×

वैश्विक वीजा कार्यक्रमों में भारत का दबदबा, कुशल प्रतिभाओं का सबसे बड़ा निर्यातक बना देश: रिपोर्ट

 

नई दिल्ली, 11 जून (आईएएनएस)। गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया के प्रमुख वीजा कार्यक्रमों में शीर्ष स्थानों पर बना हुआ है। अमेरिका के एच-1बी वीजा कार्यक्रम में भारत सबसे बड़ा स्रोत देश है, जबकि ब्रिटेन के स्किल्ड वर्कर वीजा और यूरोपीय संघ के ब्लू कार्ड कार्यक्रम में भारत दूसरे स्थान पर है।

वर्कफोर्स मैनेजमेंट सर्विसेज फर्म डील की रिपोर्ट के अनुसार, भारत वैश्विक स्तर पर कुशल पेशेवरों की आपूर्ति में अहम भूमिका निभा रहा है और बदलते वैश्विक प्रवासन रुझानों का लाभ उठाने की मजबूत स्थिति में है। अब कंपनियां लागत कम करने के बजाय दुर्लभ और उच्च कौशल वाली प्रतिभाओं के लिए अधिक वेतन देने को तैयार हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के गोल्डन वीजा और सामान्य रोजगार वीजा दोनों श्रेणियों में सबसे आगे हैं। वर्तमान में यूएई की कुल आबादी में भारतीयों की हिस्सेदारी लगभग 38 प्रतिशत है।

150 से अधिक देशों में 40,000 से ज्यादा कंपनियों के भर्ती आंकड़ों पर आधारित इस रिपोर्ट में पाया गया कि वीजा धारक कर्मचारियों को समान पदों पर काम करने वाले स्थानीय कर्मचारियों की तुलना में अधिक वेतन मिलता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक भर्ती का मुख्य कारण प्रतिभा की कमी है, न कि कम वेतन पर कर्मचारियों को नियुक्त करना।

अमेरिका में एच-1बी वीजा धारकों का औसत वेतन 1.40 लाख डॉलर है, जबकि समान पदों पर अमेरिकी नागरिकों का औसत वेतन 1.30 लाख डॉलर है।

ब्रिटेन में स्किल्ड वर्कर वीजा धारकों की औसत आय 96,000 पाउंड है, जबकि स्थानीय नागरिकों की आय 87,000 पाउंड है।

यूएई में गोल्डन वीजा धारकों की औसत आय 6.05 लाख दिरहम है, जबकि सामान्य रोजगार वीजा धारकों की आय 4.59 लाख दिरहम है।

डील के प्लेटफॉर्म पर भारतीय पेशेवरों की भर्ती में सबसे तेज वृद्धि ऑस्ट्रेलिया में दर्ज की गई, जहां साल-दर-साल आधार पर 724 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद ब्रिटेन में 142 प्रतिशत और अमेरिका में 139 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय पेशेवरों के लिए यूएई सबसे बड़ा वैश्विक गंतव्य बना हुआ है। इसके बाद सिंगापुर, ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा का स्थान है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इंजीनियरिंग, सॉफ्टवेयर विकास, आर्टिफिशियल एंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भारतीय तकनीकी प्रतिभाओं की अंतरराष्ट्रीय मांग लगातार बढ़ रही है।

यूरोपीय संघ से बाहर के कुशल पेशेवरों को बिना नौकरी के प्रस्ताव के जर्मनी आने की अनुमति देने वाली जर्मनी की 'अवसर कार्ड' योजना के तहत जारी किए गए कुल परमिटों में लगभग एक-तिहाई भारतीयों को मिले हैं।

डील की अर्थशास्त्री लॉरेन थॉमस ने कहा कि अब प्रतिभाएं केवल कुछ पारंपरिक देशों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दुनिया के कई नए बाजारों की ओर जा रही हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत अब ऐसे नए दौर में प्रवेश कर सकता है, जहां विदेशों में प्रशिक्षित और अनुभव प्राप्त पेशेवर घरेलू अवसरों के बढ़ने के कारण वापस भारत लौटने लगें। इससे देश की प्रतिभा और आर्थिक क्षमता को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

--आईएएनएस

डीबीपी