सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के लिए बड़ी उपलब्धि: आईबीएम ने पेश की दुनिया की पहली सब-1 नैनोमीटर चिप तकनीक
नई दिल्ली, 25 जून (आईएएनएस)। अमेरिकी टेक कंपनी आईबीएम ने गुरुवार को दुनिया की पहली सब-1 नैनोमीटर (एनएम) चिप तकनीक का अनावरण किया, जिसे सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि पारंपरिक चिप तकनीक अब अपने भौतिक सीमाओं के करीब पहुंच रही है।
कंपनी के अनुसार, यह नई चिप 0.7 नैनोमीटर (7 एंग्स्ट्रॉम) प्रोसेस नोड पर आधारित है और इसमें 'नैनोस्टैक' नामक एक नई 3-डायमेंशनल ट्रांजिस्टर आर्किटेक्चर का उपयोग किया गया है।
आईबीएम ने बताया कि नई चिप परमाणु स्तर (एटॉमिक स्केल) पर भी बेहतर प्रदर्शन और ऊर्जा दक्षता बनाए रखने में सक्षम है।
इस चिप में लगभग 100 अरब ट्रांजिस्टर लगाए गए हैं, जबकि इसका आकार एक सामान्य नाखून जितना ही है। यह 2021 में पेश की गई आईबीएम की 2 नैनोमीटर चिप तकनीक की तुलना में लगभग दोगुनी ट्रांजिस्टर घनत्व प्रदान करती है।
कंपनी का दावा है कि नई तकनीक 2 नैनोमीटर चिप्स की तुलना में 50 प्रतिशत तक बेहतर प्रदर्शन या 70 प्रतिशत अधिक ऊर्जा दक्षता प्रदान कर सकती है।
इस तकनीक का उपयोग भविष्य में जनरेटिव एआई, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और अगली पीढ़ी के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों जैसी उच्च क्षमता वाली तकनीकों में किया जा सकेगा।
आईबीएम रिसर्च के निदेशक और आईबीएम फेलो जे गैम्बेटा ने कहा कि यह उपलब्धि कंप्यूटिंग के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक क्षण है।
उन्होंने कहा, "आईबीएम की यह नई चिप तकनीक कंप्यूटिंग को नैनोमीटर युग से आगे ले जाकर सीधे परमाणु स्तर तक पहुंचाने वाली बड़ी सफलता है।"
कंपनी के अनुसार, नैनोस्टैक आर्किटेक्चर में ट्रांजिस्टरों को एक के ऊपर एक और अलग-अलग स्तरों पर व्यवस्थित किया जाता है। इससे एक ही चिप पर अधिक संख्या में ट्रांजिस्टर लगाए जा सकते हैं। साथ ही, विभिन्न सामग्रियों को अलग-अलग तरीके से अनुकूलित किया जा सकता है, जिससे प्रदर्शन और ऊर्जा दक्षता दोनों में सुधार होता है।
आईबीएम के शोधकर्ताओं ने यह भी दिखाया कि नैनोस्टैक तकनीक एसआरएएम स्केलिंग को काफी बेहतर बना सकती है।
इससे चिप डिजाइनरों को ऐसे अधिक सक्षम और ऊर्जा-कुशल प्रोसेसर बनाने में मदद मिलेगी, जो एआई-आधारित भारी डेटा प्रोसेसिंग और हाई-बैंडविड्थ वर्कलोड को आसानी से संभाल सकें।
कंपनी का अनुमान है कि इस तकनीक का पहला व्यावसायिक उपयोग अगले पांच वर्षों के भीतर शुरू हो सकता है।
आईबीएम ने बताया कि यह शोध अल्बानी, न्यूयॉर्क स्थित उसके सेमीकंडक्टर रिसर्च सेंटर में किया गया।
इस परियोजना में एएसएमएल, लैम रिसर्च, टोक्यो इलेक्ट्रॉन और स्क्रीन सेमीकंडक्टर सॉल्यूशंस जैसी प्रमुख वैश्विक कंपनियों ने भी सहयोग किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि आईबीएम की यह नई तकनीक आने वाले वर्षों में चिप निर्माण उद्योग की दिशा बदल सकती है। इससे अधिक शक्तिशाली, तेज और ऊर्जा-कुशल एआई सिस्टम, क्लाउड सर्वर और स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस विकसित करना संभव होगा।
--आईएएनएस
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