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किसानों की आय बढ़ाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: सीएम संगमा

 

शिलांग, 11 मई (आईएएनएस)। मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने सोमवार को भोइरिम्बोंग के उम्सली में एक बायोचार प्लांट का उद्घाटन करते हुए कहा कि किसानों की आय में सुधार राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कृषि उत्पादों में मूल्यवर्धन आवश्यक है।

री भोई जिले के पूर्वी री भोई ऑर्गेनिक एफपीसी प्रोसेसिंग प्लांट में स्थापित बायोचार प्लांट को एक समुदाय-केंद्रित कार्बन निष्कासन पहल के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य सतत कृषि को बढ़ावा देना, मृदा स्वास्थ्य में सुधार करना और किसानों एवं बांस उत्पादकों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा करना है।

सीएम संगमा ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने मेघालय में कृषि उत्पादकता बढ़ाने और किसानों का समर्थन करने के लिए विभिन्न स्तरों पर कई पहल की हैं। सरकार के सबसे महत्वपूर्ण एजेंडों में से एक किसानों की आय में सुधार सुनिश्चित करना है। बेहतर मृदा प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण बीजों की समय पर उपलब्धता और कार्यशील पूंजी सहायता के माध्यम से किसानों का समर्थन करने के लिए कई योजनाएं, परियोजनाएं और मिशन शुरू किए गए हैं। कृषि उत्पादों में मूल्यवर्धन किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

नव-उद्घाटित बायोचार प्लांट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस परियोजना से राज्य को कई पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ होंगे। उन्होंने कहा, "हमारे राज्य की मिट्टी अम्लीय है, यहां भारी वर्षा होती है और बांस प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, इसलिए बायोचार का उत्पादन एक व्यवहार्य प्रस्ताव है।"

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्लांट में स्थापित दो पायरोलिसिस इकाइयां प्रक्रिया में कार्बन को अवशोषित करके कार्बन पृथक्करण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी, जबकि जैव-तेल और संश्लेषण गैस (सिन्गैस) जैसे उप-उत्पादों का भी पर्यावरण के अनुकूल उपयोग किया जा सकता है।

सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी डॉ. एस. आशुतोष ने मेघालय सामुदायिक बायोचार पहल का संक्षिप्त विवरण देते हुए कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य बांस संसाधनों का उपयोग करके सामुदायिक बायोचार उद्यमों के माध्यम से मृदा क्षरण, घटती उत्पादकता, पौध रोगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का समाधान करना है।

कंप्लायंस कार्ट द्वारा री भोई एफपीसी के साथ साझेदारी में कार्यान्वित इस परियोजना को 1.5 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किया गया है।

यह संयंत्र प्रतिदिन एक टन बांस प्रोसेस कर सकता है और अगले 20 वर्षों में लगभग 6,000 मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड को कम करने में सहायक होने के साथ-साथ अनुमानित 12 करोड़ रुपए का राजस्व उत्पन्न करने की उम्मीद है। बांस काटने वालों, मशीन संचालकों और किसानों सहित लगभग 250 से 300 सामुदायिक सदस्यों को इस पहल से प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है।

--आईएएनएस

ओपी/डीकेपी