है कि अब तक ऊंची शिपिंग लागत का प्रभाव उतना गंभीर नहीं रहा है, जितनी आशंका पहले जताई जा रही थी।

वाणिज्य सचिव ने आगे कहा कि भारत को लंबे समय तक निर्यात वृद्धि बनाए रखने के लिए सेवा क्षेत्र के निर्यात में विविधता लानी होगी। वर्तमान में भारत के सेवा निर्यात का बड़ा हिस्सा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), आईटी सक्षम सेवाएं (आईटीईएस) और पेशेवर सेवाओं पर निर्भर है।

उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल निर्यात लगभग 863 अरब डॉलर रहा, जिसमें से 421 अरब डॉलर का योगदान सेवा क्षेत्र से आया। हालांकि सेवा निर्यात में आईटी और आईटीईएस का हिस्सा लगभग आधा है, जबकि पेशेवर सेवाएं करीब 30 प्रतिशत योगदान देती हैं।

अग्रवाल ने कहा, "फिलहाल हमारी सेवा निर्यात व्यवस्था मुख्य रूप से इन दो स्तंभों पर आधारित है, लेकिन यदि हमें दीर्घकालिक और टिकाऊ वृद्धि हासिल करनी है तो इसमें विविधता लानी होगी।"

--आईएएनएस

डीबीपी