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कर्नाटक के मंत्री ने केंद्र से बेंगलुरु-शिवमोग्गा मार्ग को उड़ान योजना में शामिल करने का किया आग्रह

 

बेंगलुरु, 11 जून (आईएएनएस)। कर्नाटक के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट मिनिस्टर एमबी पाटिल ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि बेंगलुरु-शिवमोग्गा एयर रूट को आने वाली उड़ान बिडिंग प्रक्रिया में शामिल किया जाए, ताकि वित्तीय नुकसान के कारण बंद हुई इस सेवा को फिर से शुरू किया जा सके।

इस संबंध में मंत्री एमबी पाटिल ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु और शिवमोग्गा के बीच सीधी हवाई सेवा बंद होने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बता दें कि शिवमोग्गा हवाई अड्डा ने फरवरी 2023 में परिचालन शुरू किया था। इसके बाद इंडिगो ने शिवमोग्गा और बेंगलुरु के बीच उड़ान सेवा शुरू की थी। हालांकि, पिछले कुछ महीनों से यह सेवा वित्तीय घाटे के कारण बंद पड़ी है।

पत्र में एमबी पाटिल ने कहा कि यह हवाई संपर्क शिवमोग्गा, चिक्कमगलुरु, कारवार, दावणगेरे, चित्रदुर्ग और हावेरी जैसे जिलों के आर्थिक, कृषि, पर्यटन और औद्योगिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि इस मार्ग पर उड़ान सेवा बंद होने से न केवल स्थानीय यात्रियों को परेशानी हो रही है, बल्कि देश और विदेश के अन्य शहरों तक पहुंचने वाले यात्रियों की कनेक्टिविटी भी प्रभावित हुई है।

मंत्री ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि बेंगलुरु-शिवमोग्गा मार्ग को वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) के समर्थन के साथ उड़ान योजना की आगामी बोली प्रक्रिया में शामिल किया जाए, ताकि एयरलाइंस को परिचालन में होने वाले नुकसान की भरपाई हो सके और सेवा दोबारा शुरू की जा सके।

उन्होंने यह भी बताया कि शिवमोग्गा एयरपोर्ट पर नाइट लैंडिंग सुविधा विकसित करने का काम तेजी से चल रहा है। इसके अलावा हवाई अड्डे पर अन्य सभी जरूरी बुनियादी ढांचा और सुविधाएं पहले से उपलब्ध हैं।

उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) योजना केंद्र सरकार की क्षेत्रीय संपर्क योजना है, जिसका उद्देश्य आम लोगों के लिए हवाई यात्रा को सस्ता बनाना और टियर-2 व टियर-3 शहरों को बेहतर हवाई संपर्क से जोड़ना है। इस योजना के तहत एयरलाइंस को वीजीएफ के रूप में सरकारी सहायता दी जाती है, जिससे कम किराए पर भी उड़ान सेवाएं संचालित की जा सकें। योजना शुरू होने के बाद देश के कई दूरदराज, पहाड़ी और द्वीपीय क्षेत्रों को भी हवाई नेटवर्क से जोड़ा जा चुका है।

--आईएएनएस

वीकेयू/डीकेपी