पीयूष गोयल ने कैमरून में अफ्रीकी देशों के साथ भारत-अफ्रीका व्यापार और निवेश संबंधों पर चर्चा की
नई दिल्ली, 29 मार्च (आईएएनएस)। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार को कैमरून में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के मंत्री स्तरीय सम्मेलन के दौरान अफ्रीकी देशों के मंत्रियों और राजदूतों के साथ बैठक की। इस दौरान भारत-अफ्रीका के व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने के मुद्दे पर चर्चा हुई।
गोयल ने बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पोस्ट में कहा, "डब्ल्यूटीओ की 14वीं मंत्री स्तरीय बैठक (एमसी-14) के दौरान अफ्रीका समूह के मंत्रियों और राजदूतों के साथ सार्थक संवाद हुआ। निवेशों, विशेषकर अफ्रीका में भारत के निवेश विस्तार पर गहन चर्चा हुई।"
मंत्री ने आगे कहा, "हमारी चर्चाओं ने गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों तथा व्यापारिक रिश्तों को पुनः पुष्टि की। साथ ही हमने भारत-अफ्रीका के बीच व्यापार बढ़ाने और एमसी-14 एजेंडे पर विचार-विमर्श किया।"
गोयल ने डब्ल्यूटीओ मंत्री सम्मेलन के दौरान यूरोपीय संघ के व्यापार और आर्थिक सुरक्षा आयुक्त मारोस सेफकोविक से भी मुलाकात की।
दोनों नेताओं ने एमसी-14 एजेंडा के तहत प्राथमिकताओं पर चर्चा की और "भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर चल रहे काम की प्रगति की समीक्षा की, जैसा कि जनवरी 2026 में नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की ओर से घोषित किया गया था।
गोयल ने कहा, "हमने द्विपक्षीय आर्थिक और व्यापारिक साझेदारी को और गहरा करने के अवसरों पर भी चर्चा की।"
गोयल ने नाइजीरिया के उद्योग, व्यापार और निवेश मंत्री डॉ. जुमोके ओदुवोले से भी मुलाकात की।
उन्होंने कहा, "एमसी-14 एजेंडे पर चर्चा हुई और दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने के अवसरों का पता लगाया गया।"
ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो वीरा के साथ रचनात्मक बातचीत में एमसी-14 एजेंडे पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ। साथ ही द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को मजबूत करने और भारत-मर्कोसुर पीटीए के विस्तार पर चर्चा हुई।
डब्ल्यूटीओ बैठक में महात्मा गांधी के सत्य की विचारधारा से प्रेरित होकर, भारत ने निवेश सुविधा विकास (आईएफडी) समझौते के संवेदनशील मुद्दे पर अकेले खड़े होने का साहस दिखाया और इसे डब्ल्यूटीओ ढांचे में एनेक्स-4 समझौते के रूप में शामिल करने पर सहमति नहीं दी।
गोयल ने कहा, "समझौते को शामिल करने से डब्ल्यूटीओ की कार्य-सीमाएं खत्म होने और उसके मूल सिद्धांतों के कमजोर पड़ने का खतरा है।"
--आईएएनएस
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