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वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत, लेकिन भविष्य पर जोखिम: सीईए वी. अनंत नागेश्वरन

 

वॉशिंगटन, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी हुई है, लेकिन बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताएं आने वाले महीनों में भविष्य की दिशा पर असर डाल सकती हैं। यह बात मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने बुधवार को कही।

उन्होंने यूएस-इंडिया इकोनॉमिक फोरम 2026 में कहा कि भारत ने हाल के वर्षों में अच्छी ग्रोथ बनाए रखी है, लेकिन बाहरी जोखिम अब और बढ़ गए हैं।

उन्होंने कहा क‍ि हमें उस व्यापक अनिश्चितता को कम नहीं आंकना चाहिए जो आज के समय में मौजूद है, और उन्होंने इसका जिक्र वैश्विक संघर्ष और आर्थिक अस्थिरता के संदर्भ में किया।

भारत की जीडीपी ग्रोथ वित्त वर्ष 2026 मार्च तक के लिए 7.6 प्रतिशत अनुमानित है। यह कोविड के बाद लगातार सात प्रतिशत से ज्यादा ग्रोथ का सिलसिला जारी रखे हुए है।

उन्होंने कहा क‍ि कोविड के बाद भारत ने लगातार सात प्र‍त‍िशत से ज्यादा वास्तविक जीडीपी ग्रोथ हासिल की है, जो उस दुनिया में बहुत बड़ी उपलब्धि है, जहां ग्रोथ कम होती जा रही है।

उन्होंने यह भी बताया कि नए वित्त वर्ष की शुरुआत में भी आर्थिक गति मजबूत बनी हुई है। कृषि, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर तीनों अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।

नागेश्वरन ने यह भी कहा कि पिछले कुछ हफ्तों में वैश्विक माहौल काफी बदल गया है। 28 फरवरी की सुबह के बाद सब कुछ बदल गया। उनका इशारा भू-राजनीतिक तनावों के बढ़ने की तरफ था।

इन जोखिमों में ऊंची तेल कीमतें, सप्लाई में रुकावट और विदेशी निवेश में उतार-चढ़ाव शामिल हैं, जो ग्रोथ, महंगाई और देश के बाहरी संतुलन पर असर डाल सकते हैं। इसके बावजूद भारत इन चुनौतियों से निपटने के लिए अच्छी स्थिति में है। हम इसे मैक्रोइकोनॉमिक मजबूती के साथ संभाल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की ग्रोथ को मजबूत घरेलू मांग, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और ऐसे नीतिगत सुधारों से सहारा मिला है, जिन्होंने सप्लाई क्षमता को बेहतर बनाया है। राजकोषीय घाटे में धीरे-धीरे कमी आ रही है, जबकि सरकार का पूंजी निवेश काफी बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि नीति निर्माताओं को सतर्क रहना होगा और उभरते जोखिमों पर तेजी से प्रतिक्रिया देनी होगी। भारत की उच्च विकास दर बनाए रखने के लिए बाहरी झटकों को संभालना और संरचनात्मक सुधारों व निवेश को जारी रखना बहुत जरूरी है।

भारत अभी दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और लंबे समय में अपने विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए लगातार तेज ग्रोथ का लक्ष्य रख रहा है।

--आईएएनएस

एवाई/डीकेपी