भारत-अमेरिका व्यापार समझौता द्विपक्षीय व्यापार को महत्वपूर्ण बढ़ावा दे सकता है: टीसीसी प्रमुख
नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। व्यापार एवं आर्थिक परिषद के अध्यक्ष जॉन कावुलिच ने मंगलवार को कहा कि भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौता द्विपक्षीय व्यापार को काफी हद तक बढ़ा सकता है। हालांकि कई मुद्दों पर मतभेदों को सुलझाने में बातचीत लंबी खिंच सकती है।
आईएएनएस से बात करते हुए कावुलिच ने कहा कि दोनों देशों ने संकेत दिया है कि वे समझौते के करीब पहुंच रहे हैं, लेकिन उनके राजनयिक बयानों से यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि वास्तव में कितनी प्रगति हुई है।
उन्होंने कहा कि दोनों देश संकेत दे रहे हैं कि वे एक-दूसरे के करीब हैं, लेकिन वे कूटनीतिक भाषा में बात कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि दोनों पक्षों ने प्रमुख विवादित मुद्दों को सुलझा लिया है या अन्य क्षेत्रों पर समझौतों की घोषणा करने के लिए उन्हें दरकिनार कर देंगे।
कावुलिच ने कहा कि दोनों देशों के लिए व्यापार समझौता महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके आर्थिक संबंध व्यापक हैं और द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने की क्षमता रखते हैं।
हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार से संबंधित मुद्दों की व्यापकता के कारण एक व्यापक समझौते को शीघ्रता से पूरा करना मुश्किल हो सकता है।
उन्होंने कहा कि व्यापक स्तर पर बातचीत अक्सर आसानी से आगे बढ़ती है, लेकिन विशिष्ट प्रावधानों पर आम सहमति तक पहुंचना काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। शुरुआती दौर में पक्षकार समझौते के करीब दिखाई दे सकते हैं, लेकिन जब बातचीत बारीकियों की ओर बढ़ती है तो पता चलता है कि महत्वपूर्ण मतभेद अभी भी मौजूद हैं।
कावुलिच ने भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापक व्यापार समझौते तक पहुंचने की जटिलता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह कहना मुश्किल है कि वे हर बात पर सहमत हो पाएंगे या नहीं।
भारत द्वारा रूसी तेल के आयात के मुद्दे पर कावुलिच ने कहा कि यह मुद्दा एक राजनीतिक चिंता का विषय बन गया है, खासकर इसलिए क्योंकि भारतीय कंपनियां रूसी कच्चे तेल का आयात करती हैं।
हालांकि, उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए इस मुद्दे के राजनीतिक निहितार्थ अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों, अन्य अमेरिकी राजनीतिक हस्तियों, गैर-सरकारी संगठनों, यूक्रेन और यूरोपीय संघ के लिए अलग हैं।
कावुलिच ने कहा कि रूसी तेल आयात इन समूहों की आलोचना को आकर्षित कर सकता है, लेकिन ऊर्जा की वहनीयता देशों और व्यवसायों के लिए एक महत्वपूर्ण विचारणीय विषय बनी हुई है।
--आईएएनएस
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